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उधार लेकर दिया किराया तब जाकर पहुंचे घर
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भदोही। ब्लॉक के डूड़वा कुकरौठी के विक्की गुप्ता पिछले दस वर्ष से मुंबई के ठाणे में रह कर फलों का व्यवसाय करते रहे हैं। वहां अपनी माता, पत्नी और भाई के साथ रहते थे। दस वर्षों में इतना कुछ बना लिया था कि उन्हें लगता ही नहीं था कि कभी भदोही लौटना होगा। लेकिन समय को शायद कुछ और ही मंजूर था। 22 मार्च से लॉकडाउन क्या शुरू हुआ उन्हें घर भागने को मजबूर होना पड़ा।
बताया कि एकाएक लॉकडाउन होने से भारी मात्रा में फल का नुकसान हो गया। दो महीने तक भरा पूरा परिवार किसी तरह चलाने के बाद दो किराए के मकानों का भाड़ा आदि देने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे कि यहां आगे रह पाना आसान नहीं है। लेकिन तब तक जमा पूंजी खत्म हो चुकी थी। कहा कि जब वहां से लौटने की बारी आई तो इस जेब भी खाली था। बड़ी मुश्किल से एक टाटा मैजिक भाड़े पर किया गया जिसमें जौनपुर और भदोही जिले के लोग पहले से थे। भाड़े के रूप में मैजिक वाले ने हम छह लोगों के 15 हजार रुपये लिए जो कर्ज लेकर दिए। क्योंकि वहां एक एक दिन रहने का मतलब हजारों रुपये खर्च था। बताया कि अब सामने एक एक दिन का खर्च चला पाना मुश्किल है। हालात सबके खराब हैं इसलिए कहीं से मदद भी नहीं मिल रही। अब एक उम्मीद प्रधानमंत्री जी से लगी है। आखिर वे हमारे रोजगार के लिए कुछ करेंगे।
डुड़वा कुकरौठी के ही जयप्रकाश विश्वकर्मा तीन महीने पूर्व रोजगार की तलाश में राजस्थान गए थे। उनका सफर सिर मुड़ाते ओले पड़ने जैसा था। ठीक से काम भी नहीं शुरू कर पाए थे कि लॉकडाउन शुरू हो गया और वहां से भागने की नौबत आ गई। जेब में पैसे भी नहीं थे किसी किसी दिन तो भूखे पेट सोना पड़ा। नया होने के नाते जहां काम करता था वहां से सहयोग नहीं मिला। आखिरकार घर से पैसा मंगा कर भोजन की व्यवस्था की। घर वालों के ही सुझाव पर राजस्थान में ही घर लौटने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जिसके बाद वहां की सरकार ने भदोही भेजने की व्यवस्था की। अच्छी बात यह रही कि लौटने के लिए भाड़ा नहीं देना पड़ा।
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बताया कि एकाएक लॉकडाउन होने से भारी मात्रा में फल का नुकसान हो गया। दो महीने तक भरा पूरा परिवार किसी तरह चलाने के बाद दो किराए के मकानों का भाड़ा आदि देने के बाद इस नतीजे पर पहुंचे कि यहां आगे रह पाना आसान नहीं है। लेकिन तब तक जमा पूंजी खत्म हो चुकी थी। कहा कि जब वहां से लौटने की बारी आई तो इस जेब भी खाली था। बड़ी मुश्किल से एक टाटा मैजिक भाड़े पर किया गया जिसमें जौनपुर और भदोही जिले के लोग पहले से थे। भाड़े के रूप में मैजिक वाले ने हम छह लोगों के 15 हजार रुपये लिए जो कर्ज लेकर दिए। क्योंकि वहां एक एक दिन रहने का मतलब हजारों रुपये खर्च था। बताया कि अब सामने एक एक दिन का खर्च चला पाना मुश्किल है। हालात सबके खराब हैं इसलिए कहीं से मदद भी नहीं मिल रही। अब एक उम्मीद प्रधानमंत्री जी से लगी है। आखिर वे हमारे रोजगार के लिए कुछ करेंगे।
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डुड़वा कुकरौठी के ही जयप्रकाश विश्वकर्मा तीन महीने पूर्व रोजगार की तलाश में राजस्थान गए थे। उनका सफर सिर मुड़ाते ओले पड़ने जैसा था। ठीक से काम भी नहीं शुरू कर पाए थे कि लॉकडाउन शुरू हो गया और वहां से भागने की नौबत आ गई। जेब में पैसे भी नहीं थे किसी किसी दिन तो भूखे पेट सोना पड़ा। नया होने के नाते जहां काम करता था वहां से सहयोग नहीं मिला। आखिरकार घर से पैसा मंगा कर भोजन की व्यवस्था की। घर वालों के ही सुझाव पर राजस्थान में ही घर लौटने के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जिसके बाद वहां की सरकार ने भदोही भेजने की व्यवस्था की। अच्छी बात यह रही कि लौटने के लिए भाड़ा नहीं देना पड़ा।
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