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आंधी-बारिश से 10 घंटे बाधित रही तटवर्ती क्षेत्र की बिजली

Mon, 20 Jun 2022 09:51 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jun 2022 09:51 PM IST
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The power of the coastal area was disrupted for 10 hours due to storm and rain
तेज आंधी से मरसड़ा गांव में दीवाल पर गिरा खंभा। संवाद - फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। रविवार को देर रात आंधी और बारिश के बीच ठप हुई बिजली आपूर्ति दूसरे दिन 10 घंटे बाद ही बहाल हो सकी। तटवर्ती क्षेत्र के एक दर्जन गांव अंधेरे में रहे। आंधी-बारिश बंद होने के बाद बच्चे, महिलाएं गर्मी से परेशान रहे तो सुबह होने पर पेयजल संसाधन नहीं चल सके थे। तटवर्ती गांव मरसड़ा, अरता, पिड़रा, बेरवांपहाड़पुर, ओझापुर, कलिंजरा, कोइरौना के उपभोक्ताओं ने बताया कि वहिदानगर, सीतामढ़ी, सेमराध उपकेंद्रों पर तैनात कर्मचारियों के कारण इस तरह की समस्या झेलनी पड़ रही है। कारण यह है कि 20 वर्ष से फीडरों पर लगे तार, खंभे जर्जर हो गए हैं। हल्की बारिश होने पर शार्टसर्किट, तेज हवा चलने के दौरान तारों के टूटने का सिलसिला बारिश के मौसम में जारी रहता है। उपभोक्ता रामादीन पांडेय ने बताया कि उपकेंद्रों के रखरखाव की जिम्मेदारी लेने वाले संविदा कर्मी नशे में रहते हैं। आपूर्ति बाधित होने पर पावर हाउस गोपीगंज में तैनात कर्मचारियों को ब्रेकडाउन रखने को कह दिया जाता है। उपभोक्ता नंदलाल तिवारी ने बताया कि विभाग के अधिकारी मुख्यालय को छोड़कर ग्रामीण क्षेत्रों की हालत देखना नहीं चाहते। उपभोक्ता विनय पांडेय ने बताया कि उपकेंद्र से कुछ दूर तार और खंभे नया लगाकर तटवर्ती क्षेत्रों में उपकरणों उस स्थिति में भी नहीं बदला जाता जो आपूर्ति में बाधक बने रहते है। अधिशासी अभियंता सदर अमर सिंह ने बताया कि आंधी की गति तेज होने के कारण कई स्थानों पर तार टूट गए थे। सुबह होने पर तारों को जोड़वाकर आपूर्ति 10 बजे तक बहाल करा दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पांच वर्ष पूर्व शुरू हुई सौभाग्य योजना पूरी नहीं हो सकी है। नये वित्तीय सत्र में विद्युत विभाग वीपरैंप योजना के इंतजार में है। उपभोक्ता कड़ेदीन ने बताया कि 10 वर्ष पूर्व तार और खंभों को बदलने के नाम पर स्टोर में नये तार, खंभे आए ही थे। परवान चढ़ी सौभाग्य योजना ने ठेकेदारों से लेकर उपकेंद्रों पर तैनात रहने वालों की किस्मत बदल दी। उदाहरण सामने है कि जंगीगंज-धनतुलसी मुख्य मार्ग के किनारे योजना के उपकरण बदहाल स्थिति में मिल सकते हैं। तटवर्ती क्षेत्र छेछुआ, भुर्रा, सोनपुर-कटरा, इटहरा, कूड़ीकला के लोग निजी खर्च से केबिल, बांस, बल्ली के सहारे काम निकाल रहे है। अधिशासी अभियंता सदर अमर सिंह ने बताया कि जर्जर तार, खंभे बदलने के लिए वीपरैम्प योजना का स्टीमेट पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम वाराणसी को प्राप्त हो चुका है। जिले का आवंटन मिलने पर ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति में सुधार आएगा।
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