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नहरों का जाल, फिर भी किसान परेशान
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पूर्वांचल के भदोही, प्रयागराज, मिर्जापुर और वाराणसी के किसानों की लाइफ लाइन कही जाने वाली ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना से जिले में मुख्य नहर सहित कुल 22 नहरों का जाल 226 किमी में बिछा हुआ है, लेकिन समय पर पानी नहीं छोड़े जाने से किसान बेहाल है। गेहूं की पहली सिंचाई को लेकर चिंतित किसानों में रोष है।
जिले की लगभग 13 हजार 464 हेक्टेयर में गेहूं की फसल की सिंचाई नहरों से की जाती है। कोनिया के डीघ रजवाहा से 1245 हेक्टेयर, बहोरनपुर माइनर से 108 हेक्टेयर, बारीपुर माइनर से 63 हेक्टेयर गेहूं की सिंचाई का क्षेत्र विभाग ने निर्धारित किया है। इसके बावजूद किसानों को उनके खेतों की सिंचाई के लिए समय से पानी नहीं मिल पाता है। किसानों को जिस समय खेतों को सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता है, जबकि नहर विभाग नहरों की साफ सफाई का महज कोरम पूरा करने में लगा है। रबी के सीजन की मुख्य फसल गेहूं की बोआई का सबसे उपयुक्त समय 15 नवंबर से शुरू होकर दिसंबर का प्रथम सप्ताह तक होता है। इसके बाद पिछैती गेहूं की बुआई होती है, जिसका औसत पैदावार कम होता है। ज्ञात हो कि धान की कटाई के पश्चात खेतों की जोताई की जाती है। जिन खेतों में नमी कम रहती है, उन खेतों का पलेवा आवश्यक होता है। क्योंकि खेतों में नमी की कमी रहने से बोए गए बीजों का अंकुरण अच्छे ढंग से नहीं हो पाता है। इस दृष्टि से खेतों के पलेवा के लिए में पानी नवंबर के प्रथम सप्ताह से ही छोड़ा जाना चाहिए, लेकिन अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने नहरों को चलाने का शेड्यूल 26 दिसंबर तय किया है। इन परिस्थितियों में जब किसानों को पलेवा और सिंचाई के लिए पानी ही सही समय से नहीं मिलेगा तो गेहूं की बोआई और अच्छी पैदावार की बात बेमानी है। उधर, स्थिति यह है कि मुख्य नहर सहित डीघ रजवाहा, बारीपुर माइनर में एक बूंद पानी नहीं है। इसके चलते किसानों की गेहूं की बोआई नहीं हो पा रही है।
कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि जिले में 50 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है। गेहूं की बोआई का अनुकूल समय 15 नवंबर से शुरू होकर दिसंबर के प्रथम सप्ताह तक होता है। उधर, ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना के अधिशासी अभियंता पुुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि नहरों की साफ - सफाई के लिए एक माह तक बंद किया जाता है। साफ - सफाई का कार्य 80 फीसदी तक पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि नहरों में पानी छोड़ने का रोस्टर 26 दिसंबर तय है, लेकिन इस वर्ष 21 दिसंबर को नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा।
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जिले की लगभग 13 हजार 464 हेक्टेयर में गेहूं की फसल की सिंचाई नहरों से की जाती है। कोनिया के डीघ रजवाहा से 1245 हेक्टेयर, बहोरनपुर माइनर से 108 हेक्टेयर, बारीपुर माइनर से 63 हेक्टेयर गेहूं की सिंचाई का क्षेत्र विभाग ने निर्धारित किया है। इसके बावजूद किसानों को उनके खेतों की सिंचाई के लिए समय से पानी नहीं मिल पाता है। किसानों को जिस समय खेतों को सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता है, जबकि नहर विभाग नहरों की साफ सफाई का महज कोरम पूरा करने में लगा है। रबी के सीजन की मुख्य फसल गेहूं की बोआई का सबसे उपयुक्त समय 15 नवंबर से शुरू होकर दिसंबर का प्रथम सप्ताह तक होता है। इसके बाद पिछैती गेहूं की बुआई होती है, जिसका औसत पैदावार कम होता है। ज्ञात हो कि धान की कटाई के पश्चात खेतों की जोताई की जाती है। जिन खेतों में नमी कम रहती है, उन खेतों का पलेवा आवश्यक होता है। क्योंकि खेतों में नमी की कमी रहने से बोए गए बीजों का अंकुरण अच्छे ढंग से नहीं हो पाता है। इस दृष्टि से खेतों के पलेवा के लिए में पानी नवंबर के प्रथम सप्ताह से ही छोड़ा जाना चाहिए, लेकिन अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने नहरों को चलाने का शेड्यूल 26 दिसंबर तय किया है। इन परिस्थितियों में जब किसानों को पलेवा और सिंचाई के लिए पानी ही सही समय से नहीं मिलेगा तो गेहूं की बोआई और अच्छी पैदावार की बात बेमानी है। उधर, स्थिति यह है कि मुख्य नहर सहित डीघ रजवाहा, बारीपुर माइनर में एक बूंद पानी नहीं है। इसके चलते किसानों की गेहूं की बोआई नहीं हो पा रही है।
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कृषि अधिकारी अशोक कुमार ने कहा कि जिले में 50 हजार हेक्टेयर में गेहूं की खेती होती है। गेहूं की बोआई का अनुकूल समय 15 नवंबर से शुरू होकर दिसंबर के प्रथम सप्ताह तक होता है। उधर, ज्ञानपुर पंप नहर परियोजना के अधिशासी अभियंता पुुष्पेंद्र सिंह का कहना है कि नहरों की साफ - सफाई के लिए एक माह तक बंद किया जाता है। साफ - सफाई का कार्य 80 फीसदी तक पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि नहरों में पानी छोड़ने का रोस्टर 26 दिसंबर तय है, लेकिन इस वर्ष 21 दिसंबर को नहरों में पानी छोड़ दिया जाएगा।
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