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हैदराबाद प्रकरण पर बोला प्रबुद्ध वर्ग
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ज्ञानपुर। हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक के साथ दरिंदगी करने वाले गुनहगारों को पुलिस एनकाउंटर में मार दिए जाने की घटना पर जिले के प्रबुद्ध ने मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है। हालांकि ज्यादातर लोगों का मानना है कि दरिंदे इसी सजा के पात्र थे, लेकिन पुलिस कानून को हाथ में नहीं ले सकती। अगर उन्हें कोर्ट के जरिए सजा मिलती तो कहीं बेहतर रहता।
हैदराबाद में गत दिनों पशु चिकित्सक के साथ हैवानियत करने के आरोपियों को बृहस्पतिवार की देर रात तेलंगाना पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। पुलिस का दावा है कि चारों आरोपी भागने का प्रयास कर रहे थे। इस मसले पर शुक्रवार को भदोही जिले के प्रबुद्ध वर्ग से रायशुमारी की गई तो मिलेजुले विचार सामने आए। राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत नाट्य कलाकार राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बिटिया के गुनहगारों को कठोर दंड देना चाहिए। इससे कोई समझौता नहीं होना चाहिए, लेकिन जो हुआ है, उससे पुलिस की बदनामी हुई है। न्यायालय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम के मो. राशिद खान ने कहा कि पुलिस की यह कार्रवाई कानूनी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। भविष्य में इसका परिणाम कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलने के रूप में भी हो सकता है। शिवशंकर पांडेय ने कहा कि देश की भावनाओं को देखते हुए पुलिस की यह कार्रवाई उचित ही कही जाएगी। जैसी दलील दी जा रही है उसके हिसाब से कहा जा सकता है कि अगर पुलिस कार्रवाई न करती तो बदमाश भाग सकते थे। इससे आगे इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। केएनपीजी कॉलेज के प्राचीन इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कामिनी वर्मा कहती हैं कि अगर पुलिस की यह दलील कि वे मौके का फायदा उठाकर भाग रहे थे और उन्हें रोकने के लिए गोली चलानी पड़ी तब तो जो हुआ वह ठीक ही है। लेकिन, साथ ही हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि इस तरह की घटनाओं से पुलिस निरंकुश भी हो सकती है। यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
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हैदराबाद में गत दिनों पशु चिकित्सक के साथ हैवानियत करने के आरोपियों को बृहस्पतिवार की देर रात तेलंगाना पुलिस ने एनकाउंटर में ढेर कर दिया। पुलिस का दावा है कि चारों आरोपी भागने का प्रयास कर रहे थे। इस मसले पर शुक्रवार को भदोही जिले के प्रबुद्ध वर्ग से रायशुमारी की गई तो मिलेजुले विचार सामने आए। राष्ट्रपति पुरस्कार से पुरस्कृत नाट्य कलाकार राजकुमार श्रीवास्तव ने कहा कि बिटिया के गुनहगारों को कठोर दंड देना चाहिए। इससे कोई समझौता नहीं होना चाहिए, लेकिन जो हुआ है, उससे पुलिस की बदनामी हुई है। न्यायालय को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम के मो. राशिद खान ने कहा कि पुलिस की यह कार्रवाई कानूनी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। भविष्य में इसका परिणाम कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलने के रूप में भी हो सकता है। शिवशंकर पांडेय ने कहा कि देश की भावनाओं को देखते हुए पुलिस की यह कार्रवाई उचित ही कही जाएगी। जैसी दलील दी जा रही है उसके हिसाब से कहा जा सकता है कि अगर पुलिस कार्रवाई न करती तो बदमाश भाग सकते थे। इससे आगे इस तरह की घटनाओं पर अंकुश लगेगा। केएनपीजी कॉलेज के प्राचीन इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. कामिनी वर्मा कहती हैं कि अगर पुलिस की यह दलील कि वे मौके का फायदा उठाकर भाग रहे थे और उन्हें रोकने के लिए गोली चलानी पड़ी तब तो जो हुआ वह ठीक ही है। लेकिन, साथ ही हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि इस तरह की घटनाओं से पुलिस निरंकुश भी हो सकती है। यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
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