गंगा का जलस्तर अब तेजी से घटने लगा है लेकिन संक्रामक बीमारियों की आशंका बढ़ गई है। जगह-जगह जलभराव, गंदगी और दुर्गंध से लोग परेशान हैं। मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। ऐसे में बाढ़ प्रभावित 53 गांवों में संक्रामक बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है। चिकित्सकों के मुताबिक ऐसे समय में चर्म रोग, डेंगू मलेरिया के साथ ही पेट संबंधित बीमारियां होने की संभावना अधिक रहती है। लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। जहां बाढ़ का जलस्तर कम होने से गंगा के आसपास बसे लोग राहत महसूस कर रहे है। वहीं जगह-जगह जलभराव और पानी में सड़न से दुर्गंध फैलनी शुरू हो गई है जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। रामपुर घाट निवासी बंटी सिंह, घनश्याम कौशल, नागेंद्र निषाद, महेंद्र निषाद का कहना है कि पिछले चार पांच दिन से बाढ़ का पानी तेजी से घटा है। इससे दुर्गंध और गंदगी घरों के आसपास फैली है। इससे संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका है। अभी तक दवाओं का छिड़काव और सफाई की व्यवस्था नहीं की गई। सीएमओ संतोष चक ने बताया है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद घरों के आसपास गंदगी बढ़ जाने से बीमारियों की संभावनाएं बढ़ गईं हैं। इसके अलावा मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है। ऐसे समय में चर्म रोग, डेंगू मलेरिया के साथ ही पेट संबंधित बीमारियां होने की संभावना अधिक रहती है। सामान्य दिनों की तुलना में इस समय सेहत को लेकर अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। इन गांवों में एंटी लार्वा का दवा का छिड़काव शुरू कर दिया गया है।