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अनुपयोगी हो गए शवदाह गृह, गंगा किनारे होता है अंतिम संस्कार

Wed, 16 Mar 2022 10:57 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 16 Mar 2022 10:57 PM IST
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The crematorium has become unusable, the last rites are performed on the banks of the Ganges.
मां गंगा को निर्मल करने के लिए श्मशान घाट पर शवदाह गृह बनाने की योजना है। इसके तहत करीब सात साल पहले सीतामढ़ी इलाके के कई ग्राम पंचायतों में शवदाह गृह बनाए गए हैं लेकिन देखरेख के अभाव में अब वे खंडहर के रूप में तब्दील होते जा रहे हैं। कहीं बिजली का कनेक्शन नहीं है तो कहीं वहां लगा सबमर्सिबल पंप खराब पड़ा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि करीब सात साल पहले 18-18 लाख रुपये की लागत से शवदाह गृह का निर्माण कराया गया था। जब निर्माण हो रहा था, तभी लोगों ने मानक के अनुसार काम किए जाने की मांग की थी, लेकिन शवदाह गृह कई जगह तो गंगा घाट से काफी दूरी पर बना दिए गएऔर कई जगह मानक के अनुसार नहीं बने। उसका नतीजा यह हुआ कि लोग शवदाह गृह में नहीं, बल्कि पुराने स्थान यानी गंगा घाट पर ही अंतिम संस्कार करते रहे। सीतामढ़ी के श्मशान घाट पर कई साल पहले बना शवदाह गृह शोपीस बन कर रह गया है। ग्रामीणों का कहना है कि शवदाह गृह बदहाल हो गया है। अंदर घास फूस और सरपत के झाड़ फूस उग आए हैं। वहां लगा सबमर्सिबल पंप भी खराब पड़ा है। अभी तक बिजली भी नहीं पहुंच सकी है। प्रकाश व्यवस्था नहीं होने से रात के समय में अंधेरे में ही लोगों को अंतिम संस्कार करना पड़ता है। इसी तरह डीघ के गोपालापुर कलिंजरा गांव के गंगा घाट से काफी दूर बना शवदाह गृह भी निष्प्रयोज्य है, जबकि इन शवदाह स्थलों के निर्माण पर सरकार ने लाखों रुपये खर्च किया है। क्षेत्र के सरकार शुक्ला, धर्मेंद्र सिंह, मिश्रीलाल ने कहा कि यदि देखरेख की जाय और ठीक से मरम्मत करा दी जाय तो लोगों को इसका लाभ मिलेगा। उधर, डीघ ब्लॉक के कोनिया क्षेत्र के चार गंगा तटीय गांवों खेमापुर, दुगुना, कूड़ी खुर्द और मवैयाथान सिंह गांव के श्मशान घाटों पर शवदाह गृह का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। हर शवदाह गृह के निर्माण पर 24 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं। यहां शवदाह गृहों में शांति स्थल, पंप, इंटर लॉकिंग, बाउंड्री वाल, दो कमरे, कार्यालय, अंत्येष्टि स्थल और शेड सहित अन्य कार्य कराए जाने हैं। डीघ के प्रभारी बीडीओ एके प्रजापति का कहना है कि जो शवदाह गृह खराब हैं, उसकी जांच करायी जाएगी। होली के बाद ग्राम पंचायतों द्वारा पड़ताल करवाकर सुधार का प्रयास किया जाएगा।
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