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मनरेगा और चौदहवां वित्त से दूर होगी गौशालाओं की ठंड
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ज्ञानपुर। प्रदेश सरकार के सख्त निर्देश पर अब जनपद के छह ब्लाक क्षेत्रों में संचालित 17 अस्थायी और एक स्थार्यी गोशालाओं में संरक्षण ले रहे छुट्टा पशुओं को ठंड से बचाने के लिए पशुपालन विभाग ने मॉनिटरिंग बढ़ा दी है। भले ही विभाग से गोशाला संचालकों को धेला न मिला हो, लेकिन मनरेगा और चौदहवें वित्त आयोग से पालीथिनयुक्त बैरिकेडिंग कर पशुओं को बचाना ही पड़ेगा।
सीवीओ डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि एक सप्ताह में सभी गोशालाओं को पालीथिन तिरपाल लगवा दी जाएगी और 12 गोशालाओं में तिरपाल लग जाने से पशुओं को ठंड से राहत भी मिलना शुरू हो गया है। शेष बचने वाले गोशालाओं को भी सुरक्षित करा दिया जाएगा। बताते हैं कि उच्चाधिकारियों के नेतृत्व में गठित पशु संरक्षण समिति की देखरेख में संरक्षण प्राप्त पशुओं को 30 रुपये की दर से अब तक तीन करोड़ रुपये खर्च करा दिया गया है, लेकिन अतिरिक्त सुविधाएं संबंधित ब्लाक में संचालित हो रहे गौशालाओं की देखरेख कर रहे ग्राम प्रधानों को जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। फिर भी संरक्षण समिति के दावे रुटीन पर न होने से अधिकांश पशु छोटी-बड़ी सड़कों और खेत-खलिहानों में ही समय काटने को मजबूर हो उठे हैं।
30 हजार से अधिक पशुओं को नहीं मिलेगी राहत
ज्ञानपुर। पशु संरक्षण के नाम पर खर्च हो चुके तीन करोड़ के बाद भी नगर क्षेत्रों में विचरण करने वाले 30 हजार से अधिक छुट्टा पशुओं को ठंड राहत मिलना मुश्कि ल ही दिख रहा है। 18 गोशालाओं में संरक्षण लेने वाले लगभग दो हजार से अधिक पशुओं की चिंता है लेकिन30 हजार से अधि क सड़कों और सिवानों में ककंठित जीवन बीताने वालों की ओर न विभाग ही कोई कदम उठा पा रहा है न प्रदेश सरकार। विभागीय सूत्रों का कहना रहा कि ग्रामीण अंचलों में घूमने वाले पशुओं को ग्राम स्तर व नगर क्षेत्रों में पालिका और नगर पंचायतों को संरक्षण गृह पहुंचाने की जिम्मेदारी है लेकिन नगर प्रशासन उससे भटक चुका है जिसका खामियाजा छुट्टा पशु राजमार्ग पर पहुंच कर भुगत रहे हैं।
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सीवीओ डॉ. जेपी सिंह ने बताया कि एक सप्ताह में सभी गोशालाओं को पालीथिन तिरपाल लगवा दी जाएगी और 12 गोशालाओं में तिरपाल लग जाने से पशुओं को ठंड से राहत भी मिलना शुरू हो गया है। शेष बचने वाले गोशालाओं को भी सुरक्षित करा दिया जाएगा। बताते हैं कि उच्चाधिकारियों के नेतृत्व में गठित पशु संरक्षण समिति की देखरेख में संरक्षण प्राप्त पशुओं को 30 रुपये की दर से अब तक तीन करोड़ रुपये खर्च करा दिया गया है, लेकिन अतिरिक्त सुविधाएं संबंधित ब्लाक में संचालित हो रहे गौशालाओं की देखरेख कर रहे ग्राम प्रधानों को जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है। फिर भी संरक्षण समिति के दावे रुटीन पर न होने से अधिकांश पशु छोटी-बड़ी सड़कों और खेत-खलिहानों में ही समय काटने को मजबूर हो उठे हैं।
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30 हजार से अधिक पशुओं को नहीं मिलेगी राहत
ज्ञानपुर। पशु संरक्षण के नाम पर खर्च हो चुके तीन करोड़ के बाद भी नगर क्षेत्रों में विचरण करने वाले 30 हजार से अधिक छुट्टा पशुओं को ठंड राहत मिलना मुश्कि ल ही दिख रहा है। 18 गोशालाओं में संरक्षण लेने वाले लगभग दो हजार से अधिक पशुओं की चिंता है लेकिन30 हजार से अधि क सड़कों और सिवानों में ककंठित जीवन बीताने वालों की ओर न विभाग ही कोई कदम उठा पा रहा है न प्रदेश सरकार। विभागीय सूत्रों का कहना रहा कि ग्रामीण अंचलों में घूमने वाले पशुओं को ग्राम स्तर व नगर क्षेत्रों में पालिका और नगर पंचायतों को संरक्षण गृह पहुंचाने की जिम्मेदारी है लेकिन नगर प्रशासन उससे भटक चुका है जिसका खामियाजा छुट्टा पशु राजमार्ग पर पहुंच कर भुगत रहे हैं।
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