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21 हजार गर्भवती महिलाओं की होगी टीबी जांच
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ज्ञानपुर। राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले में 21 हजार गर्भवती महिलाओं की टीबी जांच की जाएगी। देश को 2025 तक टीबी मुक्त बनाना है। इसके लिए सरकार की ओर से अभियान चलाया जा रहा है।
जिले में मरीजों की पहचान कर उनकों नि:शुल्क जांच और दवा दी जाती है। भरण पोषण के लिए पांच सौ रुपये प्रति मरीज सरकार की ओर से भत्ता के रूप में मरीज के खाते में भेजा जाता है। सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी जांच की सुविधा है। इसके लिए विभागीय स्तर से टीम का गठन कर दिया गया है। इस संबंध में शासन ने विभाग के प्रभारी चिकित्साधिकारी एवं अपर मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजा जा चुका है। यदि किसी भी गर्भवती महिला को प्रसव के पूर्व जांच में दो सप्ताह से खांसी व बुखार है या वजन कम हो रहा है, रात में पसीना आता है ते जांच जरूरी है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर
गर्भवती महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती हैं। ऐसे में उनको संक्रामक बीमारियों की चपेट में आने की आशंका ज्यादा होती है। चिकित्सक यह परामर्श देते हैं कि गर्भवती महिलाओं के लिए यह आवश्यक है कि वह चार बार जरूरी प्रसव पूर्व जांच कराए। गर्भावस्था के दौरान अपने खानपान का पूरा ख्याल रखें। आयरन व कैल्शियम की गोलियों का सेवन करें। समय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेते रहे।
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डीटीओ डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि टीबी के प्रति जागरूकता अभियान निरंतर चलाया जा रहा है। टीबी मरीजों को नि:शुल्क दवा, जांच की सुविधाएं मिल रही हैं। साथ ही उन्हें पौष्टिक आहार के लिए हर महीने भत्ता भी दिया जाता है। शासन के निर्देशानुसार काम किया जाता है।
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जिले में मरीजों की पहचान कर उनकों नि:शुल्क जांच और दवा दी जाती है। भरण पोषण के लिए पांच सौ रुपये प्रति मरीज सरकार की ओर से भत्ता के रूप में मरीज के खाते में भेजा जाता है। सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी जांच की सुविधा है। इसके लिए विभागीय स्तर से टीम का गठन कर दिया गया है। इस संबंध में शासन ने विभाग के प्रभारी चिकित्साधिकारी एवं अपर मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजा जा चुका है। यदि किसी भी गर्भवती महिला को प्रसव के पूर्व जांच में दो सप्ताह से खांसी व बुखार है या वजन कम हो रहा है, रात में पसीना आता है ते जांच जरूरी है।
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रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर
गर्भवती महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती हैं। ऐसे में उनको संक्रामक बीमारियों की चपेट में आने की आशंका ज्यादा होती है। चिकित्सक यह परामर्श देते हैं कि गर्भवती महिलाओं के लिए यह आवश्यक है कि वह चार बार जरूरी प्रसव पूर्व जांच कराए। गर्भावस्था के दौरान अपने खानपान का पूरा ख्याल रखें। आयरन व कैल्शियम की गोलियों का सेवन करें। समय समय पर चिकित्सकीय सलाह लेते रहे।
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डीटीओ डॉ. विवेक श्रीवास्तव ने बताया कि टीबी के प्रति जागरूकता अभियान निरंतर चलाया जा रहा है। टीबी मरीजों को नि:शुल्क दवा, जांच की सुविधाएं मिल रही हैं। साथ ही उन्हें पौष्टिक आहार के लिए हर महीने भत्ता भी दिया जाता है। शासन के निर्देशानुसार काम किया जाता है।