भदोही। रमजान माह का दूसरा अशरा शुरू हो गया है। इस अशरे में मगफिरत के लिए दुआ की जाती है। बुधवार को कई मस्जिदों में रोजे की और दूसरे अशरे की अहमियत बयान की गई। बताया कि इस्लामी हिजरी का 9वौं महीना रमजान का होता है। अल्लाह के रसूल (स.) ने फरमाया कि इस माहे मुबारक में जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। इस महीने दस दस दिन के तीन अशरे होते हैं। पहला अशरा सोमवार को खत्म होने के बाद दूसरा अशरा शुरू हो गया है। यह अशरा मगफिरत का होता है। इस अशरे में अपने गुनाहों से लोग तौबा करते हैं और अल्लाह से मगफिरत मांगते हैं। उधर बीती रात मुहल्ला गौरियाना के नगीने वाली मस्जिद में हाफिज नायाब ने तरावीह के पहले दौर को मुकम्मल किया। तरावीह के बाद लोगों ने अल्लाह के हांथ उठाकर आलमे इस्लाम के लिए दुआ कि वहीं अपने गुनाहों के लिए तौबा की। इस दौरान खेताब करते हुए कारी गुलाम महमूद हबीबी ने हदीसे पाक ब्यान करते हुए बताया कि कुरआन को तरन्नुम से पढ़ना चाहिए। कुरआन में हर चीज की दवा है। बस उसे पढ़ो और अल्लाह से रो-रो कर परेशानियों से छुटकारा मागो। अल्लाह तुम्हें जरार रिज्क पहुंचाएगा। बीमार हो तो शिफा देगा। तरावीह पढ़ाने वाले हाफिज नायाब ने कहा कि मुकद्दस महीने में कसरत से इबादत करनी चाहिए। इस महीने एक नेकी के बदले 70 नेकियों का सवाब मिलता है। गरीबों की मदद करना न भूलें और रोजेदारों को इफ्तार कराना न भूलें। यह अल्लाह को पसंद है। तरावीह खत्म होते ही लोग हाफिज से मिलने को बेताब हो उठे। लोगों ने उन्हें फूलों से लाद दिया। इस्तकबाल करने वालों में एजाज अंसारी, गुलरेज अंसारी, अनवर अली, मोहम्मद काजिम, हाफिज रजा, जमालुद्दीन, नसरुद्दीन अंसारी, वारिस अली, मोहम्मद सलीम, इश्तियाक खां, इमरान खान, मो.कलीम, कैफ खां आदि रहे।