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जमुनीपुर में धनुष यज्ञ मेला शुरू
अमर उजाला ब्यूरो /ज्ञानपुर
Updated Sun, 04 Dec 2016 11:10 PM IST
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मोढ़ के धनुष यज्ञ बारी में लगा धनुष यज्ञ मेला।
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इलाके के जमुनीपुर अठगवां में मेला क बारी में लगने वाला दो दिवसीय धनुष यज्ञ मेला शुरू हो गया है। नोटबंदी के चलते दूकानदारों से लेकर मेलार्थियों में मेले का उत्साह फीका रहा। इस मेले में जहां पड़ोसी जिलों के अलावा दूसरे प्रदेशों के व्यापारी पहुंचते थे। लेकिन नोटबंदी के चलते मेले में दूर दराज के दूकानदारों का पता है, और न पहले जैसे आने वाले मेलार्थियों का। हालांकि कमेेटी,आस -पास के ग्रामीणों और प्रशासन की ओर से मेले की तैयारी में किसी तरह की कोताही नहीं बरती गई है। पीएसी और पुलिस के जवानों की तैनाती की गई है।
गोधना समेत जिले के तमाम दूकानदार मेले में पहुंचे हैं। धनुष यज्ञ मेले में पहले दिन मेलार्थियों की तादाद अपेक्षानुरूप न होने से वे निराश दिखे। ग्रामीणों ने बताया कि मेले का मुख्य आकर्षण धनुष यज्ञ, राम विवाह,खिचड़ी आदि होता है। मेले में आने वाले क्षेत्रीय मेलार्थियों को गृहस्थी के तमाम उपयोगी सामग्रियां उपलब्ध हो जाती थी। इससे मेले का और अधिक आकर्षण रहता है। महिलाओं और बच्चों के लिए खास आकर्षण होता है, रिश्तेदारों और दोस्तों के मेल-मिलाप का प्रमुख केंद्र रहता है। दो दिन तक धनुष यज्ञ से जुड़ा कार्यक्रम होता है, इसके बाद तीसरे दिन सीता विदाई के साथ कार्यक्रम का समापन होने पर मेला खत्म होता है। मेले में झुला, सर्कस, सौंदर्य प्रशाधन की दूकानें, खिलौने, चाट, पकौड़ी, गोधना के पेड़ा आदि की दूकान सज चुकी हैं। इलाके के लोग पहुंचने लगे हैं। लेकिन नोटबंदी ने मेलार्थियों से लेकर दूकानदारों तक को निराश ही किया है।
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गोधना समेत जिले के तमाम दूकानदार मेले में पहुंचे हैं। धनुष यज्ञ मेले में पहले दिन मेलार्थियों की तादाद अपेक्षानुरूप न होने से वे निराश दिखे। ग्रामीणों ने बताया कि मेले का मुख्य आकर्षण धनुष यज्ञ, राम विवाह,खिचड़ी आदि होता है। मेले में आने वाले क्षेत्रीय मेलार्थियों को गृहस्थी के तमाम उपयोगी सामग्रियां उपलब्ध हो जाती थी। इससे मेले का और अधिक आकर्षण रहता है। महिलाओं और बच्चों के लिए खास आकर्षण होता है, रिश्तेदारों और दोस्तों के मेल-मिलाप का प्रमुख केंद्र रहता है। दो दिन तक धनुष यज्ञ से जुड़ा कार्यक्रम होता है, इसके बाद तीसरे दिन सीता विदाई के साथ कार्यक्रम का समापन होने पर मेला खत्म होता है। मेले में झुला, सर्कस, सौंदर्य प्रशाधन की दूकानें, खिलौने, चाट, पकौड़ी, गोधना के पेड़ा आदि की दूकान सज चुकी हैं। इलाके के लोग पहुंचने लगे हैं। लेकिन नोटबंदी ने मेलार्थियों से लेकर दूकानदारों तक को निराश ही किया है।
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