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%पायका% की राह पर चला %खेलो इंडिया%
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ज्ञानपुर। ग्रामीण क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को उभारने के लिए केंद्र सरकार की ‘खेलो इंडिया’ योजना भी पायका की राह पर चल पड़ी है। 2015 में लागू इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए जरूरी छह एकड़ जमीन मयस्सर नहीं होने से यह महत्वाकांक्षी योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। इसके अंतर्गत ब्लॉकों में मल्टी परपज हॉल और इनडोर स्टेडियम का निर्माण होना था। इसके लिए छह से 15 करोड़ रुपये तक खर्च प्रस्तावित है। शुरू होने से पहले ही खेलो इंडिया योजना कागजों में अटक गई।
सरकार की मंशा पर सवाल कोई नहीं था। इरादा मजबूत था और इसके जरिए गांव के कलुवा, घुरहू आदि को खिलाड़ी बनाने की थी। सोच बड़ी थी कि गांव-देहात के बच्चे अब किसी भी खेल से अनजान न रहें। चाहे वह खेल इनडोर हो या आउटडोर, उनको उसे खेलने का सलीका आना चाहिए। इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार ने करीब चार साल पहले खेलो इंडिया की शुरुआत जोरदार तरीके से की। निर्देश जारी किया गया कि सभी जिलों के ब्लॉक मुख्यालयों पर एक इनडोर स्टेडियम बनेगा। जहां गंवई बच्चे इनडोर खेलों का अभ्यास करेंगे, पर अफसोस ऐसा नहीं हो पाया। पहले की सरकारों में आई पायका योजना से ज्यादा बुरा हाल यहां खेलो इंडिया का हो गया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खेलो इंडिया को शुरू हुए चार साल हो गए, लेकिन कहीं पर एक इंच भी जमीन खेलो इंडिया के स्टेडियम के लिए नहीं मिली। योजना में ब्लॉकों में मल्टी परपज हॉल बनाया जाना है, जिसमें युवाओं के लिए सभी इनडोर खेल वॉलीबाल, हैंडबाल, कबड्डी, कुश्ती, बैडमिंटन, शतरंज आदि खेलने की व्यवस्था की जानी है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए जिले के अधिकारियों को जमीन तलाश करने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन एक इंच जमीन नहीं मिल पाई।
एक के बाद एक ढेर होती रहीं खेल योजनाएं
ज्ञानपुर। वर्ष 2008-09 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने बड़े जोर शोर से पायका (पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेल अभियान) की शुरुआत की। योजना के तहत ग्राम पंचायतों को खेल का सामान दिया गया और 500 रुपये के मानदेय पर एक क्रीड़ाश्री भी रखा गया। शुरुआती दौर में अधिकारियों की दिलचस्पी की वजह से लगा कि यह योजना जिले में सफल हो जाएगी, लेकिन व्यवस्थाओं में भारी अनियमितता के कारण यह योजना परवान न चढ़ सकी। हालांकि इस दौरान ग्राम पंचायतों के लिए खेल मैदान और मंगल मैदान की व्यवस्था कर ली गई थी। यह योजना सिर्फ दो वर्षों तक ही चल पाई। इसी तरह खेलो इंडिया योजना शुरू की गई।
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केंद्र सरकार की खेलो इंडिया योजना में ब्लॉकों में खेल मैदान बनाए जाने हैं। जमीन न मिलने के कारण योजना अटकी है। योजना में आठ से 15 करोड़ तक खर्च का प्रावधान है। छह एकड़ के बजाए जमीन का दायरा कम करने का प्रस्ताव भेजा गया है। जिले में राधास्वामी धाम को प्रस्तावित कर भेजा गया था, लेकिन जमीन कम होने के कारण वह निरस्त हो गया।
दिनेश कुमार त्रिपाठी, प्रभारी जिला युवा कल्याण अधिकारी, भदोही
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सरकार की मंशा पर सवाल कोई नहीं था। इरादा मजबूत था और इसके जरिए गांव के कलुवा, घुरहू आदि को खिलाड़ी बनाने की थी। सोच बड़ी थी कि गांव-देहात के बच्चे अब किसी भी खेल से अनजान न रहें। चाहे वह खेल इनडोर हो या आउटडोर, उनको उसे खेलने का सलीका आना चाहिए। इसके लिए केंद्र की मोदी सरकार ने करीब चार साल पहले खेलो इंडिया की शुरुआत जोरदार तरीके से की। निर्देश जारी किया गया कि सभी जिलों के ब्लॉक मुख्यालयों पर एक इनडोर स्टेडियम बनेगा। जहां गंवई बच्चे इनडोर खेलों का अभ्यास करेंगे, पर अफसोस ऐसा नहीं हो पाया। पहले की सरकारों में आई पायका योजना से ज्यादा बुरा हाल यहां खेलो इंडिया का हो गया। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खेलो इंडिया को शुरू हुए चार साल हो गए, लेकिन कहीं पर एक इंच भी जमीन खेलो इंडिया के स्टेडियम के लिए नहीं मिली। योजना में ब्लॉकों में मल्टी परपज हॉल बनाया जाना है, जिसमें युवाओं के लिए सभी इनडोर खेल वॉलीबाल, हैंडबाल, कबड्डी, कुश्ती, बैडमिंटन, शतरंज आदि खेलने की व्यवस्था की जानी है। केंद्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए जिले के अधिकारियों को जमीन तलाश करने की जिम्मेदारी दी गई, लेकिन एक इंच जमीन नहीं मिल पाई।
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एक के बाद एक ढेर होती रहीं खेल योजनाएं
ज्ञानपुर। वर्ष 2008-09 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने बड़े जोर शोर से पायका (पंचायत युवा क्रीड़ा एवं खेल अभियान) की शुरुआत की। योजना के तहत ग्राम पंचायतों को खेल का सामान दिया गया और 500 रुपये के मानदेय पर एक क्रीड़ाश्री भी रखा गया। शुरुआती दौर में अधिकारियों की दिलचस्पी की वजह से लगा कि यह योजना जिले में सफल हो जाएगी, लेकिन व्यवस्थाओं में भारी अनियमितता के कारण यह योजना परवान न चढ़ सकी। हालांकि इस दौरान ग्राम पंचायतों के लिए खेल मैदान और मंगल मैदान की व्यवस्था कर ली गई थी। यह योजना सिर्फ दो वर्षों तक ही चल पाई। इसी तरह खेलो इंडिया योजना शुरू की गई।
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केंद्र सरकार की खेलो इंडिया योजना में ब्लॉकों में खेल मैदान बनाए जाने हैं। जमीन न मिलने के कारण योजना अटकी है। योजना में आठ से 15 करोड़ तक खर्च का प्रावधान है। छह एकड़ के बजाए जमीन का दायरा कम करने का प्रस्ताव भेजा गया है। जिले में राधास्वामी धाम को प्रस्तावित कर भेजा गया था, लेकिन जमीन कम होने के कारण वह निरस्त हो गया।
दिनेश कुमार त्रिपाठी, प्रभारी जिला युवा कल्याण अधिकारी, भदोही