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अलाव जलाकर गुजारी रात, 17 घंटे बिना खाना-पानी के बार्डर पर खड़े रहे

Sat, 05 Mar 2022 12:52 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 05 Mar 2022 12:52 AM IST
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Spent the night by lighting a bonfire, stood on the border without food and water for 17 hours
रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध में फंसे भदोही के छात्र धीरे-धीरे भारत लौट रहे हैं। जिले से एमबीबीएस करने गए आठ छात्र-छात्राओं में से चार वापस आ चुके हैं। शुक्रवार को आए दो छात्रों ने वहां के हालात के बारे में जानकारी दी। उनका कहना था कि कोई माइनस पांच डिग्री ठंड में अलाव जलाकर रात गुजार रहा है तो कोई 15-17 घंटे तक बार्डर पर बिना खाना-पानी के खड़े होकर समय गुजारा है। वहां की परिस्थितियों को बताते हुए दोनों भावुक हो गए। ईश्वर से कामना की कि यूक्रेन में फंसे अन्य छात्र भी जल्द देश लौटें।
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भदोही ब्लॉक के राघवपुर गांव निवासी हरिवंश सिंह का पुत्र शिवपाल मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन गया है। उसकी पढ़ाई का पांचवां साल है। इस दौरान यूक्रेन में युद्ध के चलते शिवपाल के घर आने पर परिवार के लोग काफी खुश हैं। शिवपाल ने बताया कि 26 फरवरी को ही वहां से चल दिया था। बड़ी मशक्कत के बाद ट्रेन मिली, जिससे वे हंगरी बार्डर तक पहुंचा। वहां से हंगरी में प्रवेश करने के लिए 17 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। बैठने तक के लिए स्थान नहीं था। इतनी भीड़ थी कि बस को सुरक्षित हंगरी पहुंचने की चिंता थी। वहां बिना खाना-पानी के इंतजार करते रहे। जब हंगरी पहुंचे तो राहत मिली। वहां से भारतीय दूतावास ने खूब मदद की। वहां से फ्लाइट मिली और दिल्ली आए। वहां से घर तक छोड़ा गया।
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दुर्गागंज प्रतिनिधि के अनुसार अभोली ब्लॉक के सागरपुर बवई निवासी डॉ. सुभाष बिंद का पुत्र वरुण कुमार बिंद शुक्रवार को घर आ गया। उसने बताया कि यूक्रेन के युद्ध ने हम लोगों को झकझोर कर रख दिया। दो रात खुले आसमान के नीचे माइनस पांच डिग्री सेल्सियस तापमान में बितानी पड़ी। किसी तरह वहां अलाव जलाकर रात गुजारी गई। 26 फरवरी को यूक्रेन बॉर्डर पहुंचे। वहां आठ किमी पहले ही बस ने उतार दिया। पैदल ही रोमानिया के बॉर्डर पर पहुंचे। थे। एक मार्च को रोमानिया पहुंच गए। वहां से दूतावास ने मदद की। उन्होंने बताया कि अभी हमारे कई साथी वहां फंसे हैं।
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