{"_id":"621533240428204af86d3d7c","slug":"slowness-in-work-in-elections-payment-also-hangs-bhadohi-news-vns639958895","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनाव में आई कार्य में सुस्ती, भुगतान भी लटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनाव में आई कार्य में सुस्ती, भुगतान भी लटका
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोरोना संक्रमण काल में कालीन नगरी में मनरेगा के तहत रोजगार का खूब सृजन किया गया। हर हाथ को 100 दिन काम देने का सपना भले ही पूरा नहीं हो रहा है, लेकिन दो माह पूर्व ही 18.52 लाख मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया, हालांकि विधानसभा चुनाव के कारण काम में सुस्ती जरूरी आई है।
मनरेगा के तहत जिले में वर्ष 2008-09 में रोजगार देने का सिलसिला शुरू किया गया था। इसके तहत जिले के सभी छह विकास खंडों में 2,81,051 श्रमिकों ने पंजीकरण कराया था। इसकी तुलना में फिलहाल 55 हजार श्रमिक ही पूरी सक्रियता से काम कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2009-10 में सर्वाधिक 85 करोड़ रुपये खर्च कर जॉब कार्डधारकों को रोजगार देने के मामले में जनपद प्रदेश में शीर्ष स्थान पर था। इस सराहनीय कार्य को लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेंद्र कुमार सिंह को पुरस्कृत भी किया गया था। इसके पश्चात प्रत्येक वर्ष जिले का कंपोनेंट बजट निरंतर कम होता रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत अब तक 38 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और महज 12,500 श्रमिकों को ही रोजगार मिल पाया है। चालू वित्तीय वर्ष में सक्रिय मजदूरों में से किसी को 10 दिन, किसी को 40 दिन और किसी को 50 दिन ही काम मिल सका है। 100 दिन काम पाने वालों में सिर्फ आठ से नौ हजार जॉबकार्डधारक शामिल हैं।
उपायुक्त मनरेगा राजाराम का कहना है कि कोरोना संक्रमण काल होने के बाद भी मनरेगा की स्थिति ठीक है। जिले को 18 लाख 52 हजार मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य मिला था। इस बीच जनवरी में ही 19 लाख 10 हजार मानव दिवस सृजित हो चुका है। मार्च खत्म होने तक यह आंकड़ा 20 लाख पार कर जाएगा। विधानसभा चुनाव में अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगने से मनरेगा का काम भी प्रभावित हो गया है। उधर, अभोली ब्लॉक के गुआली में मंजीता पत्नी महेंद्र, रेखा पत्नी सुरेंद्र को काम नहीं मिला। चमेला देवी पत्नी लालमणि को 90 दिन काम मिला। इसी तरह से सुमन को 42 दिन, लोलारखनाथ को सात दिन, नगीना को 42 दिन, रामनिरंजन को 90 दिन काम मिला। हालांकि इस समय सभी घर बैठे हैं। उनका कहना है कि काम नहीं होने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मनरेगा के तहत जिले में वर्ष 2008-09 में रोजगार देने का सिलसिला शुरू किया गया था। इसके तहत जिले के सभी छह विकास खंडों में 2,81,051 श्रमिकों ने पंजीकरण कराया था। इसकी तुलना में फिलहाल 55 हजार श्रमिक ही पूरी सक्रियता से काम कर रहे हैं। वित्तीय वर्ष 2009-10 में सर्वाधिक 85 करोड़ रुपये खर्च कर जॉब कार्डधारकों को रोजगार देने के मामले में जनपद प्रदेश में शीर्ष स्थान पर था। इस सराहनीय कार्य को लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी सुरेंद्र कुमार सिंह को पुरस्कृत भी किया गया था। इसके पश्चात प्रत्येक वर्ष जिले का कंपोनेंट बजट निरंतर कम होता रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में मनरेगा के तहत अब तक 38 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं और महज 12,500 श्रमिकों को ही रोजगार मिल पाया है। चालू वित्तीय वर्ष में सक्रिय मजदूरों में से किसी को 10 दिन, किसी को 40 दिन और किसी को 50 दिन ही काम मिल सका है। 100 दिन काम पाने वालों में सिर्फ आठ से नौ हजार जॉबकार्डधारक शामिल हैं।
विज्ञापन
उपायुक्त मनरेगा राजाराम का कहना है कि कोरोना संक्रमण काल होने के बाद भी मनरेगा की स्थिति ठीक है। जिले को 18 लाख 52 हजार मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य मिला था। इस बीच जनवरी में ही 19 लाख 10 हजार मानव दिवस सृजित हो चुका है। मार्च खत्म होने तक यह आंकड़ा 20 लाख पार कर जाएगा। विधानसभा चुनाव में अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगने से मनरेगा का काम भी प्रभावित हो गया है। उधर, अभोली ब्लॉक के गुआली में मंजीता पत्नी महेंद्र, रेखा पत्नी सुरेंद्र को काम नहीं मिला। चमेला देवी पत्नी लालमणि को 90 दिन काम मिला। इसी तरह से सुमन को 42 दिन, लोलारखनाथ को सात दिन, नगीना को 42 दिन, रामनिरंजन को 90 दिन काम मिला। हालांकि इस समय सभी घर बैठे हैं। उनका कहना है कि काम नहीं होने से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है।
विज्ञापन