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लॉकडाउन से रेलवे स्टेशन पर सन्नाटा
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जंगीगंज। रविवार को जनता कर्फ्यू के बाद 15 जनपदों में लॉकडाउन की घोषणा होने के बाद 31 मार्च तक पूर्वोत्तर की ट्रेनों का संचालन बंद होने से स्टेशनों पर सन्नाटा है। वहीं ट्रेन के सहारे दिहाड़ी और पेट पालने वाले बेसहारों का आसरा भी छिन गया है। उनके समक्ष अब पेट भरने का संकट आ गया है।
कोरोना वायरस को लेकर न बेसहारा किसी गांव में पहुंच कर पेट भर पा रहे हैं और न ही उन्हें कोई कुछ खाने के सामान देने की हिम्मत जुटा रहा है। 22 मार्च को भारत बंद के आह्वान पर रेलवे और जिला प्रशासन ने बेसहारों को चिह्नित कर उचित व्यवस्था कराने का दावा किया, मगर यह कागजों तक ही रह गया। ऐसा ही एक नजारा सोमवार को मंडुआडीह-प्रयागराज-रामबाग रेलखंड के जंगीगंज स्टेशन पर देखने को मिला, जो हर किसी को मर्माहत कर गया। दोनों आंख से दिव्यांग हरिशंकर और चमेला देवी ने कहा कि वह पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों में फेरी लगाकर प्रतिदिन दो से तीन सौ रुपये कमाकर पेट की आग बुझा लेते थे, लेकिन ट्रेनें बंद हो जाने से उनके जीने का आसरा छिन गया। स्टेशन परिसर में पांच दिन से दोनों बुजुर्ग भूखे-प्यासे रहकर समय बीता रहे हैं। ट्रेनें चलती होतीं तो वे उन पर सवार होकर घर चले जाते, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। मामला जब जनपद के आपूर्ति विभाग तक पहुंचाया गया तो जिलापूर्ति अधिकारी अमित कुमार ने कहा कि ऐसे लोगों को चिह्नित करने का अब तक निर्देश नहीं मिला है। उधर रेलवे के पीआरओ वाराणसी ने भी कुछ ऐसा ही जवाब देकर हाथ खींच लिया।
पीआरएस काउंटर 31 मार्च तक रहेंगे बंद
गोपीगंज। डीआरएम वाराणसी मंडल विजय कुमार पंजियार ने रविवार की देर शाम विज्ञप्ति जारी कर पूर्वोत्तर से जुड़े आरक्षण काउंटरों को 31 मार्च तक बंद रखने का निर्देश दिया। बता दें कि पूर्वोत्तर मुख्यालय गोरखपुर से होकर चलने वाली कुल 34 जोड़ी ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से बंद कराकर मालगाड़ियों के संचालन का आदेश जारी किया गया है। एक अप्रैल से यात्री आगामी यात्री को देखते हुए ऑनलाइन टिकट की बुकिंग कराकर यात्रा कर सकेंगे। यात्री ट्रेनों का संचालन बंद होने से मंडुआडीह-प्रयागराज रामबाग खंड के आधा दर्जन से अधिक पीआरएस और दर्जन भर से अधिक यूटीएस काउंटरों पर सन्नाटा पसर चुका है। ट्रेन संचालन बंद होने के अवधि में यात्रा स्थगित करने वाले यात्रियों को 90 दिन में रिफंड की व्यवस्था लागू रहेगी।
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कोरोना वायरस को लेकर न बेसहारा किसी गांव में पहुंच कर पेट भर पा रहे हैं और न ही उन्हें कोई कुछ खाने के सामान देने की हिम्मत जुटा रहा है। 22 मार्च को भारत बंद के आह्वान पर रेलवे और जिला प्रशासन ने बेसहारों को चिह्नित कर उचित व्यवस्था कराने का दावा किया, मगर यह कागजों तक ही रह गया। ऐसा ही एक नजारा सोमवार को मंडुआडीह-प्रयागराज-रामबाग रेलखंड के जंगीगंज स्टेशन पर देखने को मिला, जो हर किसी को मर्माहत कर गया। दोनों आंख से दिव्यांग हरिशंकर और चमेला देवी ने कहा कि वह पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों में फेरी लगाकर प्रतिदिन दो से तीन सौ रुपये कमाकर पेट की आग बुझा लेते थे, लेकिन ट्रेनें बंद हो जाने से उनके जीने का आसरा छिन गया। स्टेशन परिसर में पांच दिन से दोनों बुजुर्ग भूखे-प्यासे रहकर समय बीता रहे हैं। ट्रेनें चलती होतीं तो वे उन पर सवार होकर घर चले जाते, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। मामला जब जनपद के आपूर्ति विभाग तक पहुंचाया गया तो जिलापूर्ति अधिकारी अमित कुमार ने कहा कि ऐसे लोगों को चिह्नित करने का अब तक निर्देश नहीं मिला है। उधर रेलवे के पीआरओ वाराणसी ने भी कुछ ऐसा ही जवाब देकर हाथ खींच लिया।
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पीआरएस काउंटर 31 मार्च तक रहेंगे बंद
गोपीगंज। डीआरएम वाराणसी मंडल विजय कुमार पंजियार ने रविवार की देर शाम विज्ञप्ति जारी कर पूर्वोत्तर से जुड़े आरक्षण काउंटरों को 31 मार्च तक बंद रखने का निर्देश दिया। बता दें कि पूर्वोत्तर मुख्यालय गोरखपुर से होकर चलने वाली कुल 34 जोड़ी ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से बंद कराकर मालगाड़ियों के संचालन का आदेश जारी किया गया है। एक अप्रैल से यात्री आगामी यात्री को देखते हुए ऑनलाइन टिकट की बुकिंग कराकर यात्रा कर सकेंगे। यात्री ट्रेनों का संचालन बंद होने से मंडुआडीह-प्रयागराज रामबाग खंड के आधा दर्जन से अधिक पीआरएस और दर्जन भर से अधिक यूटीएस काउंटरों पर सन्नाटा पसर चुका है। ट्रेन संचालन बंद होने के अवधि में यात्रा स्थगित करने वाले यात्रियों को 90 दिन में रिफंड की व्यवस्था लागू रहेगी।
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