फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   Seur cry for drinking water

सेउर में पेयजल के लिए हाहाकार

Tue, 07 Jun 2016 01:55 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही Updated Tue, 07 Jun 2016 01:55 AM IST
विज्ञापन
 ब्लॉक क्षेत्र के सेउर गांव में पीने के पानी को लेकर हाहाकार मच गया है। गांव के ज्यादातर हैंडपंप जहां बेकार हो गए हैं, वहीं कुओं के धरातल तक सूखने की नौबत है। भीषण गर्मी में तकरीबन 10 हजार आबादी वाले गांव में  विभिन्न बस्तियों में रहने वाले लगभग एक हजार लोगों को हलक तर करने के लिए जद्दोजहद करनी पड़ रही है। पेयजल के मोर्चे पर सबसे ज्यादा बदहाल गांव की यादव, क्षत्रिय, मुसहर और हरिजन बस्तियों में मानो बुंदेलखंड सा नजारा बन चला हो। लोग दूर-दराज से पानी ढोकर लाने को विवश हैं। हलक सोखती गर्मी में काम कर रहे इक्का-दुक्का हैंडपंप और कुओं पर आए दिन किचकित हो रही है। 
विज्ञापन

सेउर गांव में पेयजल संकट गहरा गया है। गांव में 180 हैंडपंप लगे हैं, लेकिन इनमें आधे से ज्यादा हैंडपंप या तो पानी छोड़ चुके हैं या रिबोर कराने की स्थिति में पहुंचकर बेकार साबित हो रहे हैं। जबकि एक भी कुआं लोगों के काम नहीं आ रहा। अधिसंख्य कुओं का पानी सूख चुका है। जिन इक्का-दुक्का कुओं में पानी है भी तो वह पीने के लायक नहीं है। 
विज्ञापन

पानी की सबसे ज्यादा विकट समस्या यादव बस्ती में है। 300 आबादी वाली इस बस्ती में एक भी हैंडपंप नहीं है। दो कुएं हैं, लेकिन उनका पानी पीने लायक नहीं बचा है। कुओं का पानी केवल पशुओं की धुलाई आदि के काम ही आ पाता है। उसके लिए भी कुओं पर सुबह-शाम भारी भीड़ जमा होती है। पीने के पानी के लिए बस्ती के लोगों को तीन सौ मीटर दूर एक अन्य बस्ती में जाना पड़ता है। वहां भी बस्ती के लोग पहले पानी भरते हैं, फिर किसी और को भरने देते हैं। लगभग 200 आबादी वाली क्षत्रिय बस्ती में एक हैंडपंप है, लेकिन वह चलता नहीं है। दो कुएं हैं, जिनका पानी पीने लायक नहीं बचा है। ऐसे में इस बस्ती के लोगों को भी पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। मुसहर बस्ती के लोग दो समूह में बंटे हैं। दोनों समूहों के बीच एक-एक हैंडपंप है, जिनमें से एक हैंडपंप खराब है। दोनों खेमों के बीच कम बनती है, लिहाजा इसका असर पानी के लेन देन पर भी पड़ता है। एक खेमा दूसरे को अपने हैंडपंप से पानी नहीं लेने देता। लगभग डेढ़ सौ आबादी वाली इस बस्ती में भी लोग पीने के पानी की जुगत करते फिर रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल हरिजन बस्ती का भी है। 400 आबादी वाली इस बस्ती में दो हैंडपंप लगे हैं, जो गंदा पानी उगल रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed