भदोही। नेशनल इम्प्लायर्स फेडरेशन के निदेशक आरके जोशी ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा श्रम कानूनों में हो रहे बदलाव महत्वपूर्ण कदम है। 20 से अधिक कानूनों को चार श्रम कानूनों में समाहित कर दिया गया है। यह भारत में वैश्विक निवेश को बढ़ाने तथा कारोबार को आसान बनाने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण कदम साबित होंगे। वे सोमवार को मर्यादपट्टी स्थित कालीन भवन में इंडो-अमेरिकन चैंबर आफ कामर्स वाराणसी, आल इंडिया कार्पेट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) तथा नेशनल इम्प्लॉयर्स फेडरेशन के संयुक्त तत्वावधान में वेतन संहिता-2019 विषयक संगोष्ठी में बोल रहे थे।
उन्होंने बताया कि पहले केंद्र सरकार न्यूनतम मजदूरी तय करेगी। जिसकी राज्य सरकार समीक्षा कर सकती है। लेकिन न्यूनतम मजदूरी को और नहीं घटा सकती। उन्होने सुझाव दिया कि कालीन उद्यमी राज्य सरकार में अपनी प्रतिनिधित्व देकर मजदूरी बोर्ड में कालीन उद्यमियों को प्रतिनिधित्व देने की मांग कर सकते हैं। इसके अलावा यह भी सुझाव दिया कि कालीन उद्योग असंगठित उद्योग क्षेत्र है। इसलिए न्यूनतम मजदूरी तय करने में उनकी भी सुनी जाए।इसके पूर्व कालीन उद्यमियों ने कहा कि नए वेतन संहिता तय करने में कालीन उद्यमियों की भी सुनी जानी चाहिए। इस बात का ध्यान दिया जाना चाहिए कि नए संहिता का कालीन उत्पादन पर असर न पड़े। उच्च न्यायालय के औद्योगिक और श्रम कानून सलाहकार सुनील त्रिपाठी ने भी संबोधित किया। संचालन पूर्व एकमा अध्यक्ष रवि पाटोदिया ने और धन्यवाद ज्ञापन इंडो अमेरिकन चैम्बर आफ कामर्स के उपाध्यक्ष राजेश तिवारी ने किया। एकमाध्यक्ष ओंकार नाथ मिश्र, अहसन रऊफ खान, असलम महबूब, तनवीर हुसैन, जय प्रकाश गूंधरा, एलबीएस यादव, वैभव खरे, पीसी जायसवाल, उमेश गुप्ता, हाजी शौकत अली, विनय कपूर, जेपी गुप्ता, हाजी अब्दुल सत्तार, गुलाम सरफुद्दीन, एसएस तिवारी, अरशद वजीरी, पीयूष बरनवाल, इम्तीयाज अंसारी, मो.रजा खान, वेद प्रकाश गुप्ता, आलोक बरनवाल, ओपी गुप्ता, नीरज बरनवाल, मकसूद अंसारी, प्रशांत तिवारी, परवेज आलम, सुजीत जायसवाल आदि भी रहे।

वेतन संहिता-2019 संगोष्ठी में उपस्थित कालीन निर्यातक एवं उद्यमी- फोटो : BHADOHI