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Bhadohi News: मिनी सचिवालय से सचिव-लेखपाल रहते हैं गायब, ताले कर रहे सरकारी ड्यूटी

Sat, 04 Jul 2026 01:57 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 04 Jul 2026 01:57 AM IST
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Secretary-Lekhpal remain missing from the Mini Secretariat, locks are doing government duty
सुबह 11 बजे: मतेथू ग्राम पंचायत भवन परलटका ताला। संवाद
ज्ञानपुर। जिले के गांवों में बने मिनी सचिवालय (पंचायत भवन) में लेखपालों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का शासन का आदेश धरातल पर लागू होता नहीं दिख रहा है। एक जुलाई से प्रभावी यह व्यवस्था तीन जुलाई तक मूर्त रूप नहीं ले सकी। शुक्रवार को संवाद न्यूज एजेंसी की टीम ने सुबह 10 बजे से दोपहर दो बजे तक 15 पंचायत भवनों का निरीक्षण किया। इनमें चार मिनी सचिवालय खुले मिले, जहां पंचायत सहायक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद थीं, दो में कोई नहीं मिला। सचिव और लेखपाल कहीं नहीं मिले। 11 पंचायत भवनों पर ताला लटका मिला। इससे खतौनी, वरासत सहित अन्य राजस्व कार्य कराने पहुंचे ग्रामीण निराश लौट गए।
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ग्रामीणों को आय, जाति, निवास, खतौनी और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए अब भी ब्लॉक और तहसील के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जिले की 546 ग्राम पंचायतों में 535 पंचायत सचिवालयों का निर्माण ग्रामीणों को एक ही स्थान पर सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया था। यहां पंचायत सहायकों की तैनाती के साथ सचिवों और अब लेखपालों को भी नियमित रूप से बैठने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग दिखाई दी।
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सुबह 11 बजे : पंचायत भवनों पर लगे थे ताला
सुरियावां ब्लॉक के मतेथू, गंगारामपुर और नरोत्तमपुर के पंचायत भवनों पर ताला लटका मिला। मिनी सचिवालय के आसपास घास उगी थी। ग्रामीणों के मुताबिक यहां पंचायत भवन पर अक्सर ताला लगा रहता है, जिससे उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पाता।
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दोपहर 12 बजे : भवन खुला था, पंचायत सहायक और आंगनबाड़ी मिलीं
औराई ब्लॉक के हुसैनीपुर और कंसापुर के पंचायत भवन खुले मिले। यहां पंचायत सहायक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मौजूद थीं, लेकिन लेखपाल और सचिव नहीं दिखे। दोपहर 12 बजे से दो बजे के बीच औराई ब्लॉक के पुरुषोत्तमपुर, जेठूपुर, भवानीपुर और बारीगांव पंचायत भवनों पर भी ताला लटका मिला।

दोपहर एक बजे
ज्ञानपुर ब्लॉक के भिदिउरा और पूरेगोसाईंदास पंचायत भवनों पर ताला लटका मिला। यहां न पंचायत सहायक, न सचिव और न ही लेखपाल मौजूद थे। ग्रामीणों ने बताया कि सुबह भिदिउरा का केंद्र खुला जरूर था, लेकिन आधे घंटे बाद बंद हो गया। वहीं भदोही ब्लॉक का कोल्हण पंचायत भवन खुला मिला, लेकिन वहां केवल पंचायत सहायक मौजूद थीं। मानिकपुर और वेदमनपुर पंचायत भवन भी बंद मिले।

पंचायत भवन निर्माण पर 60 करोड़ रुपये खर्च
जिले की 546 ग्राम पंचायतों में करीब 535 पंचायत भवनों का निर्माण पूरा हो चुका है। जमीन के अभाव और विवाद के कारण करीब 10 भवन अधूरे हैं। एक पंचायत भवन के निर्माण पर 10 से 12 लाख रुपये खर्च हुए। 535 गांवों में करीब 60 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन ग्रामीणों को मिनी सचिवालयों का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा पंचायत सहायकों के मानदेय पर हर महीने 29 से 30 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं।

पंचायत भवनों पर ये कार्य होते हैं
राजस्व परिषद के प्रमुख सचिव के निर्देश पर एक जुलाई से मिनी सचिवालयों में रोस्टर के अनुसार लेखपालों की उपस्थिति सुनिश्चित कर ग्रामीणों की राजस्व संबंधी समस्याओं के निस्तारण की व्यवस्था शुरू की गई। इसके तहत आय, जाति, निवास, हैसियत प्रमाण पत्र, खतौनी, वरासत, स्वामित्व, किसान सम्मान निधि, रियल टाइम खतौनी, भू-नक्शा मिलान, खसरा पड़ताल, वृद्धावस्था पेंशन, अवैध कब्जों का सत्यापन, राशन वितरण सत्यापन तथा अन्य जनशिकायतों के निस्तारण का प्रावधान है।

क्या बोले ग्रामीण
ग्राम सचिवालय का निर्माण ग्रामीणों को एक ही स्थान पर सरकारी योजनाओं और पंचायत संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से हुआ था। पंचायत भवन में लेखपाल के नहीं बैठने के कारण सेवाएं नहीं मिल रही हैं। - कृष्णकांत पांडेय, मतेथू

ग्राम सचिवालय खुला रहने से विभिन्न सरकारी कार्यों और योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को मिलता, लेकिन भवन बंद होने पर महत्वपूर्ण दस्तावेजों के लिए तहसील का चक्कर लगाना पड़ता है। - सचिन कुमार मिश्रा, अभोली
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