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घूस लेने वाला एसडीएम का पेशकार निलंबित
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कैमरे पर घूस लेते शोसल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के आधार पर जिलाधिकारी आर्यका अखौरी ने भदोही तहसील के प्रशासनिक अधिकारी व पेशकार राजेश रावत को निलंबित कर दिया है। पेशकार का उक्त वीडियो रविवार को वायरल हुआ था। जो धीरे धीरे शोसल मीडिया के लगभग प्लेटफार्म पर साझा हो गया था। उपजिलाधिकारी आशीष कुमार मिश्रा ने सोमवार को बताया कि पेशकार के निलंबन की खबर की पुष्टि की।
प्रदेश शासन भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लाख कवायद कर रहा है लेकिन फिर भी घूसखोरी के मामले सामने आ ही जाते हैं। रविवार को शोसल मीडिया पर तहसील के प्रशासनिक अधिकारी राजेश रावत जिनके पास एसडीएम के पेशकार का प्रभार भी था का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमे वे किसी के हांथ से पैसे लेकर गिनते हुए अपने जेब में डाले। वीडियो शोसल मीडिया में साझा होते ही तहसील में खलबली मच गई। मामला उपजिलाधिकारी के संज्ञान में आने पर उन्होंने तत्काल दागी पेशकार को पद से हटाकर जांच कराई और डीएम से उसके निलंबन की शिफारिश की। एडीएम ने सोमवार को पेशकार के निलंबन की पुष्टि करते हुए बताया कि डीएम ने कार्रवाई की है।
ज्ञात हो कि राजस्व से जुड़े सभी मामलों में तहसील की भूमिका अहम हो जाती है। जिन्हें पूरा करने के लिए लेखपाल से लेकर कानूनगो अथवा इससे भी उपर के अधिकारियों की सहायता ली जाती है। आम तौर पर आबादी की भूमि पर नाम दर्ज करना हो या पट्टा आवंटन के मामले हों या नामांतरण हर जगह राजस्वकर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जिसका लाभ उठा कर आए दिन राजस्व कर्मी लोगों से धन उगाही करते हैं।
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तहसील में इससे पहले भी कई लेखपालों के विरुद्ध कार्रवाई हो चुकी है। इसके बाद भी इस तरह के कृत्य लगातार सामने आते रहने से तहसीलों की साख दागदार होती जा रही है। लोगों का कहना है कि तहसीलों की छवि बेहतर करने में जिलाधिकारी को कठोर कार्रवाई तो करनी ही होगी ऐसे कदम भी उठाने होंगे जिससे कामकाज पारदर्शी हो सके।
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प्रदेश शासन भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लाख कवायद कर रहा है लेकिन फिर भी घूसखोरी के मामले सामने आ ही जाते हैं। रविवार को शोसल मीडिया पर तहसील के प्रशासनिक अधिकारी राजेश रावत जिनके पास एसडीएम के पेशकार का प्रभार भी था का एक वीडियो वायरल हुआ जिसमे वे किसी के हांथ से पैसे लेकर गिनते हुए अपने जेब में डाले। वीडियो शोसल मीडिया में साझा होते ही तहसील में खलबली मच गई। मामला उपजिलाधिकारी के संज्ञान में आने पर उन्होंने तत्काल दागी पेशकार को पद से हटाकर जांच कराई और डीएम से उसके निलंबन की शिफारिश की। एडीएम ने सोमवार को पेशकार के निलंबन की पुष्टि करते हुए बताया कि डीएम ने कार्रवाई की है।
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ज्ञात हो कि राजस्व से जुड़े सभी मामलों में तहसील की भूमिका अहम हो जाती है। जिन्हें पूरा करने के लिए लेखपाल से लेकर कानूनगो अथवा इससे भी उपर के अधिकारियों की सहायता ली जाती है। आम तौर पर आबादी की भूमि पर नाम दर्ज करना हो या पट्टा आवंटन के मामले हों या नामांतरण हर जगह राजस्वकर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जिसका लाभ उठा कर आए दिन राजस्व कर्मी लोगों से धन उगाही करते हैं।
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तहसील में इससे पहले भी कई लेखपालों के विरुद्ध कार्रवाई हो चुकी है। इसके बाद भी इस तरह के कृत्य लगातार सामने आते रहने से तहसीलों की साख दागदार होती जा रही है। लोगों का कहना है कि तहसीलों की छवि बेहतर करने में जिलाधिकारी को कठोर कार्रवाई तो करनी ही होगी ऐसे कदम भी उठाने होंगे जिससे कामकाज पारदर्शी हो सके।