मातृत्व काल में संस्कारों की मिलने वाली शिक्षा से विघटित परिवारों को जोड़ने में सफलता हासिल की जा सकती है। ये बातें शनिवार को गुलाब धर मिश्र इंटर कालेज गोपीगंज के मैदान पर अमृत महोत्सव के तहत हुए एक दिवसीय मातृ शक्ति महाकुंभ में मुख्य अतिथि केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति ने कहीं।
उन्होंने कहा कि प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और परंपरा को संरक्षित रखते हुए मां भारती को उच्च शिखर पर ले जाने वाली मातृ शक्ति आप ही हैं। उन्होंने कुटुंब प्रबोधन विंध्याचल विभाग के इस कार्यक्रम में उपस्थित मातृ शक्ति का अभिवादन किया। उपनिषद काल की गार्गी का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मातृ शक्ति भारत की नारी समय आने पर पुत्र को पीठ पर बांधकर हाथ में तलवार लहराते हुए मैदान में भी उतर सकती है। उन्होंने बताया कि आज वे संघ की परंपरा से निकलकर राजनीति में आई हैं। संघ एक ऐसा संगठन है जहां समय से पहले कार्यकर्ता उपस्थित होकर अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। उन्होंने जयंती पर पं.मदन मोहन मालवीय, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए उन्हें नमन किया। विभाग प्रमुख संतोष ने प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत की सनातन धर्म की संस्कृति है कि यहां की भूमि, गाय और गंगा को माता की संज्ञा मिली है। इसका अनुसरण जीवन पर्यंत करने से मजबूती मिलेगी। ब्लॉक प्रमुख आरती सिंह ने मुख्य अतिथि को स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया। इस मौके पर डॉ. नीता सिंह, आशा सिंह, हरिराम तिवारी, अशोक उपाध्याय, दयाशंकर मिश्र, तिलकधारी, अशोक सिंह, संजय मिश्रा समेत बड़ी संख्या में कार्यकर्ता मौजूद रहे।