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मजदूरों की बेहतरी के लिए उठाई आवाज
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Sat, 02 May 2015 01:25 AM IST
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी जिला इकाई की ओर से मजदूर दिवस पर किसानों, मजदूरों की मांगो को लेकर बालीपुर स्थित सहायक श्रमायुक्त कार्यालय पर धरना दिया गया। पार्टी के कामरेडों के नेतृत्व में मुख्यमंत्री को संबोधित दस सूत्री मांगो का ज्ञापन सहायक श्रमायुक्त को सौंपा।
धरने में उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन, किसान सभा, बीड़ी कामगार संगठन, अखिल भारतीय नौजवान सभा, भारतीय महिला फेडरेशन संगठन ने हिस्सा लेकर मजदूरों की आवाज को बुलंद किया।
वक्ताओं ने कहा कि एक मई 1886 के दिन विश्वभर के मजदूरों के संघर्ष की सफलता का दिन है। आज के दिन शिकागो में हजारों मजदूरों ने आठ घंटे काम और फंड, बोनस, सर्विस की मांगो को लेकर शांतिपूर्वक आंदोलन शुरू किया था। इसके फलस्वरूप वहां का फासिस्ट सरकार, पूंजीपतियों ने मजदूरों पर लाठी, गोली, चलवाकर दमन किया था। इसको लेकर अमेरिका राज्य समेत विश्व में जगह-जगह एक माह तक आंदोलन चलता रहा। आखिर में मजबूर होकर वहां की सरकारों ने आठ घंटे काम करने के कानून को लागू किया।
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आठ घंटे काम को लेकर पांचों महाद्वीप में संघर्ष हुआ और मजदूरों के पक्ष में कानून भी बन गया। लेकिन वर्तमान समय में एक बार फिर पूंजीवादी सरकारें, पूंजीपतियों से प्रभावित होकर मजदूरों का शोषण कर रही है। 12-12 घंटे काम करने के बाद भी मजदूरों को महज चार से पांच हजार रुपये मिल रहा है।
दोबारा पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ मजदूरों को लामबंद करके संघर्ष करने की जरूरत है। इस मौके पर सुशील कुमार श्रीवास्तव, भूलाल पाल, राजेंद्र प्रसाद कन्नौजिया, ओम प्रकाश यादव, अभिमन्यू गौतम, इंद्रावती देवी, अमरावती देवी, हरिश्चंद्र गौतम, श्रवण कुमार, जर्नादन गुप्ता, राबिया बेगम, अफसर अली आदि मौजूद रहे।
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धरने में उत्तर प्रदेश खेत मजदूर यूनियन, किसान सभा, बीड़ी कामगार संगठन, अखिल भारतीय नौजवान सभा, भारतीय महिला फेडरेशन संगठन ने हिस्सा लेकर मजदूरों की आवाज को बुलंद किया।
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वक्ताओं ने कहा कि एक मई 1886 के दिन विश्वभर के मजदूरों के संघर्ष की सफलता का दिन है। आज के दिन शिकागो में हजारों मजदूरों ने आठ घंटे काम और फंड, बोनस, सर्विस की मांगो को लेकर शांतिपूर्वक आंदोलन शुरू किया था। इसके फलस्वरूप वहां का फासिस्ट सरकार, पूंजीपतियों ने मजदूरों पर लाठी, गोली, चलवाकर दमन किया था। इसको लेकर अमेरिका राज्य समेत विश्व में जगह-जगह एक माह तक आंदोलन चलता रहा। आखिर में मजबूर होकर वहां की सरकारों ने आठ घंटे काम करने के कानून को लागू किया।
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आठ घंटे काम को लेकर पांचों महाद्वीप में संघर्ष हुआ और मजदूरों के पक्ष में कानून भी बन गया। लेकिन वर्तमान समय में एक बार फिर पूंजीवादी सरकारें, पूंजीपतियों से प्रभावित होकर मजदूरों का शोषण कर रही है। 12-12 घंटे काम करने के बाद भी मजदूरों को महज चार से पांच हजार रुपये मिल रहा है।
दोबारा पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ मजदूरों को लामबंद करके संघर्ष करने की जरूरत है। इस मौके पर सुशील कुमार श्रीवास्तव, भूलाल पाल, राजेंद्र प्रसाद कन्नौजिया, ओम प्रकाश यादव, अभिमन्यू गौतम, इंद्रावती देवी, अमरावती देवी, हरिश्चंद्र गौतम, श्रवण कुमार, जर्नादन गुप्ता, राबिया बेगम, अफसर अली आदि मौजूद रहे।