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धर्म और मर्यादा की रक्षा को हुआ श्रीराम का जन्म
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घोसिया। नगर पंचायत खमरिया के टीएसके कैंपस में भारत विकास परिषद की ओर से आयोजित श्रीराम कथा के चौथे दिन कथावाचक डॉ.अखिलानंद शास्त्री और किरण शास्त्री ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम राम का जन्म धरती पर धर्म और मर्यादा की रक्षा के लिए हुआ। पंडाल में उपस्थित महिला-पुरुष भक्तों ने जयकारा लगाकर परिसर को गूंजायमान कर दिया।
संतों ने बताया कि मनुष्य को सागर रूपी संसार से पार उतारना ही अवतार माना जाता है। भगवन ने धरती पर अवतार लेकर जनमानस को घर, परिवार, समाज की मर्यादा का निर्वहन कराया। अवतार के पीछे कोई न कोई उद्देश्य होता है, जैसे वाराह का अवतार पृथ्वी उद्धार के लिए, नरसिंह का प्रह्लाद की रक्षा के लिए, श्रीकृष्ण लीला और संतों की रक्षा के लिए, मत्स्य का वेद की रक्षा के लिए हुआ था। वर्तमान में हर मां चाहती है कि मेरा पुत्र राम जैसा हो, लेकिन जब तक मां कौशल्या नहीं बनेगी, तब तक भगवान श्रीराम के जैसे पुत्र की कामना करना असंभव होगा। इस मौके पर परिषद भोलानाथ बरनवाल, मनोज द्विवेदी, श्रीलाल कोठारी, हरगोविंद पांडेय सहित बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।
श्रीराम जन्मोत्सव प्रसंग पर झूमे भक्त
लालानगर। रामलीला मैदान गोपीगंज में चल रही कथा के चौथे दिन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी आत्मानंद सरस्वती महाराज ने जब श्रीराम जन्मोत्सव प्रसंग को सुनाया तो भक्त झूम उठे। प्रभु के नामकरण, बाल क्रीड़ा, लालन-पालन पर विस्तार से भक्तों को समझाया। उन्होंने बताया कि एक बार माता कौशल्या ने श्रीराम को स्नान कराकर पालने में लेटा दिया। इष्टदेव की पूजा कर लौटी तो पुत्र को भोजन करते पाया। भयभीत होकर पुत्र के पास गई तो वहां बालक को सोया हुआ देखा। फिर देखा कि वही पुत्र वहां भोजन कर रहा है। उनके हृदय में कंपन होने लगा सोचने लगी कि यहां और वहां मैंने दो बालक देखे। श्रीराम माता को घबराया देख कर मधुर मुस्कान बिखेर कर अपना अखंड रूप दिखाया। इस मौके पर विपुल सिंह, पिंटू सिंह, कृष्ण कुमार खटाई, पप्पू सिंह आदि मौजूद रहे।
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संतों ने बताया कि मनुष्य को सागर रूपी संसार से पार उतारना ही अवतार माना जाता है। भगवन ने धरती पर अवतार लेकर जनमानस को घर, परिवार, समाज की मर्यादा का निर्वहन कराया। अवतार के पीछे कोई न कोई उद्देश्य होता है, जैसे वाराह का अवतार पृथ्वी उद्धार के लिए, नरसिंह का प्रह्लाद की रक्षा के लिए, श्रीकृष्ण लीला और संतों की रक्षा के लिए, मत्स्य का वेद की रक्षा के लिए हुआ था। वर्तमान में हर मां चाहती है कि मेरा पुत्र राम जैसा हो, लेकिन जब तक मां कौशल्या नहीं बनेगी, तब तक भगवान श्रीराम के जैसे पुत्र की कामना करना असंभव होगा। इस मौके पर परिषद भोलानाथ बरनवाल, मनोज द्विवेदी, श्रीलाल कोठारी, हरगोविंद पांडेय सहित बड़ी संख्या में भक्तजन उपस्थित रहे।
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श्रीराम जन्मोत्सव प्रसंग पर झूमे भक्त
लालानगर। रामलीला मैदान गोपीगंज में चल रही कथा के चौथे दिन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी आत्मानंद सरस्वती महाराज ने जब श्रीराम जन्मोत्सव प्रसंग को सुनाया तो भक्त झूम उठे। प्रभु के नामकरण, बाल क्रीड़ा, लालन-पालन पर विस्तार से भक्तों को समझाया। उन्होंने बताया कि एक बार माता कौशल्या ने श्रीराम को स्नान कराकर पालने में लेटा दिया। इष्टदेव की पूजा कर लौटी तो पुत्र को भोजन करते पाया। भयभीत होकर पुत्र के पास गई तो वहां बालक को सोया हुआ देखा। फिर देखा कि वही पुत्र वहां भोजन कर रहा है। उनके हृदय में कंपन होने लगा सोचने लगी कि यहां और वहां मैंने दो बालक देखे। श्रीराम माता को घबराया देख कर मधुर मुस्कान बिखेर कर अपना अखंड रूप दिखाया। इस मौके पर विपुल सिंह, पिंटू सिंह, कृष्ण कुमार खटाई, पप्पू सिंह आदि मौजूद रहे।
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