{"_id":"5d6ac7ec8ebc3e93c315819b","slug":"positive-news-bhadohi-news-vns481228447","type":"story","status":"publish","title_hn":"इसराइल देश के वैरायटी वाले केले के पौधे को लगा रहे किसान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इसराइल देश के वैरायटी वाले केले के पौधे को लगा रहे किसान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पाली। सुरियावां विकासखंड को केले की खेती के मामले में छोटा भुसावल कहा जाने लगा है। जमुनीपुर अठगवां गांव के लगभग दो दर्जन किसान 20 बीघे में केले की लहलहाती खेती के जरिए मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। बमुश्किल 25 हजार की लागत में डेढ़ से पौने दो लाख तक की आमदनी कर ये किसान अन्य किसानों के लिए नजीर बन गए हैं।
लगभग चार दशक पहले फतेहपुर से क्षेत्र के किसान चंद्रभान सिंह केले के पौधे लेकर आए और शुरुआती दौर में एक बीघे में केले की खेती की। इस खेती में जब लाभ समझ में आया तो और किसानों ने भी केले को लगाया। शुरुआत में सरकार से कोई भी सहायता न मिलने से किसान जागरूक नहीं हो पाए। इससे केले में खेती करते वक्त जो रोग लगते थे, उसके निदान के लिए भी उनको कोई सरकारी सहायता नहीं मिल पाती थी। एक तरफ बदलते परिवेश में खेती बारी से किसानों का मोहभंग हो रहा है तो दूसरी तरफ वैज्ञानीक विधि से किसान खेती में लगे हुए हैं और मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। मौजूदा हालात यह हैं कि बचपन से ही खेती के प्रति लगन के बूते केले की खेती में क्रांति लाने वाले चंद्रभान सिंह के पौत्र गौरव सिंह ने अपनी शिक्षा भी कृषि विज्ञान स्ट्रीम में प्राप्त की। उन्होंने एमएससी एजी की डिग्री उद्यान विज्ञान से हासिल की, क्योंकि केला उद्यान विभाग के अंतर्गत आता है। आज गौरव ग्रामीणों को केले की खेती करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके प्रोत्साहन से ग्रामीण केले की खेती कर भी रहे हैं।
किसानों के मुताबिक एक बीघे रकबे में 1200 के आसपास पेड़ लगाए जाते हैं। खेती 12 से 14 माह की होती है। एक सीजन की खेती में लगभग 25 हजार रुपये की लागत एक बीघे में आती है और 12 सौ में से लगभग 1050 से 1100 पौधों का व्यापार किया जाता है। 25 हजार की लागत लगाकर के किसान डेढ़ लाख रुपये तक कमाई करता है।
विज्ञापन
इस बार गौरव सिंह ने क्षेत्र में नई प्रजाति के केले के पौधे लगवाए हैं। टिशू कल्चर जी-9 वैरायटी इजरायल की है, जिसकी खेती स्थानीय किसान कर रहे हैं। गौरव ने बताया कि यह पौधा कम समय में तैयार होगा। नौ महीने में फल देगा। इसीलिए इसका नाम जी-9 रखा गया है। जी-9 का मतलब ग्रैंड नाइन है। इससे पहले पौधा 14 महीने में तैयार होता था। इससे एक तरफ किसानों की पैदावार बढ़ जाएगी तो दूसरी तरफ समय की भी बचत होगी। खास बात यह है कि इस वैरायटी के पौधों को उद्यान विभाग सौ फीसदी सब्सिडी पर दे रहा है।
केले की खेती को लेकर जिले के किसानों में अभी रुचि और बढ़ाने की जरूरत है। जमुनीपुर अठगवां में विभाग की मदद से केले की खेती कर बेहतर उत्पादन लिया जा रहा है।
सुनील तिवारी, जिला उद्यान अधिकारी
विज्ञापन
लगभग चार दशक पहले फतेहपुर से क्षेत्र के किसान चंद्रभान सिंह केले के पौधे लेकर आए और शुरुआती दौर में एक बीघे में केले की खेती की। इस खेती में जब लाभ समझ में आया तो और किसानों ने भी केले को लगाया। शुरुआत में सरकार से कोई भी सहायता न मिलने से किसान जागरूक नहीं हो पाए। इससे केले में खेती करते वक्त जो रोग लगते थे, उसके निदान के लिए भी उनको कोई सरकारी सहायता नहीं मिल पाती थी। एक तरफ बदलते परिवेश में खेती बारी से किसानों का मोहभंग हो रहा है तो दूसरी तरफ वैज्ञानीक विधि से किसान खेती में लगे हुए हैं और मोटा मुनाफा कमा रहे हैं। मौजूदा हालात यह हैं कि बचपन से ही खेती के प्रति लगन के बूते केले की खेती में क्रांति लाने वाले चंद्रभान सिंह के पौत्र गौरव सिंह ने अपनी शिक्षा भी कृषि विज्ञान स्ट्रीम में प्राप्त की। उन्होंने एमएससी एजी की डिग्री उद्यान विज्ञान से हासिल की, क्योंकि केला उद्यान विभाग के अंतर्गत आता है। आज गौरव ग्रामीणों को केले की खेती करने के लिए प्रेरित करते हैं। उनके प्रोत्साहन से ग्रामीण केले की खेती कर भी रहे हैं।
विज्ञापन
किसानों के मुताबिक एक बीघे रकबे में 1200 के आसपास पेड़ लगाए जाते हैं। खेती 12 से 14 माह की होती है। एक सीजन की खेती में लगभग 25 हजार रुपये की लागत एक बीघे में आती है और 12 सौ में से लगभग 1050 से 1100 पौधों का व्यापार किया जाता है। 25 हजार की लागत लगाकर के किसान डेढ़ लाख रुपये तक कमाई करता है।
विज्ञापन
इस बार गौरव सिंह ने क्षेत्र में नई प्रजाति के केले के पौधे लगवाए हैं। टिशू कल्चर जी-9 वैरायटी इजरायल की है, जिसकी खेती स्थानीय किसान कर रहे हैं। गौरव ने बताया कि यह पौधा कम समय में तैयार होगा। नौ महीने में फल देगा। इसीलिए इसका नाम जी-9 रखा गया है। जी-9 का मतलब ग्रैंड नाइन है। इससे पहले पौधा 14 महीने में तैयार होता था। इससे एक तरफ किसानों की पैदावार बढ़ जाएगी तो दूसरी तरफ समय की भी बचत होगी। खास बात यह है कि इस वैरायटी के पौधों को उद्यान विभाग सौ फीसदी सब्सिडी पर दे रहा है।
केले की खेती को लेकर जिले के किसानों में अभी रुचि और बढ़ाने की जरूरत है। जमुनीपुर अठगवां में विभाग की मदद से केले की खेती कर बेहतर उत्पादन लिया जा रहा है।
सुनील तिवारी, जिला उद्यान अधिकारी