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खिचड़ी ः मशीनों पर भीड़
ब्यूरो ज्ञानपुर अमर उजाला
Updated Mon, 05 Jan 2015 01:24 AM IST
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खिचड़ी (मकर संक्राति) पर्व की तैयारियां शुरू हो गई हैं। विभिन्न इलाकों में लगी चूड़ा कुटाई की मशीनों पर लोगों की भीड़ उमड़ रही है। सुबह से शाम तक यहां लोगों की लंबी कतारें लग रही हैं।
पतंगों के लिए दूकानदारों ने तैयारियां शुरू कर दी है वहीं गंगा स्नान के लिए भी लोग एक दूसरे से संपर्क करने लगे हैं।
स्नान पर्व के साथ-साथ खिचड़ी के दौरान बेटियों के यहां खिचड़ी ले जाने की सदियों पुरानी परंपरा मकर संक्रांति पर्व पर निभाई जाती है।
परंपरा के दृषि्टगत शहरी और ग्रामीण इलाकों में लाई, चूड़ा, ढूंढा समेत अन्य व्यंजन को तैयार करने में लोग जुट गए हैं। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आ रहा है चूड़ा कुटाने की मशीनों पर भीड़ बढ़ रही है।
वहीं पतंग आदि उड़ाने की परंपरा का निर्वहन भी किया जाता है। बाजारों में पतंगों की आमद भी शुरू हो चुकी है। दूकानदार पतंगों और मांझों के लिए खरीदारी करने में जुटे हैं। पर्व पर स्नान का भी महत्वपूर्ण स्थान है।
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इसे लेकर ग्रामीण इलाकों में लोगों ने एक दूसरे से संपर्क तेज कर दिया है। अधिकांश लोगों की मान्यता काशी में गंगा स्नान करने की होती है।
लिहाजा काशी स्नान करने वालों ने साथ-साथ काशी आकर स्नान करने के लिए आपस में राय मशविरा भी शुरू कर दिया है।
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पतंगों के लिए दूकानदारों ने तैयारियां शुरू कर दी है वहीं गंगा स्नान के लिए भी लोग एक दूसरे से संपर्क करने लगे हैं।
स्नान पर्व के साथ-साथ खिचड़ी के दौरान बेटियों के यहां खिचड़ी ले जाने की सदियों पुरानी परंपरा मकर संक्रांति पर्व पर निभाई जाती है।
परंपरा के दृषि्टगत शहरी और ग्रामीण इलाकों में लाई, चूड़ा, ढूंढा समेत अन्य व्यंजन को तैयार करने में लोग जुट गए हैं। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आ रहा है चूड़ा कुटाने की मशीनों पर भीड़ बढ़ रही है।
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वहीं पतंग आदि उड़ाने की परंपरा का निर्वहन भी किया जाता है। बाजारों में पतंगों की आमद भी शुरू हो चुकी है। दूकानदार पतंगों और मांझों के लिए खरीदारी करने में जुटे हैं। पर्व पर स्नान का भी महत्वपूर्ण स्थान है।
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इसे लेकर ग्रामीण इलाकों में लोगों ने एक दूसरे से संपर्क तेज कर दिया है। अधिकांश लोगों की मान्यता काशी में गंगा स्नान करने की होती है।
लिहाजा काशी स्नान करने वालों ने साथ-साथ काशी आकर स्नान करने के लिए आपस में राय मशविरा भी शुरू कर दिया है।