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कालीन नगरी की आबोहवा में घुल रहा प्रदूषण का जहर
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गोपीगंज क्षेत्र की एक कालीन कंपनी से निकलता धुआं।
- फोटो : BHADOHI
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ज्ञानपुर। कालीन नगरी की आबोहवा प्रदूषण के जहर से खतरनाक हो रही है। कालीन कंपनियों से निकलने वाला धुआं और अपशिष्ट पदार्थ पर्यावरण के साथ-साथ भूजल को भी जहरीला कर रहा है। जल्द चेता न गया तो हालात बेकाबू हो सकते हैं। उधर, आठ डाइंग प्लांटों में खतरनाक रसायनों के प्रयोग का पता चलने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी कालीन कंपनियों की जांच कराने का फैसला किया है। इसके लिए टीम गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
भदोही में धीरे-धीरे प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक हो रही है। पिछले दिनों प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मोरवा में दूषित पानी बहाने के मामले में आठ डाइंग प्लांटों पर कार्रवाई की थी। हालांकि कई बड़े प्लांट जो शहर के अंदर हैं, वह कार्रवाई से बच गए। आरोप है कि निगरानी के बाद भी मनमानी हो रही है।
उधर, प्रदूषण विभाग की मानें तो एक-एक कंपनी की जांच के लिए टीम गठित की जा रही है। सभी कंपनियों का सर्वे कराकर कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड के मुताबिक नए साल में जांच शुरू हो सकती है। जिले के गोपीगंज, खमरिया, घोसिया, भदोही, नई बाजार आदि क्षेत्रों में संचालित करीब 200 कालीन कंपनियों से प्रतिदिन भारी मात्रा में अपशिष्ट और धुआं निकलता है। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने 750 एसपीएम (सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटेरियल) का पैमाना जारी किया है। मसलन, घनफुट एरिया में कार्बन के कण की संख्या 750 होनी चाहिए। हालांकि, बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश को इसे और कम करके 250 पर लाने की कवायद शुरू हो गई है।
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पीने लायक नहीं रहा पानी
सिंचाई विभाग के अवर अभियंता छोटेलाल के मुताबिक भू-जल संरक्षण बोर्ड की रिपोर्ट में बताया गया है कि कालीन नगरी का पानी उपयोग के काबिल नहीं रह गया है। दरअसल डाइंग और वाशिंग प्लांटों का केमिकल युक्त जहरीला पानी भूगर्भ में प्रवाहित होने से पानी में क्रोमियम, निकिल, कोबाल्ट, शीशा सहित तमाम घातक रासायनिक तत्व निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक हो गए हैं। ऐसे में जमीन में सुरक्षित पानी भी पीने के योग्य नहीं रह गया है।
अवैध ईंट भट्ठे भी बढ़ा रहे प्रदूषण
ज्ञानपुर। कालीन कंपनियों संग अवैध भट्ठे भी प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं। नियमों को ताख पर रखकर संचालित भट्ठों के खिलाफ प्रशासन से लेकर अन्य विभागों की ओर से समुचित कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जिले में 100 से अधिक भट्ठे पंजीकृत हैं, जबकि 50 से अधिक भट्ठे अवैध ढंग से संचालित होते हैं। विभागीय कृपा से चल रहे भट्ठे न तो मानक के अनुसार चिमनी बनाते हैं और न ही आबादी से दूर संचालन, जिससे आसपास के पेड़-पौधे सूख जाते हैं।
पनप रहीं हैं गंभीर बीमारियां
ज्ञानपुर। प्रदूषित पेयजल और वायु प्रदूषण से गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो रहीं हैं। विशेषकर पेट, श्वांस और दमा के रोगियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। प्रभारी सीएचसी सुरियावां डॉ. आरबी पाठक का कहना है कि इन दिनों 60 से 70 फीसद रोग दूषित जल के सेवन के कारण उत्पन्न हो रहे हैं। पेट, आंख, श्वांस संबंधित गंभीर बीमारियों के लोग शिकार हो रहे हैं।
मोरवा को दूषित करने में आठ डाइंग प्लांटों पर कार्रवाई की गई है। भूगर्भ जल दूषित करने का मामला संज्ञान में है। एक-एक कंपनी की जांच के लिए टीम बनाई जा रही है। जल्द ही जांच कर कार्रवाई की जाएगी। अवैध ईंट भट्ठों के संचालन पर खनन विभाग और प्रशासन कार्रवाई करेगा।
कालिका सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
दमघोंटू हो रही हवा
ज्ञानपुर। भदोही जिले की आबोहवा में जिंदगी कठिन हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक हाल के दिनों में हवा की गुणवत्ता तेजी से दूषित हुई है। कृषि विभाग के मौसम विशेषज्ञ सर्वे बरनवाल का कहना है कि पछुआ हवाओं और कारखानों के धुएं के प्रभाव से हालात बिगड़ रहे हैं। अमूमन साफ-सुथरा रहने वाली जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 150 तक पहुंच गया है। गुजरे सप्ताह भर के दौरान एक्यूआई पीएम-2.5 और पीएम-10 130 से 150 के बीच रहा है। सोमवार को जिले का एक्यूआई 130 से 140 के बीच रहा। एक्यूआई 90 से 100 के बीच है तो सामान्य स्थिति है।
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भदोही में धीरे-धीरे प्रदूषण की स्थिति चिंताजनक हो रही है। पिछले दिनों प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मोरवा में दूषित पानी बहाने के मामले में आठ डाइंग प्लांटों पर कार्रवाई की थी। हालांकि कई बड़े प्लांट जो शहर के अंदर हैं, वह कार्रवाई से बच गए। आरोप है कि निगरानी के बाद भी मनमानी हो रही है।
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उधर, प्रदूषण विभाग की मानें तो एक-एक कंपनी की जांच के लिए टीम गठित की जा रही है। सभी कंपनियों का सर्वे कराकर कार्रवाई की जाएगी। बोर्ड के मुताबिक नए साल में जांच शुरू हो सकती है। जिले के गोपीगंज, खमरिया, घोसिया, भदोही, नई बाजार आदि क्षेत्रों में संचालित करीब 200 कालीन कंपनियों से प्रतिदिन भारी मात्रा में अपशिष्ट और धुआं निकलता है। एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने 750 एसपीएम (सस्पेंडेड पार्टिकुलेट मैटेरियल) का पैमाना जारी किया है। मसलन, घनफुट एरिया में कार्बन के कण की संख्या 750 होनी चाहिए। हालांकि, बढ़ते प्रदूषण पर अंकुश को इसे और कम करके 250 पर लाने की कवायद शुरू हो गई है।
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पीने लायक नहीं रहा पानी
सिंचाई विभाग के अवर अभियंता छोटेलाल के मुताबिक भू-जल संरक्षण बोर्ड की रिपोर्ट में बताया गया है कि कालीन नगरी का पानी उपयोग के काबिल नहीं रह गया है। दरअसल डाइंग और वाशिंग प्लांटों का केमिकल युक्त जहरीला पानी भूगर्भ में प्रवाहित होने से पानी में क्रोमियम, निकिल, कोबाल्ट, शीशा सहित तमाम घातक रासायनिक तत्व निर्धारित मात्रा से कई गुना अधिक हो गए हैं। ऐसे में जमीन में सुरक्षित पानी भी पीने के योग्य नहीं रह गया है।
अवैध ईंट भट्ठे भी बढ़ा रहे प्रदूषण
ज्ञानपुर। कालीन कंपनियों संग अवैध भट्ठे भी प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं। नियमों को ताख पर रखकर संचालित भट्ठों के खिलाफ प्रशासन से लेकर अन्य विभागों की ओर से समुचित कार्रवाई नहीं हो पा रही है। जिले में 100 से अधिक भट्ठे पंजीकृत हैं, जबकि 50 से अधिक भट्ठे अवैध ढंग से संचालित होते हैं। विभागीय कृपा से चल रहे भट्ठे न तो मानक के अनुसार चिमनी बनाते हैं और न ही आबादी से दूर संचालन, जिससे आसपास के पेड़-पौधे सूख जाते हैं।
पनप रहीं हैं गंभीर बीमारियां
ज्ञानपुर। प्रदूषित पेयजल और वायु प्रदूषण से गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो रहीं हैं। विशेषकर पेट, श्वांस और दमा के रोगियों की संख्या में तेजी से वृद्धि हो रही है। प्रभारी सीएचसी सुरियावां डॉ. आरबी पाठक का कहना है कि इन दिनों 60 से 70 फीसद रोग दूषित जल के सेवन के कारण उत्पन्न हो रहे हैं। पेट, आंख, श्वांस संबंधित गंभीर बीमारियों के लोग शिकार हो रहे हैं।
मोरवा को दूषित करने में आठ डाइंग प्लांटों पर कार्रवाई की गई है। भूगर्भ जल दूषित करने का मामला संज्ञान में है। एक-एक कंपनी की जांच के लिए टीम बनाई जा रही है। जल्द ही जांच कर कार्रवाई की जाएगी। अवैध ईंट भट्ठों के संचालन पर खनन विभाग और प्रशासन कार्रवाई करेगा।
कालिका सिंह, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी
दमघोंटू हो रही हवा
ज्ञानपुर। भदोही जिले की आबोहवा में जिंदगी कठिन हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक हाल के दिनों में हवा की गुणवत्ता तेजी से दूषित हुई है। कृषि विभाग के मौसम विशेषज्ञ सर्वे बरनवाल का कहना है कि पछुआ हवाओं और कारखानों के धुएं के प्रभाव से हालात बिगड़ रहे हैं। अमूमन साफ-सुथरा रहने वाली जिले का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 150 तक पहुंच गया है। गुजरे सप्ताह भर के दौरान एक्यूआई पीएम-2.5 और पीएम-10 130 से 150 के बीच रहा है। सोमवार को जिले का एक्यूआई 130 से 140 के बीच रहा। एक्यूआई 90 से 100 के बीच है तो सामान्य स्थिति है।