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धरातल पर योजनाओं का हो सही क्रियान्वयन तो बने बात

Thu, 14 May 2020 09:24 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 09:24 PM IST
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Plans should be implemented properly on the ground
भदोही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से घोषित 20 लाख करोड़ के विशेष आर्थिक पैकेज की दूसरी किस्त का बृहस्पतिवार को वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मिलने वाले राहत का एलान किया। इसमें प्रवासी मजदूरों, फेरीवालों, छोटे कारोबारियों और किसानों पर फोकस किया गया। रेहड़ी वालों के लिए 10 हजार तक लोन, मुद्रा शिशु लोन में ब्याज की घोषणा राहत की बात हो सकती है, बशर्ते इसका लाभ सही लोगों तक पहुंचे। ऐसा छोटे कारोबारियों और श्रमिक वर्ग का मानना है। वित्तमंत्री ने अपनी घोषणा में वन नेशन, वन राशनकार्ड की व्यवस्था भी इसी वर्ष अगस्त तक लागू करने की बात कही, जिसे सराहना मिली।
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कृषक नेता इंद्रदेव पाल ने कहा कि यदि पैकेज को सरकार अच्छे ढंग से लागू करना चाहती है तो सबसे पहले धन के बंदरबांट को रोकना होगा। वित्तमंत्री ने बिना राशन कार्ड अगले दो महीने तक पांच किलो चावल या गेहूं और एक किलो चना देने का एलान किया है। लेकिन, खाद्यान्न वितरण की तरह इसे सरकार भ्रष्टाचार से कैसे बचाएगी, यह बड़ा सवाल है। छह से 18 लाख रुपये वार्षिक आमदनी वालों के लिए हाउसिंग लोन सब्सिडी को विस्तृत करने की घोषणा की गई है, लेकिन तीन लाख रुपये तक कमाने वालों को क्या मिलेगा, यह भी जरूरी है।
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मजदूर नेता इजहार खां ने कहा कि योजनाएं तो कागजों पर अच्छी दिखती हैं, लेकिन क्रियान्वयन कैसे होगा यह बड़ा सवाल है। बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर लौट रहे हैं। सरकार को ऐसा कुछ करना होगा, जिससे उन्हें अपने घर पर रोजगार मिल सके। हिंद मजदूर किसान पंचायत (हिमकिप) के प्रदेश अध्यक्ष हसनैन अंसारी ने कहा कि सरकार मुद्रा शिशु लोन योजना में ब्याज राहत देने की बात कर रही है, लेकिन पूर्व में ऐसे ही गरीब लाभार्थी बैंकों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं। योजना के क्रियान्वयन पर पहले ध्यान देना होगा।
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दुकान डेढ़ महीने से बंद है। हम कारोबार कहां से शुरू करें यह समझ से परे है। हमें आर्थिक सहायता की दरकार है। सरकार को सबसे पहले अल्पआय वालों की दुकान चलाने के बारे में सोचना चाहिए। -कैलाश गुप्ता, तकिया कल्लन शाह
लॉकडाउन में दुकानें बंद हैं। आवश्यक वस्तुओं की दुकानें खोलने की अनुमति तो मिली है, खरीदारी शून्य है। हम जाएं तो जाएं कहां। यदि हमारे लिए कुछ सोचा नहीं गया तो हम सड़क पर आ जाएंगे। -जावेद अहमद, मेनरोड
हमें राशन की दरकार नहीं, व्यवसाय को बनाए रखने की व्यवस्था दी जाए। अब दुकानदारी पूरी तरह से ठप है। दुकान खोलने पर भी ग्राहकों का टोटा है। जबकि त्योहारी सीजन चल रहा है। -सलीम अंसारी, मेनरोड
पूर्व में हमें कभी लोन के लायक नहीं समझा गया। अब लोन मिल जाएगा, इसकी क्या गारंटी है? पूर्व में हम लोन के लिए बैंकों के चक्कर लगा-लगाकर थक हार के बैठ गए हैं। यह अपनी व्यथा सरकार पर छोड़ते हैं।-अली अकबर, जमुंद
हमारी सड़क किनारे जूते चप्पल की दुकान थी, जो बंद हो चुकी है। त्योहारी सीजन में घर पर ही दुकान खोलता हूं, लेकिन बिक्री नहीं हो रही है। आर्थिक सहायता के बिना हमारी गाड़ी आगे नहीं बढ़ सकती है। -आरिफ हाशमी, मेनरोड

व्यवसाय चौपट हो चुका है। हमें सरकार से राशन नहीं बल्कि व्यवसाय बनाए रखने के लिए आर्थिक सहयोग चाहिए। जो पैकेज सरकार ने घोषित किया है, उसका क्रियान्वयन ऐसा हो, जिससे हमें व्यवसाय जमाने में मदद मिले। -विनोद गुप्ता, कटरा बाजार
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