प्रशासन की ओर से नावों में ओवरलोडिंग यात्रा पर लगी रोक का नाविकों पर कोई असर नहीं है। निर्देशों को धता बताकर नाविक धड़ल्ले से ओवरलोड़िंग कर यात्रियों को की जान जोखिम में डाल गंगा पार कराते हैं। जल्दबाजी में गंगा आर-पार जाने में न यात्री जागरुकता दिखा रहे हैं ना प्रशासन ही कोई सख्ती कर रहा है। दुर्घटनाओं के घटित होने पर प्रशासन औपचारिकता तक सीमित होकर दो-चार दिन बाद सबकुछ भूल जाना और बड़ी अनहोनी को बढ़ा दे रहा है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि रामपुर घाट पर पीपा पुल टूटने के बाद विभाग नि:शुल्क स्टीमर का संचालन कराया जा रहा है। रामपुर से सटे गुलौरी घाट पर नाविक जर्जर और छोटी नाव में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाकर सुबह से शाम तक कई चक्कर लगाते हैं। गंगा के बीच में पहुंचने पर नाव लहरों का भार नहीं झेल पाती और हिलौरे लेना शुरु कर देती है। यही कारण रहा है कि मिर्जापुर में दो सप्ताह पूर्व हुई दुर्घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन ने छोटी और जर्जर नाव के संचालन पर रोक लगाया। प्रशासन ने नाविक फिटनेश प्रमाणपत्र के साथ लाइसेंस करने के भी निर्देश दिये थे। मिर्जापुर के बरवां, जोपा से गोपीगंज नगर, औराई, ज्ञानपुर, चौरी, मोढ़ आदि क्षेत्रों को पहुंचने वाले लवकुश, सूरज, नीरज, उदई, कृपाशंकर ने कहा कि 20 रुपये प्रति चक्कर यात्री भाड़ा और सामानों का अलग से आर्थिक दोहन किया जा रहा है। ओवरलोड और अधिक भाड़ा का विरोध करने पर नाविक दुर्व्यहार करते हैं। सुनीता देवी, उर्मिला, सावित्री ने जिला प्रशासन से नाविकों की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की।