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Bhadohi News: डिजिटल लोन के धोखाधड़ी के मुकदमा का आदेश
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ज्ञानपुर। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत ने फर्जी तरीके से आठ लाख 86 हजार 376 रुपये का डिजिटल लोन जारी करने के मामले में मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है। दो महीने पुराने मामले में पुलिस की तरफ से मुकदमा दर्ज न करने पर कोर्ट ने यह आदेश दिया है।
घमहापुर निवासी नवशाद आलम ने अदालत में गुहार लगाई थी कि उसका बचत खाता एक बैंक की भदोही शाखा में है। दो अक्तूबर 2023 को दोपहर दो बजे उन्होंने अपनी पत्नी के मोबाइल से एक एप के जरिए टीवी रिचार्ज किया। इसके बाद भी टीवी नहीं चली। कस्टमर केयर से फोन आया कि आपका रिचार्ज फंस गया है। उसको चालू करने के लिए एप होप टू डैस डाउनलोड करना पड़ेगा। एप डाउनलोड करते ही उनके खाते में आठ लाख 86 हजार 370 रुपए का लोन पास कर दिया गया। उसी दिन आठ लाख दूसरे के खाते में ट्रांसफर भी कर दिया गया। दूसरे दिन बैंक में शिकायत की तो प्रबंधक ने खाते में पड़े एक लाख 18 हजार 300 रुपये निकालने की सलाह दी। वह पैसा निकालकर भदोही थाना और साइबर थाने में चक्कर लगाता रहा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। बैंक के अधिकारी भी जांच के नाम पर दौड़ाते रहे।
अधिवक्ता हृदयनाथ तिवारी ने तर्क दिया कि आठ लाख रुपये जीवन एवं मृत्यु का प्रश्न है। यह धोखाधड़ी किसी भी आम व्यक्ति के साथ हो सकती है। इसलिए साजिशकर्ताओं को सामने लाने के लिए मुकदमा आवश्यक है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी साबिहा खातून की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी निरीक्षक भदोही को मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया।
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घमहापुर निवासी नवशाद आलम ने अदालत में गुहार लगाई थी कि उसका बचत खाता एक बैंक की भदोही शाखा में है। दो अक्तूबर 2023 को दोपहर दो बजे उन्होंने अपनी पत्नी के मोबाइल से एक एप के जरिए टीवी रिचार्ज किया। इसके बाद भी टीवी नहीं चली। कस्टमर केयर से फोन आया कि आपका रिचार्ज फंस गया है। उसको चालू करने के लिए एप होप टू डैस डाउनलोड करना पड़ेगा। एप डाउनलोड करते ही उनके खाते में आठ लाख 86 हजार 370 रुपए का लोन पास कर दिया गया। उसी दिन आठ लाख दूसरे के खाते में ट्रांसफर भी कर दिया गया। दूसरे दिन बैंक में शिकायत की तो प्रबंधक ने खाते में पड़े एक लाख 18 हजार 300 रुपये निकालने की सलाह दी। वह पैसा निकालकर भदोही थाना और साइबर थाने में चक्कर लगाता रहा लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। बैंक के अधिकारी भी जांच के नाम पर दौड़ाते रहे।
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अधिवक्ता हृदयनाथ तिवारी ने तर्क दिया कि आठ लाख रुपये जीवन एवं मृत्यु का प्रश्न है। यह धोखाधड़ी किसी भी आम व्यक्ति के साथ हो सकती है। इसलिए साजिशकर्ताओं को सामने लाने के लिए मुकदमा आवश्यक है। मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी साबिहा खातून की अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी निरीक्षक भदोही को मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया।
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