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करोड़ों खर्च के बाद भी खुले में शौच

Fri, 21 May 2021 09:00 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 21 May 2021 09:00 PM IST
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Open defecation even after spending crores
स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले की 561 ग्राम पंचायतों में बने शौचालय महज शोपीस बनकर रह गए हैं। 181 सामुदायिक शौचालय जहां अभी तक महिला समूहों को सौंपे नहीं गए। वहीं 50 फीसदी एकल शौचालयों की हालत खराब है। नतीजतन केंद्र सरकार की स्वच्छता की मुहिम धरातल पर बेपटरी हो चुकी है।
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दरअसल साल 2014 में केंद्र में भाजपा की सरकार बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वच्छता की मुहिम शुरू की थी। जिसके तहत हर ग्राम पंचायतों में शौचालय बनने शुरू हुए थे। इस क्रम में जनपद में सत्र 2018-19 तक दो लाख से अधिक शौचालयों का निर्माण हुआ। जिस पर 200 करोड़ से अधिक की रकम खर्च की गई। लेकिन ग्राम प्रधान और सचिवों की मनमानी से गांवों में बने 50 फीसदी एकल शौचालय उपयोग से पहले ही ध्वस्त हो गए। दूसरे चरण में तीन से लेकर सात लाख की लागत से सामुदायिक शौचालय बनाए गए। उनके संचालन की जिम्मेदारी महिला समूहों को दी गई। अब तक 561 ग्राम पंचायतों में 380 का समूहों को सौंपा गया जबकि 181 में अब भी ताला लटका है। जो शौचालय समूह को सौंपे गए वह भी ठीक ढंग से नहीं चल रहे हैं। जिससे ग्रामीणों को खुले में शौच करने के लिए जाना पड़ रहा है। रंग-रोगन के साथ चित्रकारी महज ढोल के अंदर पोल है। सबसे अहम बात है कि निर्मित शौचालयों की जांच किए बिना ही हैंडओवर भी कर दिया गया।
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डीपीआरओ बालेशधर द्विवेदी का कहना है कि शौचालय की जांच के लिए लखनऊ की टीम नामित है। पंचायत चुनाव के कारण जांच नहीं हो सकी है। ग्राम पंचायत के गठन के बाद जांच शुरू होगी।
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