फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   Notice to Senior Superintendent of Central Jail Varanasi

Bhadohi News: सजा पूरी होने के बाद भी कैदी को रखा जेल में, केंद्रीय कारागार के वरिष्ठ अधीक्षक को नोटिस

Tue, 14 May 2024 06:28 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, भदोही
अमर उजाला नेटवर्क, भदोही Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Tue, 14 May 2024 06:28 PM IST
सार

Bhadohi News: मामले में न्यायाधीश शैलोज चंद्रा ने प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए अधीक्षक को नोटिस जारी कर पक्ष रखने का आदेश दिया। जिसमें कहा कि किस प्रावधान के तहत कैदी को अतिरिक्त जेल में रखा। कोर्ट ने यह भी कहा कि क्यों न विधि विरूद्ध निरूद्ध रखने का आपराधिक मामला दर्ज किया जाए। पक्ष न रखने पर उनके विरूद्ध कठोर कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

विज्ञापन
Notice to Senior Superintendent of Central Jail Varanasi
वाराणसी जिला कारागार। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपर सत्र न्यायाधीश शैलोज चंद्रा की अदालत ने कैदी को सजा से एक साल सात महीने 24 दिन अतिरिक्त जेल में निरूद्ध रखने पर वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार वाराणसी को नोटिस जारी कर पक्ष रखने का आदेश दिया। मामले को कोर्ट की अवमानना मानते हुए अपराधिक मामला दर्ज करने का भी आदेश दिया।

विज्ञापन


छेड़खानी एवं दुष्कर्म के दोषी शमशेर अली ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से सात मई, 2024 को कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें बताया कि 10 जनवरी, 2014 को कोर्ट ने छेड़खानी में सात, अपहरण में सात और दुष्कर्म में 10 वर्ष कारावास व 10 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। नौ मई, 2024 तक 13 वर्ष सात महीने 24 दिन जेल में निरूद्ध रह चुका है।
विज्ञापन


दोषसिद्ध अभियुक्त शमशेर अली 10 साल की सजा भुगत चुका है। इसके अलावा अर्थदंड न जमा करने पर दो साल अतिरिक्त सजा काट चुका। उच्च न्यायालय ने भी इस मामले में सभी सजाएं एक साथ चलने पुष्ट किया है। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि सजा देने का अधिकार सिर्फ न्यायालय को है, ऐसे में एक साल सात महीने 24 दिन किस आधार पर कारागार में रखा गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


बिना किसी अधिकार के वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार ने अभियुक्त को न केवल निरूद्ध रखा, बल्कि उसको जेल का खाना-पानी भी प्रदान किया। जेल में रखकर अभियुक्त के स्वतंत्रता के मूल अधिकार का हनन किया तो वहीं राज्य के राजस्व की क्षति हुई।


वरिष्ठ अधीक्षक की ओर से न तो अभियुक्त को समय से रिहा किया गया, बल्कि एक साल सात महीने 25 दिन अधिक जेल में निरूद्ध रखा गया। न्यायालय से पारित आदेश के अतिरिक्त दंड देने का अधिकार अधीक्षक केंद्रीय कारागार वाराणसी को नहीं था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed