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मुसलमानों को ईमान की हिफाजत करना जरूरी
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
Updated Mon, 18 Apr 2016 01:30 AM IST
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नूरे मोजस्सम कांफ्रेंस को खिताब करते मुंबई के मौलाना यूसुफ रजा
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मुंबई के मौलाना यूसुफ रजा ने कहा कि हर मुसलमान के लिए ईमान की हिफाजत करना बेहद अहम है। कहा समाज में गुमराह करने वाले कम नहीं। एक बार जो भटक गए तो आपके ईमान पर बन आएगी। वे चौरी रोड बाजार सरदार खां स्थित मैदान में बीती रात नूरे मोजस्सम कांफ्रेंस को खिताब कर रहे थे। उन्होंने इस पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने कहा कि जो ईमान वाले हैं वो बहकावे में नहीं आएंगे। उन्होंने नबी-ए करीम का हवाला देते हुए कहा: नबी ने फरमाया कि दुनियां में 72 फिरके होंगे जो मेरे व सहाबा एकराम के बताए रास्ते पर चलेगा वही जन्नत का हकदार होगा। उन्होंने अपने खिताब में कहा कि हम और आप खुशनसीब हैं कि हमें कुरआन पाक जैसी मुक़द्दस तोहफा मिला। इसमें जिंदगी के हर पहलू पर रोशनी है। नेकियों पर चल कर बुराइयों से बचने की हिदायत है। कहा कि अल्लाह ने प्यारे नबी को हम सबके लिए रहमत बनाकर भेजा और नबी ने ठीक वैसा ही किया। इंसानियत का, सच्चाई का, अमन का, मोहब्बत का संदेश दिया जिस पर हमारा ईमान बना हुआ है। ईमान की रौशनी में अल्लाह व अल्लाह के रसूल ने जो रास्ता दिखाया उसी पर चल कर नेकियां कमाई जा सकती हैं।
पटना से आए मौलाना हसन रजा ने सीरते नबी बयां करते हुए कहा की नबी करीम की सीरत बेमिसाल है। दुनिया में आपके तशरीफ लाने से पहले हर तरफ जाहिलियत का बोलबाला था। लडकियों को जिंदा दफना दिया जाता था। बेवाओं का कोई पुरसाहाल नहीं था। एसे में अल्लाह का पैगामे हक देना मुश्किल काम था जिसे उन्होंने बखुबी फैलाया और 13 साल की हुकूमत में दुनिया को इस्लाम को रौशन कर दिया। उनकी सीख की बदौलत ही लडकियों, बेवाओं, गरीबो, यतीमों को इज्जत और हक मिला। वक्ताओं ने कहा कि दिखावा से बचें। नबी की सीरत पर अमल करें। जन्नत नसीब होगी। कांफ्रेंस की सरपरस्ती मौलाना खुर्शीद आलम अशरफी, सदारत मौलाना फैसल हुसैन व निजामत मौलाना इरशाद जौनपुरी ने किया। आगाज कलाम पाक की तिलावत से हाफिज माज ने किया। नाते पाक का नजराना गुलाम अहमद रजा जौनपुरी, शिब्तेहसन रजा पटना, सैयारे कमर भदोही ने पेश किया। मुफ़्ती इस्माइलुल कादरी, हाफिज तबरेज, मौलाना कुतुबुद्दीन, कारी आफताब, कारी अरमान, मौलाना अनवार, हाजी नूरुल हक आदी मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि जो ईमान वाले हैं वो बहकावे में नहीं आएंगे। उन्होंने नबी-ए करीम का हवाला देते हुए कहा: नबी ने फरमाया कि दुनियां में 72 फिरके होंगे जो मेरे व सहाबा एकराम के बताए रास्ते पर चलेगा वही जन्नत का हकदार होगा। उन्होंने अपने खिताब में कहा कि हम और आप खुशनसीब हैं कि हमें कुरआन पाक जैसी मुक़द्दस तोहफा मिला। इसमें जिंदगी के हर पहलू पर रोशनी है। नेकियों पर चल कर बुराइयों से बचने की हिदायत है। कहा कि अल्लाह ने प्यारे नबी को हम सबके लिए रहमत बनाकर भेजा और नबी ने ठीक वैसा ही किया। इंसानियत का, सच्चाई का, अमन का, मोहब्बत का संदेश दिया जिस पर हमारा ईमान बना हुआ है। ईमान की रौशनी में अल्लाह व अल्लाह के रसूल ने जो रास्ता दिखाया उसी पर चल कर नेकियां कमाई जा सकती हैं।
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पटना से आए मौलाना हसन रजा ने सीरते नबी बयां करते हुए कहा की नबी करीम की सीरत बेमिसाल है। दुनिया में आपके तशरीफ लाने से पहले हर तरफ जाहिलियत का बोलबाला था। लडकियों को जिंदा दफना दिया जाता था। बेवाओं का कोई पुरसाहाल नहीं था। एसे में अल्लाह का पैगामे हक देना मुश्किल काम था जिसे उन्होंने बखुबी फैलाया और 13 साल की हुकूमत में दुनिया को इस्लाम को रौशन कर दिया। उनकी सीख की बदौलत ही लडकियों, बेवाओं, गरीबो, यतीमों को इज्जत और हक मिला। वक्ताओं ने कहा कि दिखावा से बचें। नबी की सीरत पर अमल करें। जन्नत नसीब होगी। कांफ्रेंस की सरपरस्ती मौलाना खुर्शीद आलम अशरफी, सदारत मौलाना फैसल हुसैन व निजामत मौलाना इरशाद जौनपुरी ने किया। आगाज कलाम पाक की तिलावत से हाफिज माज ने किया। नाते पाक का नजराना गुलाम अहमद रजा जौनपुरी, शिब्तेहसन रजा पटना, सैयारे कमर भदोही ने पेश किया। मुफ़्ती इस्माइलुल कादरी, हाफिज तबरेज, मौलाना कुतुबुद्दीन, कारी आफताब, कारी अरमान, मौलाना अनवार, हाजी नूरुल हक आदी मौजूद रहे।
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