{"_id":"6112c4f48ebc3e737638836b","slug":"moon-of-muharram-is-visible-on-yome-ashura-20-bhadohi-news-vns605414860","type":"story","status":"publish","title_hn":"मोहर्रम का चांद दिखा, यौमे आशूरा 20 को","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मोहर्रम का चांद दिखा, यौमे आशूरा 20 को
विज्ञापन
मोहर्रम का चांद दिखने पर तकिया कल्लन शाह इमाम चौक पर अगरबत्ती जलाता युवक
- फोटो : BHADOHI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भदोही। इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मोहर्रमुलहराम के चांद का मंगलवार की शाम दीदार हो गया। ऐसे में बुधवार को हिजरी 1443 की पहली तारीख होगी। चांद के दीदार के साथ ही मुस्लिमों ने एक दूसरे को नववर्ष की बधाई दी। दस तारीख (20 अगस्त) को यौमे आशूरा होगा। ऐसे में इमाम चौकों की साफ सफाई और रंग रोगन कर अगरबत्ती आदि जलाई गई। हसलांकि मोहर्रम का कार्यक्रम केवल इमाम चौकों तक ही सीमित रहेगा।
मुस्लिम मान्यता के अनुसार, मोहर्रम गम का महीना है। इस महीने में पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ शहीद कर दिए गए थे। इसलिए इस महीने को उनके बलिदान के रूप में मनाया जाता है। मंगलवार को मोहर्रम का चांद दिखते ही लोगों ने मुहर्रम की तैयारियां शुरू कर दीं। इस वर्ष सरकार ने कोविड को देखते हुए ताजियों के जुलूस पर रोक लगा दी है।
इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना अपने साथ कई अजमतें और फजीलतें लेकर आता है। मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौ.फसल अशर्फी बताते हैं कि यह महीना इसलाम के उसूलों की जानकारी देता है। गलत राह वालों को सही रास्ता दिखाता है। बताया कि दसवीं मोहर्रम को कर्बला के मैदान में इसलाम की सबसे बड़ी जंग हुई जिसमे हजरत इमाम हुसैन ने अपने साथ पूरा खानदान कुर्बान कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश करना है तो दसवीं के दिन रोजा रखें, इबादत में वक्त बिताएं और हजरत इमाम हुसैन की शहादत की जानकारी और लोगों से साझा करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुस्लिम मान्यता के अनुसार, मोहर्रम गम का महीना है। इस महीने में पैगंबर हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ शहीद कर दिए गए थे। इसलिए इस महीने को उनके बलिदान के रूप में मनाया जाता है। मंगलवार को मोहर्रम का चांद दिखते ही लोगों ने मुहर्रम की तैयारियां शुरू कर दीं। इस वर्ष सरकार ने कोविड को देखते हुए ताजियों के जुलूस पर रोक लगा दी है।
विज्ञापन
इस्लामी कैलेंडर का पहला महीना अपने साथ कई अजमतें और फजीलतें लेकर आता है। मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौ.फसल अशर्फी बताते हैं कि यह महीना इसलाम के उसूलों की जानकारी देता है। गलत राह वालों को सही रास्ता दिखाता है। बताया कि दसवीं मोहर्रम को कर्बला के मैदान में इसलाम की सबसे बड़ी जंग हुई जिसमे हजरत इमाम हुसैन ने अपने साथ पूरा खानदान कुर्बान कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर शहीदाने कर्बला को खिराजे अकीदत पेश करना है तो दसवीं के दिन रोजा रखें, इबादत में वक्त बिताएं और हजरत इमाम हुसैन की शहादत की जानकारी और लोगों से साझा करें।
विज्ञापन