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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   Mokshdayni the shrinking scope, made sand dunes

मोक्षदायनी का सिकुड़ा दायरा, बने रेत के टीले

Sun, 24 Apr 2016 07:12 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही Updated Sun, 24 Apr 2016 07:12 PM IST
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भीषण गर्मी का असर अब मोक्षदायिनी गंगा के जलस्तर पर भी दिखने लगा है। जैसे-जैसे गर्मी की विकरालता बढ़ रही है, गंगा के पाट सिकुड़ते जा रहे हैं। जल स्तर घटने के कारण गंगा में जगह जगह रेत के टीले दिखने लगे हैं। इससे नाविकों संग स्नानार्थियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। कई घाटों पर स्नानार्थियों को बालू के रेत से लंबी दूरी तय करना पड़ता है।
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जिले में मोक्षदायिनी करवधिया अरई से शुरू होती हैं, जो पूरे कोनिया क्षेत्र को तीन ओर से घेर रखी है। कोनिया का इलाका गंगा के गोद में बसा है। गंगा के आसपास बसे गांवों के भूगर्भ का जल स्तर सीधे गंगा नदी के जल स्तर पर निर्भर करता है। गंगा का जलस्तर घटने से गांवों का जलस्तर भी करीब 10 फीट  तक नीचे खिसक गया है। कोनिया के गंगा घाटों पर गौर करें तो भटगवां, परसनी,  कूड़ी कला, कूड़ी  खुर्द, पूरेदुखा, बहपुरा, टेढ़ी, शेरपुर, अतिबल शाहपट्टी,  मवैया थान  सिंह, भभौरी, धनतुलसी, छेछुआ आदि ऐसे घाट हैं, जहां लंबी दूरी  तक रेत पड़  चुका है। इसी तरह डीघ, बनकट, सीतामढ़ी, बारीपुर घाटों पर रेत के  टीले दिख रहे हैं। 
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