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स्टेशनों पर नहीं लगे आधुनिक अग्निशमन यंत्र
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ज्ञानपुर। दो दशक बीतने के बाद भी पूर्वोत्तर और उत्तर रेलवे के मंडुआडीह-रामबाग, प्रतापगढ़-वाराणसी रूट पर लगभग 1500 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद आधुनिक अग्निशमन यंत्रों की स्थापना मंडलीय प्रशासन नहीं करा सका।
शनिवार को देहरादून रेल खंड से जा रही नान स्टाप दूरंतो एक्सप्रेस की आग ने यात्रियों को झकझोर कर रख दिया है। उत्तर रेलवे का प्रतापगढ़-वाराणसी रूट, मंडुआडीह-रामबाग रूट पर बेतहाशा वृद्धि कर छोटी लाइन से बड़ी लाइन, आधुनिक सिगनल प्रणाली, दोहरीकरण, विद्युतीकरण में परिवर्तन लाना समय की मांग है। इन दोनों रूटों पर पैसेंजर गाड़ियों के साथ दूरदराज महानगरों को जोड़ने लिए मेल, एक्सप्रेस, नान स्टाप, सुपरफास्ट जैसी ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर यात्रियों के समय में भारी बचत कराई लेकिन संरक्षा की दृष्टि से अभी तक तीन दशक पूर्व लगे उपकरणों से आग बुझाने को प्राथमिकता मिलती आ रही है।
दरअसल इन रूटों पर बदलाव का आलम यह है कि पर्याप्त जगह होने के बाद भी स्टेशनों के आसपास आधुनिक अग्निशमन यंत्र स्थापित कर पुरानी प्रथा को नहीं रोका जा रहा है। इसके अलावा कार्यालयों में चारों ओर ट्रैक के ऊपर भभकते हाईटेंशन करेंट को लेकर जा रही ट्रेनों में आग लगने के बाद कैसे नियंत्रण पाया जाएगा इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। पूर्व में महाराष्ट्र, कानपुर, गोरखपुर, बिहार, झारखंड में होने वाली घटनाओं से सबक लिया गया होता तो रेल प्रशासन को राहत मिलती। आधुनिक परिवेश में आग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए यात्री महेश कुमार, हरिशंकर, अर्चना सिंह, गुड्डू अली, शादाब अंसारी आदि ने कहा कि जब तक रेल प्रशासन पुराने उपकरणों को बदलकर स्टेशनों, ट्रैक के अगल-बगल उपकरणों की स्थापना नहीं कराएगा तब तक देहरादून ही नहीं आने वाले समय में स्थानीय स्तर पर भी घटनाओं का सामना हो सकता है। जो जनहानि के साथ-रेल प्रशासन के लिए नुकसानदायक साबित होगा।
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इस संबंध में ज्ञानपुर रोड स्टेशन अधीक्षक एमके सिंह ने लाल कलर की छह बाल्टियों, कार्यालय में लगे पाउडरयुक्त उपकरण उपलब्ध होने की बात कहीं। उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आधुनिकीकरण में आग से बचने और बचाने के लिए नये यंत्रों की जरूरत समझी जा रही है। इस संबंध में पीआरओ वाराणसी अशोक कुमार ने बताया कि रूट पर होने वाले बदलाव में हर तरह की घटनाओं से होने वाले नुकसान को ध्यान में रखकर कदम उठाए जाते हैं। यदि रेलवे बोर्ड आधुनिक उपकरण लगाने का दिशा-निर्देश जारी करता है उसका पालन कराया जाएगा।
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शनिवार को देहरादून रेल खंड से जा रही नान स्टाप दूरंतो एक्सप्रेस की आग ने यात्रियों को झकझोर कर रख दिया है। उत्तर रेलवे का प्रतापगढ़-वाराणसी रूट, मंडुआडीह-रामबाग रूट पर बेतहाशा वृद्धि कर छोटी लाइन से बड़ी लाइन, आधुनिक सिगनल प्रणाली, दोहरीकरण, विद्युतीकरण में परिवर्तन लाना समय की मांग है। इन दोनों रूटों पर पैसेंजर गाड़ियों के साथ दूरदराज महानगरों को जोड़ने लिए मेल, एक्सप्रेस, नान स्टाप, सुपरफास्ट जैसी ट्रेनों की संख्या बढ़ाकर यात्रियों के समय में भारी बचत कराई लेकिन संरक्षा की दृष्टि से अभी तक तीन दशक पूर्व लगे उपकरणों से आग बुझाने को प्राथमिकता मिलती आ रही है।
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दरअसल इन रूटों पर बदलाव का आलम यह है कि पर्याप्त जगह होने के बाद भी स्टेशनों के आसपास आधुनिक अग्निशमन यंत्र स्थापित कर पुरानी प्रथा को नहीं रोका जा रहा है। इसके अलावा कार्यालयों में चारों ओर ट्रैक के ऊपर भभकते हाईटेंशन करेंट को लेकर जा रही ट्रेनों में आग लगने के बाद कैसे नियंत्रण पाया जाएगा इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। पूर्व में महाराष्ट्र, कानपुर, गोरखपुर, बिहार, झारखंड में होने वाली घटनाओं से सबक लिया गया होता तो रेल प्रशासन को राहत मिलती। आधुनिक परिवेश में आग जैसी घटनाओं को रोकने के लिए यात्री महेश कुमार, हरिशंकर, अर्चना सिंह, गुड्डू अली, शादाब अंसारी आदि ने कहा कि जब तक रेल प्रशासन पुराने उपकरणों को बदलकर स्टेशनों, ट्रैक के अगल-बगल उपकरणों की स्थापना नहीं कराएगा तब तक देहरादून ही नहीं आने वाले समय में स्थानीय स्तर पर भी घटनाओं का सामना हो सकता है। जो जनहानि के साथ-रेल प्रशासन के लिए नुकसानदायक साबित होगा।
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इस संबंध में ज्ञानपुर रोड स्टेशन अधीक्षक एमके सिंह ने लाल कलर की छह बाल्टियों, कार्यालय में लगे पाउडरयुक्त उपकरण उपलब्ध होने की बात कहीं। उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि आधुनिकीकरण में आग से बचने और बचाने के लिए नये यंत्रों की जरूरत समझी जा रही है। इस संबंध में पीआरओ वाराणसी अशोक कुमार ने बताया कि रूट पर होने वाले बदलाव में हर तरह की घटनाओं से होने वाले नुकसान को ध्यान में रखकर कदम उठाए जाते हैं। यदि रेलवे बोर्ड आधुनिक उपकरण लगाने का दिशा-निर्देश जारी करता है उसका पालन कराया जाएगा।