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Bhadohi News: मनो रोगियों को जिला अस्पताल का नहीं लगाना होगा चक्कर
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ज्ञानपुर। जिले के मनो रोगियों को अब दवा के लिए जिला अस्पताल का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। उनके घर के पास सीएचसी पर बेहतर उपचार के साथ दवाएं मिलेंगी। जिला अस्पताल में मनोचिकित्सक को दिखाने के बाद फॉलोअप मरीज नजदीक के स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा प्राप्त कर सकते हैं। इससे मरीज और तीमारदारों का अतिरिक्त खर्च और समय दोनों बचेगा। जिले में कुल 500 मानसिक मरीजों का उपचार चल रहा है।
बदलते जीवन शैली के बीच लोग तेजी से मानसिक बीमारी के चपेट में आ रहे हैं। मानसिक बीमारी को लेकर जिला चिकित्सालय में मानसिक प्रकोष्ठ टीम की ओर से सप्ताह में तीन दिन कैंप लगाकर मरीजों का जांच कर दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ज्ञानपुर के महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में ओपीडी भवन के प्रथम मंजिला पर मनोचिकित्सक बैठते हैं। वहां निरंतर 20 से 25 मरीजों को ओपीडी की जाती है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में 500 मानसिक मरीजों का उपचार चल रहा है। मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव पांडेय ने बताया कि बदलती दिनचर्या मानसिक बीमारी का सबसे बड़ा कारण है। चिकित्सकीय परामर्श पर दवाओं का सेवन करें।
जिले के सभी सीएचसी पर मानसिक मरीज फालोअप कर दवा प्राप्त कर सकते हैं। उन्हें मनोचिकित्सक के लिखे पर्चे साथ में रखना है। ऐसे में मरीजों, तीमारदारों की परेशानी कम होगी। - डॉ. एसके चक सीएमओ
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बदलते जीवन शैली के बीच लोग तेजी से मानसिक बीमारी के चपेट में आ रहे हैं। मानसिक बीमारी को लेकर जिला चिकित्सालय में मानसिक प्रकोष्ठ टीम की ओर से सप्ताह में तीन दिन कैंप लगाकर मरीजों का जांच कर दवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ज्ञानपुर के महाराजा चेतसिंह जिला चिकित्सालय में ओपीडी भवन के प्रथम मंजिला पर मनोचिकित्सक बैठते हैं। वहां निरंतर 20 से 25 मरीजों को ओपीडी की जाती है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक जिले में 500 मानसिक मरीजों का उपचार चल रहा है। मनोचिकित्सक डॉ. अभिनव पांडेय ने बताया कि बदलती दिनचर्या मानसिक बीमारी का सबसे बड़ा कारण है। चिकित्सकीय परामर्श पर दवाओं का सेवन करें।
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जिले के सभी सीएचसी पर मानसिक मरीज फालोअप कर दवा प्राप्त कर सकते हैं। उन्हें मनोचिकित्सक के लिखे पर्चे साथ में रखना है। ऐसे में मरीजों, तीमारदारों की परेशानी कम होगी। - डॉ. एसके चक सीएमओ
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