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अकीदत से निकला मेंहदी का जुलूस
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नगर के पश्चिम तरफ मोहल्ले से निकला मेंहदी का जुलूस और अकीदतमंदों की भीड़
- फोटो : BHADOHI
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भदोही। मोहर्रम की यौमे आशूरा (दसवीं) 9 अगस्त को है। शनिवार को सातवीं के दिन को परंपरागत रूप से मोहल्ला पश्चिम तरफ से अपराह्न तीन बजे परंपरागत रूप से मेंहदी का जुलूस निकाला गया। जुलूस में भारी संख्या में अकीदतमंद शामिल रहे। जूलूस में एकमात्र ताजिया को मेंहदी रंग से सजाया संवार कर निकाला जाता है जो विभिन्न मार्गों से होकर वापस पश्चिम तरफ आकर समाप्त होता है।
जुलूस में बाजे गाजे के साथ शामिल लोग कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शहर में घूमते हैं। जुलूस में शामिल अकीदतमंद शिरनी नज्र कर फातेहा पढ़ते हैं। भारी संख्या में लोग पश्चिम तरफ में मरहूम बस्सन खां चौक पर जुटे और रवाना हुए। ज्ञानदेवी स्कूल, कोट, बाड़ा, सोनराना गली, पायल, मलिकाना, पचभैय्या, गौरियाना, जमुंद से काजियाना और तकिया कल्लन शाह होते हुए देर शाम वापस आया। फूलों से सजी ताजिया मेंहदी रंग में आकर्षक लग रही थी। जुलूस में शामिल लोग यादे हुसैन में मर्सिया और मनकबत पढ़ रहे थे। लोगों में तबर्रुख बांटा गया। जुलूस में सेराज खां, निजामुद्दीन खां, शमशेर खां बड्डे, हसीब खां, फरमान खान, तौहीद खां, आकिब खां, सैयद सलीम, एखलाक खां, शब्बीर खां, गुलाम संजरी, वकील खान, इजहार खां, आमिर खां, आदिल खां, सैयद सलीम, आफताब खां, डा.सुल्तान, शहबाज खां, एखलाक अहमद, इमामुद्दीन खां, तारिक खां, कमरुद्दीन खां, सलीम खां, नूरबाबू खां, शाकिर खां आदि शामिल रहे।
निकला दुलदुल का जुलूस
भदोही। उधर मोहर्रम की सातवीं को ही निकलने वाला नूरखांपुर का दुलदुल का जुलूस शनिवार को अकीदत और एहतराम से निकाला गया। जुलूस मोहल्ले के साथ साथ आलमपुर और जल्लापुर के कुछ हिस्सों में घूमने के बाद देर शाम बड़े कब्रिस्तान में ले जाकर दफन किया गया। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने दुलदुल को दूध-जलेबी खिलाई गई। सुरक्षा के नजरिए से जुलूस के पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। अपराह्न दो बजे परंपरागत रूप से सफेद घोड़े को नहला धुला कर सजा संवार कर बाजे-गाजे के साथ दुलदुल रवाना हुआ। इस मौके पर भारी भीड़ रही। दुलदुल को कई मोहल्ले में भ्रमण कराने के बाद लोग बड़े कब्रिस्तान आकर समापन कर दिया गया।
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जुलूस में बाजे गाजे के साथ शामिल लोग कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शहर में घूमते हैं। जुलूस में शामिल अकीदतमंद शिरनी नज्र कर फातेहा पढ़ते हैं। भारी संख्या में लोग पश्चिम तरफ में मरहूम बस्सन खां चौक पर जुटे और रवाना हुए। ज्ञानदेवी स्कूल, कोट, बाड़ा, सोनराना गली, पायल, मलिकाना, पचभैय्या, गौरियाना, जमुंद से काजियाना और तकिया कल्लन शाह होते हुए देर शाम वापस आया। फूलों से सजी ताजिया मेंहदी रंग में आकर्षक लग रही थी। जुलूस में शामिल लोग यादे हुसैन में मर्सिया और मनकबत पढ़ रहे थे। लोगों में तबर्रुख बांटा गया। जुलूस में सेराज खां, निजामुद्दीन खां, शमशेर खां बड्डे, हसीब खां, फरमान खान, तौहीद खां, आकिब खां, सैयद सलीम, एखलाक खां, शब्बीर खां, गुलाम संजरी, वकील खान, इजहार खां, आमिर खां, आदिल खां, सैयद सलीम, आफताब खां, डा.सुल्तान, शहबाज खां, एखलाक अहमद, इमामुद्दीन खां, तारिक खां, कमरुद्दीन खां, सलीम खां, नूरबाबू खां, शाकिर खां आदि शामिल रहे।
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निकला दुलदुल का जुलूस
भदोही। उधर मोहर्रम की सातवीं को ही निकलने वाला नूरखांपुर का दुलदुल का जुलूस शनिवार को अकीदत और एहतराम से निकाला गया। जुलूस मोहल्ले के साथ साथ आलमपुर और जल्लापुर के कुछ हिस्सों में घूमने के बाद देर शाम बड़े कब्रिस्तान में ले जाकर दफन किया गया। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने दुलदुल को दूध-जलेबी खिलाई गई। सुरक्षा के नजरिए से जुलूस के पुलिस फोर्स तैनात की गई थी। अपराह्न दो बजे परंपरागत रूप से सफेद घोड़े को नहला धुला कर सजा संवार कर बाजे-गाजे के साथ दुलदुल रवाना हुआ। इस मौके पर भारी भीड़ रही। दुलदुल को कई मोहल्ले में भ्रमण कराने के बाद लोग बड़े कब्रिस्तान आकर समापन कर दिया गया।
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