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सिर्फ सात फेरे, हम हो गए तेरे
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ज्ञानपुर। न बैंडबाजा, न बरात, न ताम- झाम। न नाते-रिश्तेदारों का हुजूम और न ही प्रीतिभोज। बस परिवार के पांच लोग संग मंत्रोच्चारण और हो गया विवाह। जी हां! लॉकडाउन ने शादी-विवाह के आयोजनों की तस्वीर बदल दी है। वैसे तो 90 से 95 फीसदी शादी विवाह निरस्त हो गए हैं, लेकिन जो हो रहे हैं, वह समाज को स्वस्थ संदेश भी दे रहे हैं।
शादी-विवाह एक पवित्र बंधन हैै। सामान्य शादी में कम से कम पांच से सात लाख रुपये खर्च होते हैं, लेकिन लॉकडाउन ने कुछ लोगों की मन तो कुछ के मिजाज को बदल दिया। 15 अप्रैल से शुरू मांगलिक सीजन का करीब 20 दिन का समय गुजर गया। कुछ को छोड़ दिया जाए तो 15 जून तक की 95 फीसदी शादियों निरस्त हो चुकी हैं। जो शादियां हुईं, वह मिसाल बन रहीं हैं। दूल्हा-दुल्हन शादी की हर रस्म पूरी करने के साथ लॉकडाउन के नियम का भी पालन किया। दूल्हे के सिर पर सेहरा था तो दुल्हन भी लाल जोड़े में सिमटी हुई थी। विवाह के इन परिधानों में एक और जरूरी चीज भी शामिल थी। जी हां, मुंह पर मास्क लगाकर ही दूल्हा- दुल्हन ने सात फेरे लिए। मंडप में सात फेरे संग वैदिक मंत्रोच्चार संग विवाह संपन्न हो रहा है।
कोरोना वारियर्स ने की दहेज रहित शादी
ज्ञानपुर। कोरोना वायरस संक्रमण के बीच कुछ शादियां समाज के लिए मिसाल बन रही है। उसी में एक शादी कोरोना वारियर्स की रही। लालानगर के चिकित्सक डॉ. प्रमोद कुमार और स्टाफ नर्स रेशमा पाल पुत्री रामसूरत ने दहेज रहित शादी कर समाज को संदेश दिया। छह मई को जिला पंचायत सदस्य हीरालाल पाल के घर से पांच लोग गणेशरायपुर शादी करने गए। सात फेरे, वरमाल और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विवाह संपन्न हो गया। दोनों ने मास्क भी लगाया। डॉ. प्रमोद के छोटे भाई अजय पाल ने कहा कि शादी में जो खर्च बचा है, उसका एक तिहाई खर्च कर गरीबों में राशन वितरित किया जाएगा।
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सादगी से शादी, गरीबों में बांटा राशन
ज्ञानपुर। नगर से सटे भुड़की गांव निवासी प्रेमचंद्र ने भतीजे की शादी सादगी के साथ निपटाई। उसके बाद वह बचे खर्च से कई मुसहर बस्तियों में राशन का वितरण किया। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि महंगाई के दौर में लॉकडाउन का पालन करते हुए सादगी से शादी करना चाहिए।
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शादी-विवाह एक पवित्र बंधन हैै। सामान्य शादी में कम से कम पांच से सात लाख रुपये खर्च होते हैं, लेकिन लॉकडाउन ने कुछ लोगों की मन तो कुछ के मिजाज को बदल दिया। 15 अप्रैल से शुरू मांगलिक सीजन का करीब 20 दिन का समय गुजर गया। कुछ को छोड़ दिया जाए तो 15 जून तक की 95 फीसदी शादियों निरस्त हो चुकी हैं। जो शादियां हुईं, वह मिसाल बन रहीं हैं। दूल्हा-दुल्हन शादी की हर रस्म पूरी करने के साथ लॉकडाउन के नियम का भी पालन किया। दूल्हे के सिर पर सेहरा था तो दुल्हन भी लाल जोड़े में सिमटी हुई थी। विवाह के इन परिधानों में एक और जरूरी चीज भी शामिल थी। जी हां, मुंह पर मास्क लगाकर ही दूल्हा- दुल्हन ने सात फेरे लिए। मंडप में सात फेरे संग वैदिक मंत्रोच्चार संग विवाह संपन्न हो रहा है।
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कोरोना वारियर्स ने की दहेज रहित शादी
ज्ञानपुर। कोरोना वायरस संक्रमण के बीच कुछ शादियां समाज के लिए मिसाल बन रही है। उसी में एक शादी कोरोना वारियर्स की रही। लालानगर के चिकित्सक डॉ. प्रमोद कुमार और स्टाफ नर्स रेशमा पाल पुत्री रामसूरत ने दहेज रहित शादी कर समाज को संदेश दिया। छह मई को जिला पंचायत सदस्य हीरालाल पाल के घर से पांच लोग गणेशरायपुर शादी करने गए। सात फेरे, वरमाल और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विवाह संपन्न हो गया। दोनों ने मास्क भी लगाया। डॉ. प्रमोद के छोटे भाई अजय पाल ने कहा कि शादी में जो खर्च बचा है, उसका एक तिहाई खर्च कर गरीबों में राशन वितरित किया जाएगा।
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सादगी से शादी, गरीबों में बांटा राशन
ज्ञानपुर। नगर से सटे भुड़की गांव निवासी प्रेमचंद्र ने भतीजे की शादी सादगी के साथ निपटाई। उसके बाद वह बचे खर्च से कई मुसहर बस्तियों में राशन का वितरण किया। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि महंगाई के दौर में लॉकडाउन का पालन करते हुए सादगी से शादी करना चाहिए।