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जीएसटी में उद्यमियों,व्यापारियों का भविष्य
bhadohi news
Updated Thu, 15 Jun 2017 12:24 AM IST
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बैठक को संबोधित करते सीईपीसी चेयरमैन राजा शर्मा
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भदोही। वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के दूरगामी और सकारात्मक परिणाम होंगे। शुरू में इसे लागू करने में थोड़ी समस्याएं आ सकती हैं, लेकिन उद्यमी इससे न भागें। क्योंकि इसी में उनका भविष्य है। इसके लागू होने से इंस्पेक्टर राज खत्म होगा। उद्यमियों का सम्मान बढ़ेगा।
ये बातें कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के चेयरमैन महावीर प्रताप उर्फ राजा शर्मा ने खचाखच भरे कालीन भवन में व्यापारियों और कालीन उद्यमियों से कही। उन्होंने कहा कि जीएसटी की दरों को कम करने के लिए निरंतर प्रयास होते रहेंगे। लोगों को आश्वस्त किया कि कालीन उद्योग पर जीएसटी न लगे अथवा कम से कम लगे, इसके लिए प्रयासों में कोई कमी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लगने से शुरुआत में भले ही यह भारी काम लगे, लेकिन सच यह है कि इसका कालीन उत्पादन लागत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने बताया कि कच्चे माल, सेवा शुल्क और मजदूरों पर अलग दरें देने के बाद वह रिफंड हो जाएगा। सतत प्रक्रिया में उत्पादक के एक करोड़ के उत्पादन में साढ़े तीन लाख रुपये हमेशा रोटेशन में रहेंगे। इसके अलावा दूसरी कोई समस्या नहीं है।
बैठक में कई उद्यमियों ने जीएसटी से उद्योग की बढ़ने वाली समस्याएं भी बताईं। प्रमुख कालीन निर्यातक भोलानाथ बरनवाल ने कहा कि साड़ी कारोबार को केंद्र सरकार ने जीएसटी से छूट दे रखी है। उसे नजीर बनाकर हस्तनिर्मित कालीन को जीएसटी से क्यों नहीं मुक्त कराया जा सकता है? अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के पूर्व अध्यक्ष रवि पाटोदिया ने कहा कि लाखों मजदूरों को जीविका से जोड़ने वाले कालीन उद्योग के लिए दिक्कतें शुरू होने वाली हैं। हालांकि इस पर विनय कपूर ने कहा कि देखा जाए को जीएसटी से फायदे हैं, लेकिन कालीन को जीएसटी से मुक्त कराने के बारे में सोचा जाना चाहिए। संचालन कर रहे एकमा के मानद सचिव पीयूष बरनवाल ने कहा कि कालीन पर जीएसटी की दर तय हो चुकी है। बावजूद इसके एकमा और सीईपीसी इसे खत्म कराने के प्रयास करती रहेंगी।
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बैठक की अध्यक्षता गुलाम सर्फुद्दीन अंसारी ने की। इस मौके पर उमेश कुमार गुप्ता, नसरुल्लाह अंसारी, राजाराम गुप्ता, अरशद वजीरी, भरत लाल मौर्य, हाजी फिरोज वजीरी, जेएस जैन, उमेश शुक्ला, गोपाल हर्ष, आलोक बरनवाल, उमेश भल्ला, शिवसागर तिवारी, वीके सिन्हा, हाजी जलील अंसारी, शमीम अंसारी, पीसी जायसवाल, एके ठुकराल, केपी दुबे, असलम महबूब, हाजी अब्दुल हादी, जयप्रकाश गुप्ता आदि ने विचार व्यक्त किए।
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ये बातें कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के चेयरमैन महावीर प्रताप उर्फ राजा शर्मा ने खचाखच भरे कालीन भवन में व्यापारियों और कालीन उद्यमियों से कही। उन्होंने कहा कि जीएसटी की दरों को कम करने के लिए निरंतर प्रयास होते रहेंगे। लोगों को आश्वस्त किया कि कालीन उद्योग पर जीएसटी न लगे अथवा कम से कम लगे, इसके लिए प्रयासों में कोई कमी नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी लगने से शुरुआत में भले ही यह भारी काम लगे, लेकिन सच यह है कि इसका कालीन उत्पादन लागत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है। उन्होंने बताया कि कच्चे माल, सेवा शुल्क और मजदूरों पर अलग दरें देने के बाद वह रिफंड हो जाएगा। सतत प्रक्रिया में उत्पादक के एक करोड़ के उत्पादन में साढ़े तीन लाख रुपये हमेशा रोटेशन में रहेंगे। इसके अलावा दूसरी कोई समस्या नहीं है।
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बैठक में कई उद्यमियों ने जीएसटी से उद्योग की बढ़ने वाली समस्याएं भी बताईं। प्रमुख कालीन निर्यातक भोलानाथ बरनवाल ने कहा कि साड़ी कारोबार को केंद्र सरकार ने जीएसटी से छूट दे रखी है। उसे नजीर बनाकर हस्तनिर्मित कालीन को जीएसटी से क्यों नहीं मुक्त कराया जा सकता है? अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) के पूर्व अध्यक्ष रवि पाटोदिया ने कहा कि लाखों मजदूरों को जीविका से जोड़ने वाले कालीन उद्योग के लिए दिक्कतें शुरू होने वाली हैं। हालांकि इस पर विनय कपूर ने कहा कि देखा जाए को जीएसटी से फायदे हैं, लेकिन कालीन को जीएसटी से मुक्त कराने के बारे में सोचा जाना चाहिए। संचालन कर रहे एकमा के मानद सचिव पीयूष बरनवाल ने कहा कि कालीन पर जीएसटी की दर तय हो चुकी है। बावजूद इसके एकमा और सीईपीसी इसे खत्म कराने के प्रयास करती रहेंगी।
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बैठक की अध्यक्षता गुलाम सर्फुद्दीन अंसारी ने की। इस मौके पर उमेश कुमार गुप्ता, नसरुल्लाह अंसारी, राजाराम गुप्ता, अरशद वजीरी, भरत लाल मौर्य, हाजी फिरोज वजीरी, जेएस जैन, उमेश शुक्ला, गोपाल हर्ष, आलोक बरनवाल, उमेश भल्ला, शिवसागर तिवारी, वीके सिन्हा, हाजी जलील अंसारी, शमीम अंसारी, पीसी जायसवाल, एके ठुकराल, केपी दुबे, असलम महबूब, हाजी अब्दुल हादी, जयप्रकाश गुप्ता आदि ने विचार व्यक्त किए।