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Bhadohi News: जगरन पर्व पर खूब बिकी जलेबी
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लालानगर। जिले में रविवार को जागरण (जगरन) पर्व हर्षोल्लास के साथ परंपरागत तरीके से मनाया गया। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक के बाजारों में जलेबी, मिठाई की दुकानें सजी रहीं। ग्राहकों ने जमकर जलेबी की खरीदारी की। इसके साथ ही अनरसा, भूना चना, फल आदि की खूब बिक्री हुई। देर रात गांव की चौखट पर महिलाओं, किशोरियों ने एकजुट होकर जगरन पर्व मनाया। जगरन के बाद कजरी पर्व सोमवार को मनाया जाएगा।
बाजार में जलेबी 120 से 140 रुपये किलो तक बिकी। ज्ञानपुर, सुरियावां, भदोही, चौरी, ऊंज, वहिदानगर, औराई, महराजगंज सहित गोपीगंज के काली देवी मंदिर के पास जलेबी की दुकान पर ग्राहकों की भीड़ रही। अनरसा, गुड़ की जलेबी की मांग अधिक रही। इसके अलावा लोगों ने देसी घी की इमरती का स्वाद भी चखा। गोपीगंज के दुकानदार रवि मोदनवाल ने बताया कि जलेबी 120 से 140 रुपये किलो बिकी। वहीं इमरती 300 रुपये किलो रही। गुड़ की जलेबी की मांग अधिक रही। महंगाई का असर बाजार में नहीं दिख रहा है। अच्छी ब्रिकी होने से दुकानदारों के चेहरे खिल उठे हैं। भिडिऊरा निवासी आचार्य गणेश पांडेय ने बताया कि जागरण पर्व के अगले दिन कजरी पर्व मनाया जाता है। परंपराओं के अनुसार लोग बहन-बेटियों के यहां रक्षा बंधन के तीसरे दिन जगरन पहुंचाते हैं। इस दौरान साड़ी, फल, अनरसा, जलेबी, भूना चना बहन बेटियों को उपहार में दिए जाते हैं। कजरी के दिन सुहागिन और कुंआरी कन्याएं व्रत भी रखती हैं और शाम को चंद्र दर्शन के बाद व्रत तोड़ती हैं।
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बाजार में जलेबी 120 से 140 रुपये किलो तक बिकी। ज्ञानपुर, सुरियावां, भदोही, चौरी, ऊंज, वहिदानगर, औराई, महराजगंज सहित गोपीगंज के काली देवी मंदिर के पास जलेबी की दुकान पर ग्राहकों की भीड़ रही। अनरसा, गुड़ की जलेबी की मांग अधिक रही। इसके अलावा लोगों ने देसी घी की इमरती का स्वाद भी चखा। गोपीगंज के दुकानदार रवि मोदनवाल ने बताया कि जलेबी 120 से 140 रुपये किलो बिकी। वहीं इमरती 300 रुपये किलो रही। गुड़ की जलेबी की मांग अधिक रही। महंगाई का असर बाजार में नहीं दिख रहा है। अच्छी ब्रिकी होने से दुकानदारों के चेहरे खिल उठे हैं। भिडिऊरा निवासी आचार्य गणेश पांडेय ने बताया कि जागरण पर्व के अगले दिन कजरी पर्व मनाया जाता है। परंपराओं के अनुसार लोग बहन-बेटियों के यहां रक्षा बंधन के तीसरे दिन जगरन पहुंचाते हैं। इस दौरान साड़ी, फल, अनरसा, जलेबी, भूना चना बहन बेटियों को उपहार में दिए जाते हैं। कजरी के दिन सुहागिन और कुंआरी कन्याएं व्रत भी रखती हैं और शाम को चंद्र दर्शन के बाद व्रत तोड़ती हैं।
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