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मेल मिल्लत से रहने की सीख देता है इस्लाम
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बीती रात अजिमुल्लाह चौराहे ईदगाह के जलसे में नाते पाक पेश करते नातखां
- फोटो : BHADOHI
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नगर के अजीमुल्लाह चौराहा स्थित ईदगाह में बीती रात जलसे में उलेमाओं ने हजरत मोहम्मद की सीरत बनाय की और लोगों को मेल मिल्लत से रहने की सीख दी। उलेमा ने कहा कि अगर नबी से मोहब्बत है तो नबी की सुन्नतों पर अमल करें।
मौलाना नूर आलम ने कहा कि अल्लाह ने नबी करीम को कायनात के लिए रहमत बनाकर भेजा। उन्होंने तब संसार में व्याप्त बुराईयों का एक एक कर खत्म किया। मौलाना ने कहा आज आतंकवाद पूरी दुनियां के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। लेकिन हमारे नबी ने 1400 साल पहले आतंकवाद के खात्मे का एलान किया था। उन्होंने लोगों को मानवता का पाठ पढ़ाया और सभी धर्मों का सम्मान करने की सीख। उन्होंने ही इल्म हासिल करने की सीख दी थी। जिस पर अमल करके दुनिया तेजी से विकसित हो रही है।
वक्ताओं ने कहा कि इस्लाम और दीन यह है कि मानव मानव का सम्मान करे। और अगर कोई नबी को मानने वाला है तो वह कभी आतंकवादी नहीं हो सकता। मौलाना महफूज आलम ने कहा कि नबी ने जिस प्रकार से अपनी जिंदगी बशर की उसी तरह से हमें भी करना होगा। उन्होंने मां बाप की इज्जत करने की सीख दी। गरीबों की मदद करने और रोजा नमाज कायम करने की सीख दी। रोजा और नमाज मे वह ताकत है कि एक बार अपनाने से इंसान की सभी कमियां दूर हो जाएंगी।
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मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौ.फैसल अशरफी ने भी संबोधित किया और लोगों से कुरआन पढ़ने और कुरआन के सहारे आगे बढ़ने का आह्वान किया। हाफिज तबरेज अहमद, अब्दुल कादिर भोला, गुलाम फरीद, शायर जावेद आसिम, नजर नवाज, आकिब रजा, नेहाल हबीबी आदि रहे। सरपरस्ती हाफिज-कारी गुलाम मुस्तफा हबीबी, सदारत मौलाना फैसल अशर्फी और निजामत हाफिज शाहिद ने की।
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मौलाना नूर आलम ने कहा कि अल्लाह ने नबी करीम को कायनात के लिए रहमत बनाकर भेजा। उन्होंने तब संसार में व्याप्त बुराईयों का एक एक कर खत्म किया। मौलाना ने कहा आज आतंकवाद पूरी दुनियां के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। लेकिन हमारे नबी ने 1400 साल पहले आतंकवाद के खात्मे का एलान किया था। उन्होंने लोगों को मानवता का पाठ पढ़ाया और सभी धर्मों का सम्मान करने की सीख। उन्होंने ही इल्म हासिल करने की सीख दी थी। जिस पर अमल करके दुनिया तेजी से विकसित हो रही है।
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वक्ताओं ने कहा कि इस्लाम और दीन यह है कि मानव मानव का सम्मान करे। और अगर कोई नबी को मानने वाला है तो वह कभी आतंकवादी नहीं हो सकता। मौलाना महफूज आलम ने कहा कि नबी ने जिस प्रकार से अपनी जिंदगी बशर की उसी तरह से हमें भी करना होगा। उन्होंने मां बाप की इज्जत करने की सीख दी। गरीबों की मदद करने और रोजा नमाज कायम करने की सीख दी। रोजा और नमाज मे वह ताकत है कि एक बार अपनाने से इंसान की सभी कमियां दूर हो जाएंगी।
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मदरसा शमसिया तेगिया के प्रिंसिपल मौ.फैसल अशरफी ने भी संबोधित किया और लोगों से कुरआन पढ़ने और कुरआन के सहारे आगे बढ़ने का आह्वान किया। हाफिज तबरेज अहमद, अब्दुल कादिर भोला, गुलाम फरीद, शायर जावेद आसिम, नजर नवाज, आकिब रजा, नेहाल हबीबी आदि रहे। सरपरस्ती हाफिज-कारी गुलाम मुस्तफा हबीबी, सदारत मौलाना फैसल अशर्फी और निजामत हाफिज शाहिद ने की।