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समायोजन न होने से संकट में अनुदेशक
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ज्ञानपुर। जिले के पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में तैनात अनुदेशकों का समायोजन न होने से उनकी चिंता बढ गई है। अल्प मानदेय मिलने के कारण अनुदेशक और उनके परिवार के सामने आर्थिक समस्या गहरा गई है। 2019 में समायोजन का आदेश आया था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हो सका। इसको लेकर अनुदेशकों में काफी नाराजगी है।
जिले के पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए करीब सात से आठ साल पूर्व शारीरिक शिक्षा, गृह विज्ञान समेत अन्य विषयों के कुल 434 अनुदेशकों की नियुक्ति हुई। करीब सात हजार के मानदेय में रखे गए अनुदेशकों की नियुक्ति उनके घर से 40 से 50 किमी दूर हुई। शुरूआती दौर में किसी तरह अनुदेशकों ने नौकरी की, लेकिन महंगाई की मार ने अब उनकी परेशानी को बढ़ा दिया है। 2019 में शासन की ओर से अनुदेशकों के समायोजन का आदेश आया, लेकिन अब तक विभागीय उदासीनता के कारण उसका पालन नहीं हुआ। जिससे समायोजन का इंतजार कर रहे अनुदेशक परेशान हो गए हैं।
इस संबंध में उत्तर प्रदेश अनुदेशक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि अनुदेशकों को मात्र सात हजार रुपये मिलता है। स्कूल आने-जाने में उनका आधा से अधिक मानदेय खर्च हो जाता है। अगर उनकी तैनाती गांव में हो जाए तो बचत होने से राहत मिलेगी। उन्होंने विभाग को चेतावनी दी कि अविलंब समायोजन को लेकर कोई निर्णय न लिया गया तो आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने कहा कि समायोजन को लेकर कोई आदेश नहीं आया हे। महोबा जिले का कुछ अनुदेशक हवाला दे रहे हैं, जो सही नहीं है।
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जिले के पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए करीब सात से आठ साल पूर्व शारीरिक शिक्षा, गृह विज्ञान समेत अन्य विषयों के कुल 434 अनुदेशकों की नियुक्ति हुई। करीब सात हजार के मानदेय में रखे गए अनुदेशकों की नियुक्ति उनके घर से 40 से 50 किमी दूर हुई। शुरूआती दौर में किसी तरह अनुदेशकों ने नौकरी की, लेकिन महंगाई की मार ने अब उनकी परेशानी को बढ़ा दिया है। 2019 में शासन की ओर से अनुदेशकों के समायोजन का आदेश आया, लेकिन अब तक विभागीय उदासीनता के कारण उसका पालन नहीं हुआ। जिससे समायोजन का इंतजार कर रहे अनुदेशक परेशान हो गए हैं।
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इस संबंध में उत्तर प्रदेश अनुदेशक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष दिलीप कुमार सिंह ने कहा कि अनुदेशकों को मात्र सात हजार रुपये मिलता है। स्कूल आने-जाने में उनका आधा से अधिक मानदेय खर्च हो जाता है। अगर उनकी तैनाती गांव में हो जाए तो बचत होने से राहत मिलेगी। उन्होंने विभाग को चेतावनी दी कि अविलंब समायोजन को लेकर कोई निर्णय न लिया गया तो आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अमित कुमार सिंह ने कहा कि समायोजन को लेकर कोई आदेश नहीं आया हे। महोबा जिले का कुछ अनुदेशक हवाला दे रहे हैं, जो सही नहीं है।
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