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Bhadohi News: मेक इन इंडिया से आत्मनिर्भर बन रहा भारत
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ज्ञानपुर। काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सेमिनार हाल में शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय गोष्ठी शुरू हुई। इसमें आत्मनिर्भर भारत में बदलती अर्थव्यवस्था एवं सामाजिक संरचना पर चर्चा की गई।
मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. ब्रम्हदेव ने कहा कि भारत को तकनीकी रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने और वैश्विक पटल पर शीर्ष पर स्थापित करने के लिए उसका आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। हमारा देश चीन की तरह सीमा के विस्तारवादी नीति का समर्थन नहीं करता, बल्कि आत्मनिर्भरता को सशक्त करने के मार्ग का अनुसरण कर रहा है। बीएचयू के वाणिज्य विभाग के प्रो. अखिल मिश्रा ने कहा कि हमारी संस्कृति सदियों से ही आत्मनिर्भर रही है। इसके पूर्व हमारी चौथी पंचवर्षीय योजना में भी स्व-स्फूर्त की धारणा अस्तित्व में आई। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उठो, जागो और स्वावलंबी बनो को उद्धृत करते हुए बताया कि सरकार इसी भावना को चरितार्थ करने के लिए स्टार्टअप्स इंडिया, स्किल इंडिया के साथ मेक इन इंडिया अभियान को सशक्त कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में चाईनीज उत्पादों का बहिष्कार तभी हो सकता है, जब हम सभी भारतीय महात्मा गांधी के स्वदेशी जागरण की भावना को अपनायेंगे। डॉ. अवधेश सिंह ने आत्मनिर्भर भारत के समक्ष विद्यमान प्रमुख चुनौतियों की चर्चा की। राजकीय महाविद्यालय टोडरपुर हरदोई के प्राचार्य डॉ. आलोक श्रीवास्तव ने आत्मनिर्भरता को समझाते हुए बताया कि सरकार इस उद्देश्य के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से बजटीय आवंटन भी सुनिश्चित कर रही है। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. प्रदीप नारायण डोंगरे ने मुख्य अतिथि व अन्य उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। बताया कि हमारा देश संक्रमण की अवस्था से गुजर रहा है और ऐसे में आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना और उसका क्रियान्वयन देश को वैश्विक ऊंचाई पर ले जाने वाला होगा। इस मौके पर डॉ. महेंद्र कुमार, डॉ. ज्ञान प्रकाश यादव, डॉ. किरण शर्मा, डॉ. भारतेंदु द्विवेदी, डॉ. कमाल अहमद सिद्दिकी, डॉ. बालकेश्वर, डॉ. रमेश चंद्र यादव, डॉ. विष्णुकांत त्रिपाठी आदि रहे।
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मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. ब्रम्हदेव ने कहा कि भारत को तकनीकी रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने और वैश्विक पटल पर शीर्ष पर स्थापित करने के लिए उसका आत्मनिर्भर होना आवश्यक है। हमारा देश चीन की तरह सीमा के विस्तारवादी नीति का समर्थन नहीं करता, बल्कि आत्मनिर्भरता को सशक्त करने के मार्ग का अनुसरण कर रहा है। बीएचयू के वाणिज्य विभाग के प्रो. अखिल मिश्रा ने कहा कि हमारी संस्कृति सदियों से ही आत्मनिर्भर रही है। इसके पूर्व हमारी चौथी पंचवर्षीय योजना में भी स्व-स्फूर्त की धारणा अस्तित्व में आई। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के उठो, जागो और स्वावलंबी बनो को उद्धृत करते हुए बताया कि सरकार इसी भावना को चरितार्थ करने के लिए स्टार्टअप्स इंडिया, स्किल इंडिया के साथ मेक इन इंडिया अभियान को सशक्त कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश में चाईनीज उत्पादों का बहिष्कार तभी हो सकता है, जब हम सभी भारतीय महात्मा गांधी के स्वदेशी जागरण की भावना को अपनायेंगे। डॉ. अवधेश सिंह ने आत्मनिर्भर भारत के समक्ष विद्यमान प्रमुख चुनौतियों की चर्चा की। राजकीय महाविद्यालय टोडरपुर हरदोई के प्राचार्य डॉ. आलोक श्रीवास्तव ने आत्मनिर्भरता को समझाते हुए बताया कि सरकार इस उद्देश्य के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से बजटीय आवंटन भी सुनिश्चित कर रही है। उद्घाटन सत्र का शुभारंभ प्राचार्य डॉ. प्रदीप नारायण डोंगरे ने मुख्य अतिथि व अन्य उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया। बताया कि हमारा देश संक्रमण की अवस्था से गुजर रहा है और ऐसे में आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना और उसका क्रियान्वयन देश को वैश्विक ऊंचाई पर ले जाने वाला होगा। इस मौके पर डॉ. महेंद्र कुमार, डॉ. ज्ञान प्रकाश यादव, डॉ. किरण शर्मा, डॉ. भारतेंदु द्विवेदी, डॉ. कमाल अहमद सिद्दिकी, डॉ. बालकेश्वर, डॉ. रमेश चंद्र यादव, डॉ. विष्णुकांत त्रिपाठी आदि रहे।
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