IND vs WI: यशस्वी जायसवाल का टेंट से टेस्ट टीम तक का सफर, खुशी से फूले नहीं समा रहे यूपी के इस जिले के लोग
Yashasvi Jaiswal Cricket Career :आईपीएल 2023 में राजस्थान रॉयल्स के लिए रनों की बारिश करने वाले यशस्वी जायसवाल का सपना सच हो गया है। उन्हें वेस्टइंडीज दौरे पर टेस्ट टीम में जगह मिली है। शनिवार को यशस्वी के परिजनों सहित जिले के युवा क्रिकेट खिलाड़ियों ने मिठाई खिलाकर एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया।
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पहले आईपीएल 2023 में बेजोड़ प्रदर्शन, फिर वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के फाइनल के लिए टीम इंडिया में बतौर रिजर्व खिलाड़ी और अब वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी टेस्ट सीरीज के लिए टीम इंडिया में चयन। हम बात कर रहे हैं अपनी बल्लेबाजी से डंका बजाने वाले यशस्वी जायसवाल की। भारत ने वेस्टइंडीज के खिलाफ 12 जुलाई से शुरू हो रही टेस्ट टीम की घोषणा कर दी है। इसमें बाएं हाथ के तूफानी बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को भी शामिल किया गया है। यह पहला मौका है जब यशस्वी मुख्य रूप से टीम इंडिया का हिस्सा होंगे।
टीम इंडिया में चयन के बाद से यूपी के भदोही जिले के लोग खुशी से फूले नहीं समा रहे। यशस्वी जायसवाल मूल रूप से भदोही जिले के सुरियावां निवासी हैं। शनिवार को यशस्वी के परिजनों सहित जिले के युवा क्रिकेट खिलाड़ियों ने मिठाई खिलाकर एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया।
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यशस्वी के परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं
यशस्वी का चयन भारतीय टीम में होने से परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं है। यशस्वी की मां कंचन जायसवाल और पिता भूपेंद्र जायसवाल उर्फ गुड्डन इस समय यशस्वी के साथ मुंबई में ही हैं। टेस्ट टीम में चुने जाने पर बाएं हाथ के विस्फोटक बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल ने खुशी जताई हैं। मीडिया से बात करते हुए उनके पिता भूपेंद्र की आंसू निकल आए।
घर के कंपाउंड में घंटों प्रैक्टिस कराते थे पिता
आईपीएल में अपनी बल्लेबाजी से धमाल मचाने वाले यशस्वी जायसवाल का पूरा जीवन संघर्षों से भरा रहा है। शायद यही कारण है कि मैदान में जब वे उतरते हैं तो उनके खेल में क्रिकेट के प्रति वह जुनून दिखाई देता है। 11 साल की छोटी उम्र में वे मुंबई चले गए। मुंबई में उन्हें रहने के लिए भी कोई जगह नहीं थी। वे लगभग एक साल तक एक टेंट में रहे। गोलगप्पे भी बेचने पड़े। यशस्वी के बड़े पिता रमाकांत जायसवाल ने बताया कि यशस्वी छोटी उम्र से ही क्रिकेट के प्रति काफी जुनूनी था।
उसे इस मुकाम तक पहुंचाने में उसके पिता भूपेंद्र ने उसका काफी साथ दिया है। यशस्वी के पिता घर के कंपाउंड में ही घंटों तक यशस्वी को प्रैक्टिस कराते थे। इसके अलावा यशस्वी जब छोटा था तो जहां-जहां उसके मैच होते थे। वहां-वहां उसके पिता उसे लेकर जाते थे।
उन्होंने बताया कि यशस्वी के संघर्ष और कड़ी मेहनत ने उसे आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। उसके घर में बड़ी मां मनोरम, लक्ष्मीकांत, माया देवी, रीता देवी के साथ भाई डॉ. विकास जायसवाल, विशाल, शिवम व अन्य लोगों ने एक-दूसरे का मुंह मीठा कराकर बधाई दी।
जिले के खिलाड़ियों में भी दिखा उत्साह
यशस्वी जायसवाल का चयन टीम इंडिया में होने से जहां परिजन और जिलेवासी खुश हैं। वहीं क्रिकेटर खिलाड़ियों का उत्साह दोगुना हो गया है। बचपन में जिन मैदानों में यशस्वी क्रिकेट का अभ्यास करता था। उन मैदानों में खिलाड़ियों ने जमकर जश्न मनाया। सुरियावां के मेढ़ी मैदान के साथ ही पाली स्थित मैदान में खिलाड़ियों का उत्साह देखते बनता था। खिलाड़ी जमकर जश्न मना रहे थे।
बचपन में उसे क्रिकेट बारीकियां सीखाने वाले आरिफ हुसैन ने बताया कि यशस्वी के अंदर क्रिकेट को लेकर एक दिवानगी थी। वह जब भी मैदान पर उतरता था तो एक अलग ही अंदाज में बैटिंग करता था। आज टीम इंडिया में यशस्वी का चयन होने के बाद अन्य खिलाड़ी भी काफी प्रोत्साहित हुए हैं।