ज्ञानपुर। पंचायत चुनाव की आहट के बीच ग्राम प्रधानों पर भ्रष्टाचार के दाग भी बढ़ गए हैं। चार साल में जहां 40 प्रधानों की शिकायत डीएम और डीपीआरओ दफ्तर पहुंची, वहीं अप्रैल 2025 से सितंबर तक महज छह महीने में 50 ग्राम प्रधानों पर घोटाले के आरोप लग गए। सभी की जांच की जा रही है। ऐसे में आने वाले पंचायत चुनाव में संबंधित ग्राम पंचायतों में भ्रष्टाचार का मुद्दा तूल पकड़ सकता है। जिले में कुल 546 ग्राम पंचायतें हैं। वर्ष 2021 में पंचस्थानीय चुनाव के बाद प्रधान चुने गए। गांव के विकास के लिए राज्य वित्त, केंद्रीय वित्त, स्वच्छ भारत मिशन, टाइड फंड, अनटाइड फंड से गांव में नाली, खड़ंजा, शौचालय मरम्मत, इंटरलाॅकिंग समेत अन्य कार्य कराए जाते हैं। सचिव और प्रधान की मिलीभगत से गांव में विकास की धनराशि में गड़बड़ी की जाती है। वैसे तो प्रधानों के खिलाफ शिकायतें शुरुआती साल से ही आ रही थीं लेकिन 2025 में इनकी संख्या में वृद्धि हुई। कई ग्राम प्रधानों पर आरोप सही सिद्ध हुए तो उनकी प्रधानी चली गई, जबकि कई की गर्दन फंसी हुई है। आंकड़ों पर गौर करें तो कलेक्ट्रेट और विकास भवन में अप्रैल से सितंबर तक करीब 70 ग्राम प्रधानों के खिलाफ शिकायतें आ चुकी हैं। इनकी जांच चल रही है। इनमें भदोही ब्लॉक के घसकरी, दरुनहां, परगासपुर, डीघ ब्लॉक के बेरवा पहाड़पुर औराई के गोलखरा, जाठी समेत अन्य गांवों के प्रधान शामिल हैं। ग्राम प्रधानों के खिलाफ सीधी शिकायतों पर जांच नहीं होती। शिकायतकर्ता को शपथ पत्र देना पड़ता है। डीएम या सीडीओ स्तर के अधिकारी जांच का आदेश करते हैं। जांच भी जिला स्तरीय अधिकारी से कराई जाती है। आरोप सिद्ध होने पर प्रधान के वित्तीय अधिकार सीज किए जा सकते हैं। वित्तीय अनियमितता मिलने पर सरकारी धन की वसूली की जाती है। पिछले पांच साल में सात ग्राम प्रधानों के वित्तीय अधिकार अनियमितता के आरोप सिद्ध होने पर सीज किए जा चुके हैं, जबकि 2025 में तीन प्रधानों के अधिकार सीज किए गए।