फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bhadohi News ›   Huge shortage of teachers, how to get better results

शिक्षकों की भारी कमी, कैसे बेहतर हो रिजल्ट

Sun, 26 Jun 2022 12:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jun 2022 12:12 AM IST
विज्ञापन
Huge shortage of teachers, how to get better results
विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज ज्ञानपुर। संवाद - फोटो : BHADOHI
ज्ञानपुर। राजकीय माध्यमिक एवं इंटर कॉलेजों में शैक्षिक व्यवस्था में सुधार की कवायद धरातल पर फेल हो गई है। शिक्षकों और प्रवक्ताओं की कमी के कारण छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही है। शायद यहीं वजह है कि इस बार के यूपी बोर्ड परीक्षा रिजल्ट में इंटरमीडिएट के टॉप-10 में मात्र एक छात्र का नाम आया। 40 फीसदी से ज्यादा शिक्षकों और 70 फीसदी प्रवक्ताओं के पद रिक्त चल रहे हैं।
विज्ञापन

जिले के 183 माध्यमिक और इंटर कॉलेजों में 38 राजकीय, 25 वित्तपोषित और 120 वित्तविहीन शामिल हैं। इसमें करीब एक लाख छात्र-छात्राएं नौवीं से 12वीं तक की शिक्षा ग्रहण करते हैं। स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, स्कूलों की स्थिति में बदलाव के लिए तमाम बातेें की जाती हैं, लेकिन धरातल पर राजकीय स्कूलों की दशा काफी खराब है। 33 राजकीय माध्यमिक विद्यालय और पांच इंटर कॉलेज हैं। इसमें सहायक अध्यापकों के 304 पद सृजित हैं। 176 सहायक अध्यापक तैनात हैं जबकि 128 रिक्त हैं। प्रवक्ताओं की संख्या तो और भी खराब है। सृजित 69 पदों में मात्र 20 मौजूद हैं जबकि 49 रिक्त है। इसके सापेक्ष वित्तपोषित कॉलेजों की हालत कुछ ठीक है। वित्तपोषित के सामान्य 23 कॉलेजों में प्रवक्ता के 87 पद सृजित हैं, 70 मौजूद और 17 रिक्त है। सहायक अध्यापक के सृजित 231 पदों में 160 मौजूद और 71 रिक्त हैं। दो अल्पसंख्यक वित्तपोषित कॉलेज में 33 पदों में 25 ही तैनात हैं। शिक्षकों की कमी के कारण छात्र-छात्राओं को विषयवार शिक्षा देना कॉलेज प्रशासन के लिए चुनौती बनी रहती है। सालों से बनी शिक्षकों की कमी अब तक पूरी नहीं हो सकी। यही कारण है कि यूपी बोर्ड के आने वाले परीक्षा परिणाम में हर साल हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों के टॉपटेन में एकाध छात्र ही अपनी छाप छोड़ पाते हैं। जिले के सबसे पुराने कॉलेजों में शामिल विभूति नारायण राजकीय इंटर कॉलेज की हालत काफी चिंताजनक है। यहां शिक्षकों और प्रवक्ताओं के 60 से अधिक पद सृजित हैं, लेकिन वर्तमान में 25 के ही करीब पढ़ा रहे हैं। बेहतर शिक्षा, अनुशासन संग अन्य व्यवस्थाओं के लिए कभी पूर्वांचल में अपनी छाप छोड़ने वाला यह कॉलेज आज शिक्षकों और प्रवक्ताओं की कमी से जूझ रहा है। एक दशक पूर्व यहां प्रवक्ताओं और शिक्षकों की अच्छी खासी संख्या रहती थी, लेकिन हर साल तीन से चार शिक्षक और प्रवक्ता सेवानिवृत्त हो गए। कुछ प्रवक्ताओं को राजकीय माध्यमिक स्कूलों में प्रधानाचार्य बनाकर भेज दिया गया। उनके स्थान पर दूसरी नियुक्ति न होने से समस्या बढ़ती गई।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed