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कोरोना काल में अस्पतालों को मिली संजीवनी, लग गए ऑक्सीजन प्लांट
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वैश्विक महामारी कोरोना ने सभी को हिलाकर रख कर दिया। किसी से उसकी रोजी-रोटी छिन ली, तो किसी के सिर से पिता का साया उठ गया। अस्पतालों में समुचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं होने के कारण कई लोगों की जान तक चली गई। ऑक्सीजन के लिए कई लोगों ने हजारों रुपये दे दिए, लेकिन जान नहीं बची। उसी दौरान अस्पतालों को संजीवनी मिलनी शुरू हुई। कुछ ही महीनों में अस्पतालों में व्यवस्था मुकम्मल करके मरीजों को राहत दी जाने लगी।
जिले के पांच अस्पतालों में कुल मिलाकर 2100 लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट स्थापित हो गए। उन्हें चलाने के लिए जनरेटर आदि की भी व्यवस्था की गई है। और तो और अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाकर भी सुविधाएं सुदृढ़ कर ली गई हैं। भदोही, ज्ञानपुर, सुरियावां, औराई, डीघ में ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं। औराई में ऑक्सीजन प्लांट की पाइप लाइन भी बिछाई गई है। जिले में कुल पांच आक्सीजन प्लांट हैं। इन प्लांटों से इमरजेंसी वार्ड व अन्य विशेष वार्डों में भी ऑक्सीजन की व्यवस्था है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अस्पतालों के ऐसे बेड जो अक्सर खराब रहते थे, उन्हें व्यवस्थित कर दिया गया है। कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर में ऑक्सीजन की समस्या पैदा होने के कारण कई लोगों की जान जा चुकी थी। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और लोगों की जान की सुरक्षा करने के लिए जिले में एक के बाद एक पांच ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए। शुरूआती दौर में 1100 एलपीएम की क्षमता वाले दो ऑक्सीजन प्लांटों से उत्पादन शुरू किया गया। उसके बाद से एक-एक करके आक्सीजन प्लांट की संख्या बढ़ती गई। भदोही स्थित महाराजा बलवंत सिंह चिकित्सालय में स्थापित 850 लीटर प्रति मिनट और महाराजा चेत सिंह चिकित्सालय में 500, औराई में 250 और सुरियावां में 400 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन आपूर्ति क्षमता वाले प्लांट लगाए गए हैं। जिले में छह सीएचसी, एक जिला अस्पताल, एक राजकीय अस्पताल संचालित हैं। जिले में मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित तो है, लेकिन अभी तक बना नहीं है। इसके लिए जमीन चिह्नित हो गई है, लेकिन अभी तक शिलान्यास नहीं हुआ है। 24 अक्तूबर 2021 को जिले में विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां मेडिकल कॉलेज जल्द ही बनवाने का आश्वासन दिया था। उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.अमित कुमार दुबे का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान जिले में कुल पांच आक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन ट्रेनिंग दी गई। इसके साथ ही अस्पतालों में जो अन्य कमियां थीं, उन्हें दूर कर लिया गया है। सभी अस्पतालों में मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
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जिले के पांच अस्पतालों में कुल मिलाकर 2100 लीटर प्रति मिनट की क्षमता वाले ऑक्सीजन प्लांट स्थापित हो गए। उन्हें चलाने के लिए जनरेटर आदि की भी व्यवस्था की गई है। और तो और अस्पतालों में बेड की संख्या बढ़ाकर भी सुविधाएं सुदृढ़ कर ली गई हैं। भदोही, ज्ञानपुर, सुरियावां, औराई, डीघ में ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं। औराई में ऑक्सीजन प्लांट की पाइप लाइन भी बिछाई गई है। जिले में कुल पांच आक्सीजन प्लांट हैं। इन प्लांटों से इमरजेंसी वार्ड व अन्य विशेष वार्डों में भी ऑक्सीजन की व्यवस्था है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार अस्पतालों के ऐसे बेड जो अक्सर खराब रहते थे, उन्हें व्यवस्थित कर दिया गया है। कोरोना संक्रमण की पहली और दूसरी लहर में ऑक्सीजन की समस्या पैदा होने के कारण कई लोगों की जान जा चुकी थी। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने और लोगों की जान की सुरक्षा करने के लिए जिले में एक के बाद एक पांच ऑक्सीजन प्लांट लगाए गए। शुरूआती दौर में 1100 एलपीएम की क्षमता वाले दो ऑक्सीजन प्लांटों से उत्पादन शुरू किया गया। उसके बाद से एक-एक करके आक्सीजन प्लांट की संख्या बढ़ती गई। भदोही स्थित महाराजा बलवंत सिंह चिकित्सालय में स्थापित 850 लीटर प्रति मिनट और महाराजा चेत सिंह चिकित्सालय में 500, औराई में 250 और सुरियावां में 400 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन आपूर्ति क्षमता वाले प्लांट लगाए गए हैं। जिले में छह सीएचसी, एक जिला अस्पताल, एक राजकीय अस्पताल संचालित हैं। जिले में मेडिकल कॉलेज प्रस्तावित तो है, लेकिन अभी तक बना नहीं है। इसके लिए जमीन चिह्नित हो गई है, लेकिन अभी तक शिलान्यास नहीं हुआ है। 24 अक्तूबर 2021 को जिले में विभिन्न परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करने आए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यहां मेडिकल कॉलेज जल्द ही बनवाने का आश्वासन दिया था। उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.अमित कुमार दुबे का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान जिले में कुल पांच आक्सीजन प्लांट लगाए गए हैं। स्वास्थ्य कर्मियों को कोविड संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए ऑनलाइन व ऑफलाइन ट्रेनिंग दी गई। इसके साथ ही अस्पतालों में जो अन्य कमियां थीं, उन्हें दूर कर लिया गया है। सभी अस्पतालों में मरीजों का इलाज किया जा रहा है।
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