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कमिश्नर का आदेश बेअसर,पशुओं के मरने का सिलसिला जारी

Thu, 11 Jul 2019 12:27 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 11 Jul 2019 12:27 AM IST
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ज्ञानपुर। दो दिन पूर्व कमिश्नर विंध्याचल मंडल आनंद सिंह ने चीनी मिल औराई परिसर में बने अस्थायी गौशाला का निरीक्षण कर बीडीओ औराई और सीवीओ को पशुओं की सुरक्षा के बाबत कड़ी हिदायत दी थी, लेकिन, उसका असर नहीं दिख रहा। आदेश के बाद भी छाजन निर्माण न होने से पशु बारिश में भीगने को मजबूर दिखे। बुधवार को भी गौशाला में संरक्षण ले रहे एक पशु की मौत हो गई।
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विकास खंड औराई के चीनी मिल परिसर में संचालित गौशाला में चारा, पानी, इलाज, रखरखाव, साफ-सफाई आदि की शिकायतों पर कमिश्नर ने दो दिन पूर्व ही मातहतों के साथ औचक निरीक्षण कर हकीकत परखी और बीडीओ औराई को निर्देशित किया था। मौके पर उपस्थित रहे पशुपालन विभाग के अधिकारियों को भी कमिश्नर के सामने झेंपना पड़ा था। धरातल पर गौशाला की स्थिति बदतर हो जाने से संचालन समिति तो क्या, आम आदमी भी सहज ही यह अंदाजा लगा सकता है कि लाखों खर्च के बाद भी स्थिति दयनीय है। बरसात के मौसम में गौशाला में चहुंओर गंदगी, पशुओं के कंकाल यह सोचने पर मजबूर कर रहे हैं कि कभी उक्त मिल में रोजगार के लिए मजदूरों की लंबी कतार लगती थी। खुले आसमान के नीचे दर्जनों पशुओं की हालत क्या होती होगी। चारे के नाम पर बने एक कमरे में भूसा, पुआल का भंडारण किया गया है और पानी से सराबोर चारा खाने लायक न रहने से पशु बीमार होते हैं। मिल परिसर में उगी झाड़-झंखाड़ के बीच पहुंचने वाले पशु जहरीले जीव-जंतुओं के डंसने से भी मौत के मुंह में चले जाते हैं। पूर्व में मृत पशुओं को आस-पास ही फेंके जाने से सड़ांध से सांस लेना दुश्वार हो जाता है। सुरक्षा के नाम पर मात्र खानापूर्ति हुई है। इस संबंध में बीडीओ श्याम जी का कहना था कि अस्थाई गौशाला का नाम देकर हाथ-पांव रोक दिया गया है। न तो हम कोई नया निर्माण करा सकते हैं और न ही योजना बना सकते हैं। चीनी मिल के खाली होने वाले गोदामों में पशुओं को समुचित शरण दिलाई जाएगी। उधर सीवीओ डॉ. जेपी सिंह ने समुचित देखभाल का दावा किया। कहा कि अस्थायी गौशालाओं में सिर्फ सांड़ के रहने की व्यवस्था होती है। किसान गाय और छोटे बछड़ों को भी लाकर छोड़ दे रहे हैं। बताया कि अभी तक जो भी मौतें हुईं उनमें गाय और बछड़े शामिल हैं, सांड नहीं। वैसे भी बरसात के मौसम में पशुओं के रखरखाव की जिम्मेदारी बढ़ जाती है, जिसका पालन हो रहा है।
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