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ढैंचा से तैयार होगी हरी खाद
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ज्ञानपुर। रासायनिक उर्वरक से बेजान होती खेतों की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए जिले में 200 क्विंटल ढैंचा बीज की आपूर्ति होगी। पहले चरण की स्वीकृति मिलने के बाद कृषि विभाग वितरण करने में जुट गया है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही आपूर््ित शुरू हो जाएगी और किसानों को वितरित भी किया जाएगा। बीज आपूर्ति की जिम्मेदारी बीज विकास निगम को मिली है।
जिले में 50 हजार हेक्टेयर से अधिक खेत में रबी और खरीफ सीजन में गेहूं और धान की खेती होती है। अच्छी पैदावार के लिए किसान रासायनिक उर्वरकों का अधिकाधिक प्रयोग करते हैं। जिससे धीरे-धीरे मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट जाती है। किसान हरी खाद से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए ढैंचा की बोआई करते हैं। पिछले वर्ष जिले में करीब 400 क्विंटल बीज की बिक्री की गई थी। इस वर्ष अभी पहले चरण में 200 क्विटल बीज आपूर्ति की स्वीकृति दी गई है। जिसकी कीमत करीब 70 रुपये किलो निर्धारित है। किसानों को बीज पर अनुदान दिया जाएगा। वैसे अभी अनुदान की साथ तय नहीं हो सका है। माना जा रहा है कि अन्य वर्षों की तरह 50 फीसद अनुदान तय होगा।
उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने बताया कि हरी खाद के लिए ढैंचा की बोआई मई में शुरू होगी। फसल की बोआई के 40 से 60 दिन के अंदर गहरी जोताई करा फसल को मिट्टी में मिला देना चाहिए। हरी खाद को पलटते समय खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है। फसल में फूल आने से पूर्व हरी खाद के लिए सर्वोत्तम होती है। प्रति बीघा ढैंचा की बोआई के लिए 20 किलो बीज पर्याप्त होता है। उन्होंने बताया कि भूमि में जीवांश पदार्थ और पोषक तत्वों की मात्रा में वृद्धि होती है। पोषक तत्वों का निछालन कम से कम होता है। साथ ही पोषण तत्वों के संग्रहण की क्षमता बढ़ जाती है। भूमि की जल धारण, संचयन एवं वायु संचार क्षमता में वृद्धि होती है। भूमि में कार्य करने वाले लाभदायक जीवाणुओं की क्रियाशीलता में भी बढ़ोत्तरी होती है। फसलोत्पादन में वृद्धि के साथ गुणवत्ता भी अच्छी होती है। उन्होंने बताया कि चरण में 200 क्विटल बीज आपूर्ति की स्वीकृति मिली है। जल्द ही बीज आने की उम्मीद है।
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जिले में 50 हजार हेक्टेयर से अधिक खेत में रबी और खरीफ सीजन में गेहूं और धान की खेती होती है। अच्छी पैदावार के लिए किसान रासायनिक उर्वरकों का अधिकाधिक प्रयोग करते हैं। जिससे धीरे-धीरे मिट्टी की उर्वरा शक्ति घट जाती है। किसान हरी खाद से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए ढैंचा की बोआई करते हैं। पिछले वर्ष जिले में करीब 400 क्विंटल बीज की बिक्री की गई थी। इस वर्ष अभी पहले चरण में 200 क्विटल बीज आपूर्ति की स्वीकृति दी गई है। जिसकी कीमत करीब 70 रुपये किलो निर्धारित है। किसानों को बीज पर अनुदान दिया जाएगा। वैसे अभी अनुदान की साथ तय नहीं हो सका है। माना जा रहा है कि अन्य वर्षों की तरह 50 फीसद अनुदान तय होगा।
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उप निदेशक कृषि अरविंद सिंह ने बताया कि हरी खाद के लिए ढैंचा की बोआई मई में शुरू होगी। फसल की बोआई के 40 से 60 दिन के अंदर गहरी जोताई करा फसल को मिट्टी में मिला देना चाहिए। हरी खाद को पलटते समय खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है। फसल में फूल आने से पूर्व हरी खाद के लिए सर्वोत्तम होती है। प्रति बीघा ढैंचा की बोआई के लिए 20 किलो बीज पर्याप्त होता है। उन्होंने बताया कि भूमि में जीवांश पदार्थ और पोषक तत्वों की मात्रा में वृद्धि होती है। पोषक तत्वों का निछालन कम से कम होता है। साथ ही पोषण तत्वों के संग्रहण की क्षमता बढ़ जाती है। भूमि की जल धारण, संचयन एवं वायु संचार क्षमता में वृद्धि होती है। भूमि में कार्य करने वाले लाभदायक जीवाणुओं की क्रियाशीलता में भी बढ़ोत्तरी होती है। फसलोत्पादन में वृद्धि के साथ गुणवत्ता भी अच्छी होती है। उन्होंने बताया कि चरण में 200 क्विटल बीज आपूर्ति की स्वीकृति मिली है। जल्द ही बीज आने की उम्मीद है।
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