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Bhadohi News: दादी-पोती ने सूझबूझ से नदी में डूब रहे दो युवकों की बचाई जिंदगी, एसपी ने की बंदगी

Thu, 19 Oct 2023 12:58 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 19 Oct 2023 12:58 AM IST
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Grandmother and granddaughter wisely saved the lives of two youths who were drowning in the river, SP paid obeisance
15 मई, 2022 की तारीख जिले वासियों के जेहन में है। जब दादी की पोती की जोड़ी ने सूझबूझ से दो जिंदगी बचा ली। उस समय दादी पोती दो लोगों के लिए भगवान बनकर आई। दादी और पोती ने गंगा में डूब रहे लोगों को साड़ी फेंककर गंगा से बाहर निकाला। साहसी जोड़ी को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। बिहरोजपुर निवासी गौतम देवी ने बताया कि 15 मई, 2022 को वे अपनी पोती शिवा मिश्रा के साथ बिहरोपुजर के दर्जिया घाट पर नहाने गई थी। इस बीच 10 लड़के भी तट पर स्नान कर रहे थे। लड़के कौलापुर गांव में एक शादी समारोह में आए हुए थे। बताया कि नहाने के दौरान जब लड़के आगे जाने लगे तो उन्होंने उन्हें मना भी किया और बताया कि आगे पानी गहरा है, लेकिन वे मेरी बातों को अनुसुना कर दिए। इस बीच अचानक सभी डूबने लगे। हालांकि चार तो किसी तरह तैर कर बाहर निकल आए, लेकिन छह लड़के डूबने लगे। तब पोती ने बिना समय गंवाए मेरी साड़ी को तत्काल गंगा में फेंक दिया और मैंने भी दूसरी साड़ी फेंक कर दो लड़कों को गंगा से बाहर निकाल लिया। गौतम देवी को आज भी चार युवकों को न बचा पाने का अफसोस है। उस समय दादी-पोती के इस जोड़ी की पूरे जिले में खुब चर्चा हुई थी। सभी ने दादी पोती की सूझबूझ की खूब तारीफ की थी। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक दोनों को 26 जनवरी के अवसर पर प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया और हिम्मत की सराहना की थी।
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फोटो: 12
संवाद न्यूज एजेंसी झंडे पर सवार होकर आई माता, छह पीढ़ी से कर रहे सेवा
औराई। नवरात्र में औराई चौराहे के समीप मिर्जापुर मार्ग पर स्थित माता कड़े मंदिर में आस्थावानों की भीड़ उमड़ती है। इस मंदिर में मां का सेवादार छह पीढ़ी से एक परिवार है। यहां श्रद्धालु मनौती पूरी पर मुंडन कराते हैं। मंदिर के सेवादार कन्हैया लाल ने बताया कि वंश न चलने के कारण उनकी दादी रजवंती 11 वर्ष तक गाजे-बाजे के साथ कौशांबी स्थित मां कड़े धाम तक यात्रा करती थी। एक बार घने जंगल से गुजरने के दौरान मां उनके उनको दर्शन दिए और उनके झंडे पर सवार होकर गांव आई। गांव के ही एक नीम के पेड़ में उस ध्वज को लगा दिया गया। उसके बाद से ही नवरात्र के अलावा हर तीज त्योहार पर बड़ी संख्या में आस्थावानों की भीड़ जुटती है। मान्यता है कि यहां माता लोगों की हर मनौती पूरी करती है।
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फोटो: 13

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पूजा मुहूर्त विधि
बरजी गांव निवासी पंडित रामकमल तिवारी ने बताया कि मां पार्वती ने अपने पुत्र स्कंद (कार्तिकेय) को युद्ध के लिए प्रशिक्षित
करने के लिए स्कंदमाता का रूप धारण किया था। मां को श्वेत रंग प्रिय है। मां की उपासना पीले रंग के वस्त्र पहन कर करनी चाहिए। भक्त मां को केला का भोग लगाए। मां की उपासना से भक्त की समस्त मनोकामनाएं स्वत: ही पूरी हो जाती है।
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इन मंत्रों से करें मां की अराधना
-ओम् देवी स्कन्दमातायै नम:
-ओम् स्कंदमात्रे नम:
-सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।
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