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गाजी मियां के मजार को कराया गया गुस्ल, पढ़ी फातिहा

Tue, 31 May 2016 01:49 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही
ब्यूरो/ अमर उजाला ,भदोही Updated Tue, 31 May 2016 01:49 AM IST
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 Ghazi was taken to the tomb of Mian Gusl, read the Fatiha
गाजी मियां के मेले के दूसरे दिन सोमवार को खरीदारी करने के लिए उमड़ी भीड़
 सैय्यद सालार मसऊद गाजी मियां के मेले के दूसरे दिन जायरीनों की भीड़ ने मेले को गुलजार कर दिया। परंपरा है कि मेले में आंधी आती है, लेकिन इस बार आंधी नहीं आने से दर्शनार्थियों और दुकानदारों को भारी राहत रही। मौसम भी ठीक ठाक रहा, जिससे रात भर और सोमवार को दिन में भी मेलार्थियों का रौजे पर लगातार आना जाना लगा रहा और भीड़ देख दुकानदारों के चेहरे पर रौनक लौट आई। भिश्ती के अखाड़ेदारों की ओर से शाम को अखाड़ा निकाल कर मजार को गुस्ल कराया गया। मजार पर फातिहा पढ़ने वालों का सिलसिला शुरू देर शाम तक चला।
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सोमवार को दूसरे दिन भी मेले में खूब चहल पहल रही। दोपहर तक मेला क्षेत्र जायरीनों से खचाखच भर गया था। शाम को हर साल गाजी मियां के मजार को गुस्ल कराने की परंपरा रही है। भिश्ती के अखाड़ेदारों की ओर से शाम को अखाड़ा निकाल कर मजार को गुस्ल कराया गया। इस दौरान बाबा की शान में कसीदे पढ़े गए। गुस्ल कराने वालों में मुर्शिद अली, नफीस अंसारी, सगीर अहमद, नबीउल्लाह अंसारी, जमील नेता, इश्तियाक अहमद, मुस्लिम अंसारी, मो.छेदी, शाहीन अंसारी, गुड्डू अंसारी, सरफराज, महमूद आलम आदि रहे। मेले को संपन्न कराने में नगर पालिका तथा पुलिस प्रशासन का अहम योगदान रहा। 48 घंटे लगातार मेले में शांति व्यवस्था कायम रख पुलिस ने प्रशंसनीय कार्य किया। शनिवार को एसडीएम आशाराम यादव और सीओ एपी सिंह के साथ मेले का भ्रमण करते रहे। शाम को मेला संपन्न होते ही मेला कमेटी के साथ प्रशासन ने भी राहत की सांस ली।
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आज अंबर नीम पर लगेगा मेला
भदोही। गाजी मियां के मेले के साथ शहर के अंबर नीम पर लगने वाला सुकालीगंज का मेला भी महत्व रखता है। यहां स्थानीय महिलाओं की जहां भागीदारी अधिक होती है, वहीं श्रृंगार सामग्री की दुकानें लोगों के आकर्षण का केंद्र रहती हैं। लगभग छह दशक पूर्व महिलाओं की भागीदारी के नजरिए से इस मेले की शुरुआत की गई थी। 
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गाजी मियां के मेले के दूसरे दिन से ही अंबरनीम पर चहल पहल शुरू हो जाती है। तीसरे दिन का मेला यहां स्थानांतरित हो जाता है। यह सौंदर्य सामग्री की खरीदारी के लिए प्रसिद्ध है। इसलिए इसे महिलाओं का मेला कहा जाता है। शहर की बहन बेटियां जो दूसरे शहरों में होती हैं वे भी इसका लुत्फ उठाने के लिए मेले के दौरान अपने मायके आ जाती हैं और इसमे बढ़ चढ़ कर खरीदारी करती हैं। यहां कानपुर, कन्नौज के इत्र, फिरोजाबाद की चूड़ियां, चुनार के चीनी के आइटमों के अलावा खाने पीने की दुकानें बहुतायत होती है। खास बात यह है कि इसका संचालन स्थानीय लोग ही करते आए हैं। महिलाओं की भीड़ को देखते हुए लोगों ने महिला पुलिस की तैनाती करने की मांग की है।



जलजमाव से श्रद्धालुओं को हुई समस्या (फोटो-51)
मुख्य मार्ग पर जलजमाव से अव्यवस्था
भदोही। मेला शुरू होने से पहले  हलांकि नगर पालिका द्वारा तमाम तरह की व्यवस्था के वादे किए गए थे, लेकिन  मेले के दिन मजार की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर जलजमाव से श्रद्धालुओं का  भारी दिक्कत का सामना करना पड़ा। भारी भीड़ के चलते एक तो मार्ग पर पैर  रखने की जगह नहीं थी ऊपर से जलजमाव ने मुश्किलें बढ़ा दी। मेले में आते  जाते जिन्हें पानी में पैर रखना प़ड़ रहा था, वे नगर पालिका को कोसते नजर  आए।
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