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अप्रैल में एक ही घर से उठे चार जनाजे
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भदोही। कोरोना की दूसरी लहर कालीन नगरी के लिए जानलेवा साबित हो रही है। विशेष रूप से अप्रैल माह में एक दर्जन से अधिक कालीन निर्यातकों की मौत हो चुकी है। इसमें सबसे हृदय विदारक बात यह रही कि अकेले एक कालीन निर्यातक के घर शुक्रवार को चौथी मौत हुई। 4 अप्रैल को कालीन निर्यातक नसीम अंसारी की वालदा की मौत होने के बाद से अब तक चार मौतें होने से कालीन उद्योग शोक और चिंता में डूब गई है।
स्व.हाजी बदरुद्दीन अंसारी काफी समय तक आल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के मानद कोषाध्यक्ष रहे थे। 4 अप्रैल को उनकी पत्नी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। इसके लगभग 15 दिन बाद 20 अप्रैल को उनके बेटे नसीम अंसारी का वाराणसी के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। उस समय नसीम अंसारी की पत्नी भी उसी अस्पताल में उपचाराधीन थी। जिनका निधन 24 अप्रैल हुआ था।
अभी परिजन तीनों मौतों के शोक से उबर भी नहीं पाए थे कि बीती रात उनके नसीम अंसारी के बड़े भाई जमाल अंसारी की मौत की खबर आ गई। शुक्रवार को तड़के सोशल मीडिया पर यह खबर सुनते ही लोग स्तब्ध रह गए। हर कोई मर्माहत हो गया। उनके स्टेशन रोड स्थित आवास पर शोक संवेदना व्यक्त वालों का तांता लग गया। उनके शव को शुक्रवार को दोपहर पीरखांपुर के कब्रिस्तान में सुपुर्देखाक किया गया जिसमे भारी संख्या में लोग शामिल रहे।
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स्व.हाजी बदरुद्दीन अंसारी काफी समय तक आल इंडिया कारपेट मैनुफैक्चरर्स एसोसिएशन (एकमा) के मानद कोषाध्यक्ष रहे थे। 4 अप्रैल को उनकी पत्नी का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। इसके लगभग 15 दिन बाद 20 अप्रैल को उनके बेटे नसीम अंसारी का वाराणसी के एक निजी अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। उस समय नसीम अंसारी की पत्नी भी उसी अस्पताल में उपचाराधीन थी। जिनका निधन 24 अप्रैल हुआ था।
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अभी परिजन तीनों मौतों के शोक से उबर भी नहीं पाए थे कि बीती रात उनके नसीम अंसारी के बड़े भाई जमाल अंसारी की मौत की खबर आ गई। शुक्रवार को तड़के सोशल मीडिया पर यह खबर सुनते ही लोग स्तब्ध रह गए। हर कोई मर्माहत हो गया। उनके स्टेशन रोड स्थित आवास पर शोक संवेदना व्यक्त वालों का तांता लग गया। उनके शव को शुक्रवार को दोपहर पीरखांपुर के कब्रिस्तान में सुपुर्देखाक किया गया जिसमे भारी संख्या में लोग शामिल रहे।
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